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बीजेपी के दिग्गज कर रहे दावा, MP में BJP के बनेंगे 80% जिला पंचायत अध्यक्ष

इंदौर। मध्य प्रदेश में 875 जिला पंचायत सीटों में से 386 सीटें जीतने के कांग्रेस के दावों पर बीजेपी ने पलटवार किया है। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि पूर्व सीएम कमलनाथ ख्वाब देख रहे हैं। बीजेपी के 80 फीसदी जिला पंचायत अध्यक्ष बनेंगे। साथ ही सभी 16 महापौर भी बीजेपी के होंगे। उन्होंने इंदौर से कांग्रेस के मेयर प्रत्याशी संजय शुक्ला के 20 हजार लोगों को दिए भोज पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि उनके पास बहुत पैसा है। कहीं न कहीं तो खर्च करना है। बाद में जश्न मनाने का मौका नहीं मिलेगा, इसलिए वे पहले ही जश्न मना रहे हैं।

 

 

दरअसल शनिवार को इंदौर के बीजेपी कार्यकर्ताओं को मतगणना संबंधी जानकारी और ट्रेनिंग देने के लिए शहर के विट्ठल रूकमणी गार्डन में एक बैठक रखी गई थी। जिसमें बीजेपी के मेयर प्रत्याशी पुष्यमित्र भार्गव समेत सभी 85 वार्डों के प्रत्याशी और मतगणना एजेंट शामिल हुए। उसी में कैलाश विजयवर्गीय भी शामिल हुए थे. इसी दौरान उन्होंने मीडिया से कहा कि प्रदेश में बीजेपी का माहौल है। ऐसे में कांग्रेस के दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। कांग्रेस ने पंचायतों के नतीजों के बाद दावा किया था कि प्रदेश की 875 जिला पंचायत सीटों में से 386 कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है। बीजेपी समर्थित प्रत्याशियों को 360 सीटों पर जीत मिली है। जबकि 129 सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी जीते हैं। जिनमें से बड़ी संख्या में कांग्रेस के प्रति रूझान रखने वाले प्रत्याशी है। इसके बाद से ही प्रदेश मे सियासी उठापठक शुरू हो गई है।

 

 

प्रदेश में 3 लाख 63 हजार 353 पंच, 22 हजार 924 सरपंच, 6 हजार 771 जनपद पंचायत सदस्य और 875 जिला पंचायत सदस्य के पदों पर चुनाव हुए थे. इसमें से 175 जनपद पंचायत सदस्य और एक जिला पंचायत सदस्य निर्विरोध घोषित किए गए हैं। निर्वाचन आयोग ने बताया कि 2 लाख 33 हजार 620 पंच और 712 सरपंच भी निर्विरोध चुन लिए गए हैं। इन चुनावों में 58 हजार 288 पंच पदों और 97 सरपंच पदों के लिए किसी ने नामांकन दाखिल नहीं किए। पंचायत चुनाव 8 जुलाई को खत्म हुए। तीसरे और अंतिम चरण में 62 फीसदी मतदान हुआ। 65 फ़ीसदी महिलाओं ने मतदान किया जबकि पुरुषों का प्रतिशत सिर्फ 60 फीसदी रहा। ग्रामीण इलाकों में पुरुषों के मुकाबले महिलाएं मतदान में आगे रहीं। पुरुषों के मुकाबले 5 फ़ीसदी ज़्यादा महिलाओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया।

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