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	<title>एजुकेशन Archives - MP Samachar - MP Samachar, मध्य प्रदेश समाचार, Latest MP Hindi News, मध्यप्रदेश न्यूज़</title>
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	<description>“MP Samachar - जहाँ सच सामने आता है”</description>
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		<title>पंडिताई करने अमेरिका गया, 14 साल तक फंसा रहा, मां की अर्थी को कंधा तक नहीं दे सका</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 10 Oct 2024 07:49:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>छतरपुर: छतरपुर जिले के निवासी कृष्ण कुमार द्विवेदी ने 14 वर्षों का लंबा इंतजार समाप्त करते हुए आखिरकार अमेरिका से स्वदेश लौटने में सफलता हासिल की। 2008 में स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती चैरिटेबल ट्रस्ट, नैनी, इलाहाबाद में शामिल होने के बाद, उन्हें 26 जनवरी 2011 को 50 अन्य वैदिक पंडितों के साथ अमेरिका के शिकागो भेजा [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>छतरपुर:</strong> छतरपुर जिले के निवासी कृष्ण कुमार द्विवेदी ने 14 वर्षों का लंबा इंतजार समाप्त करते हुए आखिरकार अमेरिका से स्वदेश लौटने में सफलता हासिल की। 2008 में स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती चैरिटेबल ट्रस्ट, नैनी, इलाहाबाद में शामिल होने के बाद, उन्हें 26 जनवरी 2011 को 50 अन्य वैदिक पंडितों के साथ अमेरिका के शिकागो भेजा गया था।</p>
<p>कृष्ण कुमार के अनुसार, संगठन के नियमों के अनुसार, अगर कोई वैदिक पंडित अच्छा कार्य करता है, तो उसे 2 साल की बजाय 3 साल तक शिकागो में रहने का मौका मिलता है। हालांकि, कृष्ण कुमार ने कुछ पंडितों के साथ मिलकर शिकागो शहर का भ्रमण किया और वहां 6 दिनों तक रह गए। इस दौरान, उन्होंने यह नहीं समझा कि शिकागो में रुकने के लिए एक निश्चित समय सीमा है।</p>
<h3>वीजा की समाप्ति और वापसी के जतन</h3>
<p>कृष्ण कुमार ने बताया कि इसी दौरान उनका वीजा समाप्त हो गया, जिससे वह शिकागो में फंस गए। उन्होंने स्वदेश लौटने के कई प्रयास किए, जिसमें अमेरिकी दूतावास में भारतीय अधिकारियों के साथ पत्राचार भी शामिल था। परंतु, उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्हें यहां तक कि अपनी मां के अंतिम संस्कार में भी शामिल होने का अवसर नहीं मिला।</p>
<h3>घर लौटने पर धूमधाम से स्वागत</h3>
<p>अंततः, 14 वर्षों के संघर्ष के बाद, कृष्ण कुमार अपने गांव लौटने में सफल हुए। उनकी वापसी पर गांव के लोगों ने ढोल नगाड़ों के साथ उनका भव्य स्वागत किया। गांव वालों ने उनकी साहसिकता और धैर्य की प्रशंसा की और उनकी घर वापसी को एक विशेष अवसर माना।</p>
<p>कृष्ण कुमार के साथ-साथ उनके परिवार और गांव के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है, क्योंकि उन्होंने इतने लंबे समय बाद अपने घर लौटने की खुशी को महसूस किया है। अब वे अपने जीवन को फिर से शुरू करने और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने के लिए तैयार हैं।</p>
<p>कृष्ण कुमार का यह अनुभव उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो विदेश में अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए जाते हैं, लेकिन कभी-कभी परिस्थितियों के कारण उन्हें वापसी में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।</p>
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		<title>बेरोजगारों से भारी फीस वसूल रही सरकार, &#8216;वन टाइम फीस&#8217; का वादा अभी तक अधूरा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Oct 2024 06:02:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[एमपी समाचार]]></category>
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		<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[भोपाल]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भोपाल: मध्यप्रदेश में बेरोजगारी एक गंभीर समस्या बनी हुई है। सरकार द्वारा बार-बार युवाओं के लिए रोजगार योजनाओं और राहत पैकेजों की घोषणा की जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत में बहुत कम सुधार दिखता है। हर साल बजट में रोजगार के नाम पर बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन अधिकांश योजनाएं फाइलों तक ही सीमित [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भोपाल:</strong> मध्यप्रदेश में बेरोजगारी एक गंभीर समस्या बनी हुई है। सरकार द्वारा बार-बार युवाओं के लिए रोजगार योजनाओं और राहत पैकेजों की घोषणा की जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत में बहुत कम सुधार दिखता है। हर साल बजट में रोजगार के नाम पर बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन अधिकांश योजनाएं फाइलों तक ही सीमित रह जाती हैं। इस बीच, बेरोजगार युवा केवल आश्वासनों और झूठे दिलासों के सहारे जी रहे हैं।</p>
<p>युवाओं की सबसे बड़ी मांगों में से एक है &#8216;वन टाइम फीस&#8217; (एक बार परीक्षा शुल्क) का लागू होना, ताकि सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे युवाओं को बार-बार परीक्षा फीस भरने से राहत मिल सके।</p>
<p><strong>वन टाइम फीस की मांग का उदय</strong><br />
बेरोजगार युवाओं का कहना है कि वे अक्सर अपने गांव, कस्बों और छोटे शहरों से भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में सरकारी नौकरियों की तैयारी के लिए आते हैं। यहां रहने और खाने का खर्च पहले ही उनकी आर्थिक स्थिति से बाहर होता है। इसके अलावा, हर बार अलग-अलग परीक्षाओं के लिए फीस भरना उनकी स्थिति को और जटिल बना देता है।</p>
<p>केंद्र सरकार की वन नेशन, वन इलेक्शन योजना के बीच मध्यप्रदेश के युवा अब &#8216;वन टाइम फीस&#8217; की मांग कर रहे हैं। यह मांग राज्य की डॉ. मोहन यादव सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा दिखा सकती है, जिससे लाखों बेरोजगार युवाओं को राहत मिलेगी।</p>
<p><strong>शिवराज सरकार में जारी हुआ था आदेश</strong><br />
मध्यप्रदेश में &#8216;वन टाइम फीस&#8217; की दिशा में कदम पहले भी बढ़ चुके हैं। अप्रैल 2023 में शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं के लिए वन टाइम परीक्षा शुल्क और रजिस्ट्रेशन की सुविधा का आदेश जारी किया था। हालांकि, यह आदेश केवल एक साल के लिए लागू किया गया था, और चुनावी मौसम के मद्देनजर इसे एक दिखावटी निर्णय के रूप में देखा गया।</p>
<p><strong>वित्त मंत्री का बजट भाषण और अधूरी घोषणाएं</strong><br />
वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने 2024 के बजट भाषण में घोषणा की थी कि राज्य सरकार बेरोजगार युवाओं द्वारा जमा की जाने वाली परीक्षा फीस के भार को कम करने के लिए एक नई नीति बनाएगी। लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यह युवाओं के लिए एक बड़ी निराशा का कारण बन रहा है, क्योंकि उन्हें अब तक कोई राहत नहीं मिली है।</p>
<p><strong>बेरोजगारों से भारी फीस वसूली</strong><br />
सरकारी परीक्षाओं के लिए बेरोजगार युवाओं से 400 रुपये से लेकर 1200 रुपये तक की भारी-भरकम फीस वसूली जा रही है। कांग्रेस नेता पारस सकलेचा ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को बेरोजगार युवाओं से इतनी फीस वसूलने के बजाय अच्छे अधिकारियों और कर्मचारियों के चयन के लिए खुद खर्च करना चाहिए।</p>
<p><strong>वन टाइम फीस: समाधान की दिशा में</strong><br />
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार &#8216;वन टाइम फीस&#8217; लेकर बेरोजगार युवाओं को बड़ी राहत दे सकती है। यह न केवल आर्थिक रूप से युवाओं के लिए सहायक होगा, बल्कि इससे उनकी सरकारी नौकरियों की तैयारी का बोझ भी कम होगा।</p>
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		<title>फ्लाईओवर के नीचे बच्चों की पाठशाला, 70 से अधिक बच्चे करते हैं पढ़ाई</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 05 Sep 2024 04:12:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[एमपी समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भोपाल: कार का हॉर्न सुनते ही बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठते हैं। यह नजारा लालघाटी के फ्लाईओवर के नीचे का है, जहां एडवोकेट विनीता सिंह माइग्रेंट लेबर के बच्चों को पढ़ाती हैं। विनीता ने लगभग 11 महीने पहले इस अनोखी &#8220;फ्लाईओवर पाठशाला&#8221; की शुरुआत की थी। विनीता बताती हैं कि इस इलाके में [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भोपाल:</strong> कार का हॉर्न सुनते ही बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठते हैं। यह नजारा लालघाटी के फ्लाईओवर के नीचे का है, जहां एडवोकेट विनीता सिंह माइग्रेंट लेबर के बच्चों को पढ़ाती हैं। विनीता ने लगभग 11 महीने पहले इस अनोखी &#8220;फ्लाईओवर पाठशाला&#8221; की शुरुआत की थी।</p>
<p>विनीता बताती हैं कि इस इलाके में माइग्रेंट लेबर के बच्चे रहते हैं, जिन्हें वे रोजाना पढ़ाती हैं। फ्लाईओवर के नीचे एक अस्थायी स्कूल बनाया गया है, जहां 20 से 50 बच्चों को पढ़ाई कराई जाती है। यह बच्चे रोज़ उनका इंतजार करते हैं। इस क्षेत्र में करीब 50 से अधिक घुमक्कड़ जनजातीय परिवार रहते हैं, जिनके लगभग 70 बच्चे यहां रहते हैं।</p>
<p><strong> राख और कोयले से हुई शुरुआत</strong></p>
<p>विनीता के मुताबिक, इस पहल का आइडिया एक साल पहले तब आया जब वे इस इलाके में एक सर्वे के लिए आई थीं कि बच्चों के आधार कार्ड बने हैं या नहीं। तब पता चला कि किसी भी बच्चे का आधार कार्ड नहीं बना था, इसलिए वे सरकारी स्कूल में प्रवेश नहीं ले सकते थे। एक बच्ची ने भारी मन से बताया कि पहले भी एक मैडम आई थीं, जो पढ़ाने का वादा करके चली गईं, लेकिन दोबारा कभी नहीं आईं। इसके बाद विनीता ने राख और कोयले से फ्लाईओवर के पिलर पर लिखकर बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि देखकर उन्होंने यह पाठशाला नियमित कर दी।</p>
<p><strong>पुलिस का सहयोग</strong></p>
<p>विनीता बताती हैं कि इस इलाके में कई असामाजिक तत्व सक्रिय हैं, लेकिन कोहेफिजा पुलिस नियमित गश्त करती है। जब विनीता बच्चों को पढ़ाती हैं, तो पुलिस आसपास मौजूद रहती है, ताकि कोई परेशानी न हो। इसके अलावा, पुलिस पाठशाला के आसपास से अतिक्रमण भी हटवाती है, जिससे बच्चों को पढ़ाई में कोई बाधा न आए। पुलिस इलाके के लोगों को भी बच्चों की पढ़ाई में सहयोग करने के लिए प्रेरित करती है।</p>
<p><strong>बच्चे खुद तैयार करते हैं क्लास</strong></p>
<p>इस पाठशाला की खास बात यह है कि बच्चे खुद अपनी क्लास की तैयारी करते हैं। विनीता जब भी पढ़ाने आती हैं, तो कार से हॉर्न देती हैं और बच्चे अलग-अलग जगहों से निकलकर आ जाते हैं। बच्चे विनीता की कार से चटाई, स्पीकर, बोर्ड और अन्य सामग्री निकालने में मदद करते हैं। वे रोज़ाना पहले प्रार्थना करते हैं और फिर पढ़ाई शुरू होती है।</p>
<p><strong>नैतिक शिक्षा के साथ बेसिक पढ़ाई</strong></p>
<p>विनीता बच्चों को बेसिक पढ़ाई के साथ-साथ नैतिक शिक्षा भी देती हैं। वे बच्चों को हिंदी-अंग्रेजी के अक्षर, पर्यायवाची और विलोम शब्द सिखाती हैं। उनकी कोशिश है कि बच्चे हर दिन कुछ नया सीखें और इसे अच्छी तरह समझें।</p>
<p><strong>काउंसलिंग भी जरूरी</strong></p>
<p>विनीता केवल पढ़ाई पर ही जोर नहीं देतीं, बल्कि बच्चों और उनके माता-पिता की काउंसलिंग भी करती हैं। खासकर वे बच्चे जो भीख मांगते हैं, बाल मजदूरी करते हैं या किसी प्रकार का नशा करते हैं, उनके लिए विशेष ध्यान रखा जाता है। विनीता बच्चों और उनके माता-पिता को प्रोत्साहित करती हैं कि वे नशे को छोड़कर शिक्षा की ओर ध्यान दें।</p>
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		<title>एमपी के छात्रों के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, टॉपर्स को मिलेगा लाभ</title>
		<link>https://mpsamachar.in/big-decision-of-supreme-court-for-mp-students-toppers-will-get-benefits/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Sep 2024 10:38:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[एमपी समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों के टॉपर्स के लिए एमबीबीएस में 5% सीटें आरक्षित रखने के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। इस फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व निर्णय को पलटते हुए मेडिकल एजुकेशन विभाग को निर्देश दिया कि इन छात्रों के लिए सीटें आरक्षित की जाएं और [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों के टॉपर्स के लिए एमबीबीएस में 5% सीटें आरक्षित रखने के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। इस फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व निर्णय को पलटते हुए मेडिकल एजुकेशन विभाग को निर्देश दिया कि इन छात्रों के लिए सीटें आरक्षित की जाएं और उन्हें प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिलाया जाए।</p>
<p>यह मामला तब सामने आया जब आठ छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इन छात्रों का आरोप था कि राज्य सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों के टॉपर्स के लिए एमबीबीएस में 5% सीटें आरक्षित करने की योजना के बावजूद, उन्हें इसका उचित लाभ नहीं मिल रहा था। इनमें से एक ओबीसी छात्रा का उदाहरण उल्लेखनीय है, जिसने नीट परीक्षा में अच्छे अंक हासिल किए थे। इसके बावजूद, उसका आवेदन इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि उसने ओबीसी श्रेणी के लिए प्रयास नहीं किए, जबकि उसके अंक सामान्य श्रेणी में प्रवेश के लिए पर्याप्त थे।</p>
<p>छात्रों के अधिवक्ता, अविरल विकास खरे, ने सुप्रीम कोर्ट में यह दलील दी कि राज्य सरकार की आरक्षण योजना के तहत छात्रों की मेरिट का उचित मूल्यांकन नहीं किया गया। उन्होंने तर्क दिया कि सरकारी स्कूलों के टॉपर्स के लिए आरक्षित सीटों का लाभ देने के लिए छात्रों की मेरिट को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकारते हुए छात्रों के पक्ष में निर्णय सुनाया।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि 2024-25 के शैक्षणिक सत्र के लिए इन छात्रों के लिए एमबीबीएस में 5% सीटें आरक्षित की जाएं और उन्हें उनकी मेरिट के अनुसार प्रतिष्ठित कॉलेजों में दाखिला दिया जाए। इस आदेश से उन छात्रों को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें पहले आरक्षण योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा था।</p>
<p><strong>शिवराज सिंह चौहान लाए थे योजना</strong></p>
<p>मध्यप्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों के टॉपर्स के लिए एमबीबीएस में 5% सीटें आरक्षित करने की योजना लागू की है। इस योजना का उद्देश्य उन छात्रों को प्रोत्साहित करना और अवसर प्रदान करना है जो सरकारी स्कूलों में पढ़ते हुए उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं। चूंकि सरकारी स्कूलों के छात्रों को संसाधनों और सुविधाओं की सीमाओं के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, यह योजना उन छात्रों को विशेष सहायता देने के लिए बनाई गई है।</p>
<h3>योजना के प्रमुख बिंदु:</h3>
<ol>
<li><strong>आरक्षण का प्रतिशत:</strong><br />
सरकारी स्कूलों के टॉपर्स के लिए एमबीबीएस पाठ्यक्रम में 5% सीटें आरक्षित की गई हैं। इसका मतलब है कि राज्य के मेडिकल कॉलेजों में हर साल 5% सीटें इन छात्रों के लिए अलग रखी जाएंगी।</li>
<li><strong>पात्रता:</strong><br />
इस योजना का लाभ केवल उन छात्रों को मिलेगा जिन्होंने मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों से 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है और नीट (NEET) में योग्य स्कोर प्राप्त किया है।</li>
<li><strong>मेरिट के आधार पर प्रवेश:</strong><br />
योजना के तहत आरक्षित सीटों के लिए चयन मेरिट के आधार पर किया जाएगा। यानी छात्रों के नीट स्कोर और अन्य शैक्षणिक योग्यताओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें प्रवेश दिया जाएगा।</li>
<li><strong>आरक्षण का लाभ:</strong><br />
यह योजना उन छात्रों के लिए एक बड़ा अवसर है जो आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े हैं और जिन्हें सामान्य श्रेणी में प्रतिस्पर्धा करना कठिन होता है। यह आरक्षण उन्हें मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने का सुनहरा अवसर प्रदान करता है।</li>
</ol>
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		<title>एमपी में 2 और नए जिले बनेंगे, कैबिनेट में लग सकती है मुहर</title>
		<link>https://mpsamachar.in/2-more-new-districts-can-be-formed-in-mp-approval-can-be-given-in-cabinet/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 30 Aug 2024 10:30:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[इतिहास]]></category>
		<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[एमपी समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मध्यप्रदेश में जल्द ही दो नए जिले बनने की संभावना है, जिससे प्रदेश में जिलों की कुल संख्या 55 से बढ़कर 57 हो सकती है। सरकार बीना और जुन्नारदेव को नए जिले बनाने की तैयारी कर रही है। यह फैसला आगामी कैबिनेट बैठक में लिया जा सकता है। वर्तमान में मध्यप्रदेश में कुल 55 जिले [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मध्यप्रदेश में जल्द ही दो नए जिले बनने की संभावना है, जिससे प्रदेश में जिलों की कुल संख्या 55 से बढ़कर 57 हो सकती है। सरकार बीना और जुन्नारदेव को नए जिले बनाने की तैयारी कर रही है। यह फैसला आगामी कैबिनेट बैठक में लिया जा सकता है। वर्तमान में मध्यप्रदेश में कुल 55 जिले हैं, और यह संख्या जल्द ही बढ़कर 57 हो सकती है, क्योंकि बीना और जुन्नारदेव को नए जिलों के रूप में स्थापित करने की योजना है।</p>
<p>बीना और जुन्नारदेव को जिला बनाने की मांग लंबे समय से चल रही थी, और अब सरकार इस दिशा में कदम उठाने जा रही है। राजस्व विभाग ने सीमांकन के प्रस्ताव को पहले ही तैयार कर लिया है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार के कार्यकाल में ये दो नए जिले बन जाएंगे। इससे पहले, 2023 में भी विधानसभा चुनाव से पहले तीन नए जिले बनाए गए थे।</p>
<p>नए जिलों के बनने से संबंधित क्षेत्रों के लोगों को प्रशासनिक कामकाज में सहूलियत होगी, और उन्हें जिलों से संबंधित सेवाओं के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।</p>
<h3>संभावित नए जिले:</h3>
<ul>
<li><strong>बीना</strong> &#8211; यह क्षेत्र वर्तमान में सागर जिले का हिस्सा है और एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। बीना को नया जिला बनाने की योजना है।</li>
<li><strong>जुन्नारदेव</strong> &#8211; यह छिंदवाड़ा जिले का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, और इसे भी नया जिला बनाने की तैयारी की जा रही है।</li>
</ul>
<p>मध्यप्रदेश के जिले प्रशासनिक, सांस्कृतिक, और आर्थिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। राज्य की विविधता और विकास में इन जिलों की महत्वपूर्ण भूमिका है। नए जिलों के गठन से प्रशासनिक सेवाओं में सुधार होगा और विकास के नए अवसर उत्पन्न होंगे।</p>
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		<title>जन्माष्टमी पर स्कूल खुलेंगे: भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा और मित्रता पर आधारित कार्यक्रम आयोजित करने का आदेश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[MPSAMACHAR]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 25 Aug 2024 05:44:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने पहली बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन स्कूल खोलने का निर्णय लिया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने आदेश जारी किया है कि 26 अगस्त को सभी स्कूलों में भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा और मित्रता पर आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह कदम इस बार के जन्माष्टमी पर स्कूलों में छुट्टी [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><strong>भोपाल।</strong> मध्य प्रदेश सरकार ने पहली बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन स्कूल खोलने का निर्णय लिया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने आदेश जारी किया है कि 26 अगस्त को सभी स्कूलों में भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा और मित्रता पर आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह कदम इस बार के जन्माष्टमी पर स्कूलों में छुट्टी की परंपरा को तोड़ते हुए लागू किया गया है।</p>
<p><strong>उज्जैन में विशेष आयोजन-</strong></p>
<p>उज्जैन में भी सोमवार को स्कूल खुलेंगे। सोमवार को स्कूल कुछ समय के लिए खुलेंगे और उसके बाद धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन किए जाएंगे। इसके बाद स्कूलों को छुट्टी दी जाएगी। उज्जैन में सांदीपनि आश्रम, नारायण धाम, अमझेरा धाम और जानापाव जैसे धार्मिक स्थल श्रीकृष्ण से जुड़े महत्वपूर्ण स्थानों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।</p>
<p><strong>धार्मिक स्थलों पर विशेष ध्यान-</strong></p>
<p>सांदीपनि आश्रम, उज्जैन: यहां भगवान श्रीकृष्ण ने गुरु सांदीपनि से शिक्षा ग्रहण की थी। आश्रम में 6000 साल पुराना शिवलिंग और गोमती कुंड है।</p>
<p>नारायण धाम, महिदपुर: यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण और उनके मित्र सुदामा की अटूट मित्रता का प्रतीक है।</p>
<p>अमझेरा धाम, धार: मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने यहीं से माता रुक्मिणी का हरण किया था। यह मंदिर 7000 साल पुराना है।</p>
<p>जानापाव, इंदौर: यहां भगवान परशुराम ने श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र दिया था।</p>
<p>शासकीय शिक्षक संघ के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने बताया कि आमतौर पर जन्माष्टमी के दिन छुट्टी होती है, लेकिन इस बार दो अलग-अलग आदेश जारी किए गए हैं। एक ओर जहां शासन ने सरकारी अवकाश घोषित किया है, वहीं स्कूल शिक्षा विभाग ने स्कूल खोलकर विशेष कार्यक्रम आयोजित करने का आदेश दिया है। इससे शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है।</p>
<p>शासकीय आदेशों के अनुसार यह पहल शिक्षा और संस्कृति के संगम को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, शिक्षकों और स्कूल प्रशासन को इस बदलाव से संबंधित तैयारियों और समन्वय की आवश्यकता होगी। उम्मीद है कि इस निर्णय से छात्रों को भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा और सांस्कृतिक धरोहर को समझने का एक नया अवसर मिलेगा।</p>
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		<item>
		<title>देशभर में बोर्ड परीक्षा में 65 लाख से अधिक छात्र फेल, सबसे खराब UP-MP का रिजल्ट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[MPSAMACHAR]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 23 Aug 2024 03:48:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नई दिल्ली। शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी की गई ताजातरीन रिपोर्टों के अनुसार, पिछले साल देशभर में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में 65 लाख से अधिक छात्र असफल रहे। इनमें से मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार का प्रदर्शन सबसे खराब रहा, जो राज्य सरकारों की शिक्षा नीतियों की गंभीर विफलता को उजागर करता है। [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h3></h3>
<p><strong>नई दिल्ली। </strong>शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी की गई ताजातरीन रिपोर्टों के अनुसार, पिछले साल देशभर में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में 65 लाख से अधिक छात्र असफल रहे। इनमें से मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार का प्रदर्शन सबसे खराब रहा, जो राज्य सरकारों की शिक्षा नीतियों की गंभीर विफलता को उजागर करता है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 की बोर्ड परीक्षाओं में कक्षा 10वीं के लगभग 33.5 लाख छात्र अगली कक्षा में नहीं पहुँच पाए, जबकि 5.5 लाख छात्र परीक्षा में उपस्थित नहीं हुए। इसी तरह, कक्षा 12वीं में लगभग 32.4 लाख छात्र असफल रहे और 5.2 लाख ने परीक्षा ही नहीं दी। सबसे चिंताजनक बात यह है कि 10वीं कक्षा में गुजरात बोर्ड और 12वीं कक्षा में मध्य प्रदेश बोर्ड में असफल छात्रों की दर सबसे अधिक रही।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>राज्यों की तुलना में सीबीएसई का बेहतर प्रदर्शन-</strong></p>
<p>देशभर के 56 राज्य बोर्डों और तीन राष्ट्रीय बोर्डों के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि केंद्रीय बोर्ड (सीबीएसई) का प्रदर्शन राज्य बोर्डों की तुलना में कहीं बेहतर रहा। कक्षा 10वीं में सीबीएसई बोर्ड की विफलता दर 6 प्रतिशत थी, जबकि राज्य बोर्डों में यह दर 16 प्रतिशत से अधिक थी। कक्षा 12वीं में सीबीएसई की विफलता दर 13 प्रतिशत थी, जबकि राज्य बोर्डों में यह 18 प्रतिशत रही।</p>
<p><strong>गुजरात और मध्य प्रदेश का निराशाजनक प्रदर्शन-</strong></p>
<p>विशेष रूप से गुजरात और मध्य प्रदेश के बोर्डों में विफलता की दर अत्यंत चिंताजनक रही। गुजरात में 10वीं कक्षा में 40 प्रतिशत से अधिक छात्र असफल रहे, जबकि मध्य प्रदेश में 12वीं कक्षा में 40 प्रतिशत से अधिक छात्रों ने परीक्षा में सफलता नहीं प्राप्त की। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि इन राज्यों में शिक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में सरकार को और अधिक गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है।</p>
<p><strong>केरल में सबसे अच्छा प्रदर्शन-</strong></p>
<p>इसके विपरीत, केरल में 10वीं कक्षा के 99 प्रतिशत छात्र पास हुए, और 12वीं कक्षा में पास होने का प्रतिशत 82 प्रतिशत रहा। यह प्रदर्शन अन्य राज्यों के मुकाबले काफी अच्छा है, जो शिक्षा व्यवस्था में बेहतर नीतियों और कार्यान्वयन को दर्शाता है।</p>
<p><strong>लड़कियों का प्रदर्शन बेहतर-</strong></p>
<p>रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि सरकारी स्कूलों में लड़कियों की पासिंग दर लड़कों की तुलना में बेहतर रही। इसके बावजूद, देशभर में छात्रों के समग्र प्रदर्शन में पिछले वर्ष की तुलना में गिरावट आई है। इस स्थिति ने शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता और सुधार की दिशा में गंभीर प्रश्न उठाए हैं। सरकार को चाहिए कि वह इन आंकड़ों की गंभीरता से समीक्षा करे और तत्काल प्रभाव से ठोस और प्रभावी सुधारात्मक उपाय लागू करे, ताकि अगले वर्षों में छात्रों के प्रदर्शन में सुधार हो सके और विफलता की दर कम की जा सके।</p>
<p style="text-align: center;"><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-52194" src="https://mpsamachar.in/wp-content/uploads/2024/08/new-1-300x145.webp" alt="" width="300" height="145" srcset="https://mpsamachar.in/wp-content/uploads/2024/08/new-1-300x145.webp 300w, https://mpsamachar.in/wp-content/uploads/2024/08/new-1-1024x494.webp 1024w, https://mpsamachar.in/wp-content/uploads/2024/08/new-1-768x371.webp 768w, https://mpsamachar.in/wp-content/uploads/2024/08/new-1-696x336.webp 696w, https://mpsamachar.in/wp-content/uploads/2024/08/new-1-1068x516.webp 1068w, https://mpsamachar.in/wp-content/uploads/2024/08/new-1.webp 1280w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>पिछले 15 सालों से गुजरात और मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकारें सत्ता में हैं। इन वर्षों में, शिक्षा के क्षेत्र में कई योजनाएं और पहलें लागू की गई हैं, शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, इन दोनों राज्यों में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के स्तर पर लगातार गिरावट देखी जा रही है। बच्चे बेसिक स्तर की परीक्षाओं में भी पास होने में असफल हो रहे हैं, जो शिक्षा व्यवस्था की गंभीर स्थिति को दर्शाता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>सरकार की योजनाएं और उनके प्रचार-प्रसार के बावजूद, वास्तविकता कुछ और ही है। गुजरात और मध्यप्रदेश में शिक्षा के ढांचे में सुधार की बजाय, समस्याओं का ढेर ही बढ़ता जा रहा है। यहाँ तक कि बच्चों की गुणवत्ता परक शिक्षा भी नकारात्मक रूप से प्रभावित हुई है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या सरकार के शिक्षा के क्षेत्र में किए गए प्रयास वास्तव में प्रभावी रहे हैं या केवल प्रचार का हिस्सा हैं? शिक्षा में सुधार की दिशा में सही ठोस कदम उठाए गए हैं या नहीं, यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<item>
		<title>अब इंदौर में बना रोबोट करेगा बॉर्डर पर पेट्रोलिंग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 16 Aug 2024 05:35:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[एमपी समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रमुख खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[होम]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>इंदौर: इंदौर के युवा अब डिफेंस सेक्टर में भी स्टार्टअप्स की शुरुआत कर रहे हैं। बॉर्डर पर पेट्रोलिंग के लिए रोबोट डिजाइन करने और लेजर फेंस बनाने जैसी तकनीकों पर काम किया जा रहा है। अनुमान के अनुसार, एक रोबोट बनाने में लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत आएगी, और यह रोबोट अगले दो साल [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इंदौर:</strong> इंदौर के युवा अब डिफेंस सेक्टर में भी स्टार्टअप्स की शुरुआत कर रहे हैं। बॉर्डर पर पेट्रोलिंग के लिए रोबोट डिजाइन करने और लेजर फेंस बनाने जैसी तकनीकों पर काम किया जा रहा है। अनुमान के अनुसार, एक रोबोट बनाने में लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत आएगी, और यह रोबोट अगले दो साल में हथियारों से लैस होकर तैयार हो जाएगा।</p>
<p>इंदौर के वेदांत अग्रवाल ने 1 अप्रैल 2023 को अपने दोस्तों के साथ मिलकर आईटी पार्क सिंहासा में अविन्य मिलटेक कंपनी की शुरुआत की। वेदांत की कंपनी लेजर फेंस का निर्माण कर रही है, जो लेजर बीम की एक अदृश्य दीवार होती है। जैसे ही कोई इस दीवार से गुजरता है, अलार्म बजने लगता है। यह तकनीक नक्सल और आतंकी गतिविधियों की रोकथाम में बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।</p>
<p>इसके अलावा, कंपनी का सबसे महत्वपूर्ण प्रोडक्ट बॉर्डर पेट्रोलिंग के लिए बनाया जा रहा रोबोट है। इसकी डिजाइन को अंतिम रूप दे दिया गया है, और इसे उन क्षेत्रों में सैनिकों की जगह भेजा जा सकेगा जहां खतरा अधिक होता है। यह रोबोट हथियारों से लैस होगा और इसे रिमोट से ऑपरेट किया जा सकेगा। एक रोबोट को बनाने में लगभग 25 करोड़ रुपये का खर्च आएगा, और अगले दो साल में यह तैयार हो जाएगा।</p>
<p>वेदांत अग्रवाल को स्टार्टअप का आइडिया उनकी इंटर्नशिप के दौरान आया। उन्होंने 2021 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और इंदौर की लाइट गाइड ऑप्टिक्स प्रा.लि में इंटर्नशिप की। बाद में उन्हें वहीं नौकरी का ऑफर मिला। लाइट गाइड कंपनी कई वर्षों से डिफेंस सेक्टर में काम कर रही है, और वहीं से वेदांत को डिफेंस सेक्टर में स्टार्टअप शुरू करने का विचार आया।</p>
<p>इंदौर की लाइट गाइड ऑप्टिक्स प्रा.लि कंपनी, जो 1997 में सिद्धार्थ धवले द्वारा स्थापित की गई थी, डिफेंस सेक्टर के लिए ऑप्टिक्स और टेलीस्कोप जैसे उत्पाद बना रही है। कंपनी ने आरआरकेट और बीएआरसी जैसे संस्थानों के लिए भी ऑप्टिक्स सप्लाई किए हैं।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>अब स्कूलों में पढ़ाई जाएगीं गुमनाम क्रांतिकारियों की गाथाएं</title>
		<link>https://mpsamachar.in/now-stories-of-unknown-revolutionaries-will-be-taught-in-schools/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 13 Aug 2024 08:52:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[इतिहास]]></category>
		<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[एमपी समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भोपाल: मध्यप्रदेश का स्वराज संस्थान देश के स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम नायकों की गौरवगाथाओं को संजोने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। संस्थान ने प्रदेश के 1,000 से अधिक ऐसे स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष को दस्तावेजों के रूप में संकलित किया है, जो अब तक अज्ञात थे। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने सभी [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भोपाल:</strong> मध्यप्रदेश का स्वराज संस्थान देश के स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम नायकों की गौरवगाथाओं को संजोने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। संस्थान ने प्रदेश के 1,000 से अधिक ऐसे स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष को दस्तावेजों के रूप में संकलित किया है, जो अब तक अज्ञात थे। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने सभी जिलों के स्वतंत्रता सेनानियों पर शोध कर इस सामग्री को 41 खंडों में प्रकाशित किया है। इन किताबों को स्कूलों की पाठ्य पुस्तकों में शामिल करने का प्रस्ताव भी भेजा जाएगा। साथ ही, इन किताबों को ई-कॉमर्स प्लेटफार्म पर भी उपलब्ध कराया जाएगा।</p>
<p>इसके लिए लोककथाओं, समकालीन समाचार पत्रों, जेल के रिकॉर्ड, प्रशासनिक रिपोर्ट, ब्रिटिश दस्तावेज़ और अन्य स्रोतों का अध्ययन किया गया। संस्थान ने यह जानकारी जुटाने के लिए 2008 में फेलोशिप प्रोग्राम की शुरुआत की थी। अब तक &#8220;मप्र में स्वाधीनता संग्राम&#8221; शीर्षक से 15 किताबें प्रकाशित की जा चुकी हैं। इनमें सतना, सागर, रीवा, रतलाम, नीमच, मंदसौर, मंडला, खरगोन, उज्जैन, भोपाल, दतिया, छिंदवाड़ा, खंडवा, बुरहानपुर, डिंडोरी, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर जिलों के स्वतंत्रता सेनानियों की कहानियां शामिल हैं। इन किताबों का विमोचन 15 अगस्त को किया जाएगा।</p>
<p><strong>स्वतंत्रता संग्राम में नायकों की आहुति</strong></p>
<p><strong>1824 में नरसिंहगढ़ की क्रांति:</strong> भोपाल रियासत के नबाब नजर मोहम्मद ने 26 फरवरी 1818 को अंग्रेजों से संधि कर सीहोर को अपने बेस कैंप के रूप में इस्तेमाल किया। 24 जुलाई 1824 को नरसिंहगढ़ के राजकुमार चेन सिंह ने सीहोर कैंप पर हमला किया, जिसमें अंग्रेजों का पॉलिटिकल एजेंट जेम्स मेंडॉक मारा गया, हालांकि चेन सिंह और उनके 42 साथी शहीद हो गए।</p>
<p><strong>तात्या टोपे की सेना को रसद आपूर्ति:</strong> छक्कूलाल और अन्य स्थानीय लोगों ने तात्या टोपे की सेना को रसद और आवश्यक सुविधाएं प्रदान की। सीहोर में सिपाही बहादुर सरकार की स्थापना की गई, जो 8 अगस्त 1857 से जनवरी 1858 तक कायम रही। अंग्रेज अफसर ह्यूरोज ने 14 जनवरी 1858 को 356 क्रांतिकारियों को फांसी पर चढ़ाया।</p>
<p><strong>विदिशा के छक्कूलाल सक्सेना की भूमिका:</strong> 1858 में, विदिशा के मरखेड़ा गांव के कानूनगो छक्कूलाल सक्सेना ने दिल्ली की ओर कूच कर रहे तात्या टोपे की 7,000 घुड़सवारों और 4,000 पैदल सैनिकों को न केवल रसद मुहैया कराई, बल्कि सेना के रुकने के इंतजाम किए।</p>
<p>अभी तक स्वतंत्रता संग्राम को ब्रिटिश सरकार के खिलाफ विद्रोह जैसे शब्दों से वर्णित किया जाता था। स्वराज संस्थान ने 1857 के संग्राम को &#8216;क्रांति&#8217; और &#8216;संघर्ष&#8217; शब्दों से प्रस्तुत किया है, ताकि इसे स्वतंत्रता की लड़ाई के रूप में दर्शाया जा सके।</p>
<p>मप्र स्वराज संस्थान के डिप्टी डायरेक्टर संतोष कुमार वर्मा का कहना है कि, इन किताबों में प्रत्येक जिले के उन सेनानियों को शामिल किया गया है जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। 41 खंडों में एक हजार से अधिक गुमनाम सेनानियों की कहानियां संकलित की गई हैं। इसके लिए गहन शोध और अध्ययन किया गया है।</p>
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		<title>एमपी में ई-ऑफिस का कॉन्सेप्ट होगा लागू, जानिए क्या-क्या बदलेगा?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 06 Aug 2024 13:24:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[एमपी समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[होम]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भोपाल: फाइलों के तेज निपटारे को लेकर शुरू हुए ई-ऑफिस के कॉन्सेप्ट को एक कदम आगे ले जाते हुए सरकार वर्चुअल रिकॉर्ड रूम की ओर बढ़ रही है। वर्चुअल रिकॉर्ड रूम में दस्तावेज जमा होने के बाद अब किसी भी फाइलों को संभालने की जरूरत समाप्त हो जाएगी। इस व्यवस्था से अब सिर्फ फाइल नंबर [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भोपाल:</strong> फाइलों के तेज निपटारे को लेकर शुरू हुए ई-ऑफिस के कॉन्सेप्ट को एक कदम आगे ले जाते हुए सरकार वर्चुअल रिकॉर्ड रूम की ओर बढ़ रही है। वर्चुअल रिकॉर्ड रूम में दस्तावेज जमा होने के बाद अब किसी भी फाइलों को संभालने की जरूरत समाप्त हो जाएगी। इस व्यवस्था से अब सिर्फ फाइल नंबर दर्ज करने से ही सारी जानकारी सामने आ जाएगी।</p>
<p>मंत्रालय की फाइलों, दस्तावेजों को संभालने (स्टोर) रखने के लिए अब वर्चुअल रूम का निर्माण किया जाएगा और इसके लिए फंड की स्वीकृति भी प्रदान की जा चुकी है। वर्चुअल रिकॉर्ड रूम को इस साल नवंबर के अंत तक तैयार किया जाएगा और इसके बाद सभी विभागों की फाइलों को इस वर्चुअल रूम में स्टोर किया जाएगा। इसी के साथ विभागीय अधिकारियों और मंत्रालय के सचिवालय को अपने कार्यालय में बैठकर ही किसी भी फाइल का एक्सेस आसानी से मिल जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे ई-ऑफिस की तरह कार्य में तेजी आएगी।</p>
<p>वर्तमान में मंत्रालय में करीब 31 लाख से अधिक फाइलों को सहेजा जा चुका है और अब इन फाइलों को डिजिटल स्वरूप में भी संरक्षित किया जा रहा है। मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि वर्चुअल रिकॉर्ड रूम तैयार होने के बाद दस्तावेजों को लेकर चिंता समाप्त हो जाएगी और समय-समय पर जिन फाइलों की जरूरत नहीं है, उन्हें डिस्पोज भी किया जा सकेगा।</p>
<p>वर्चुअल रूम तैयार होने के बाद कार्यालयों में रखी फाइलों के लिए जगह की कमी और दस्तावेजों के खराब होने का डर भी समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही कार्यालय में स्थान की बचत भी होगी और दस्तावेजों को डिजिटल स्वरूप में संरक्षित किया जा सकेगा।</p>
<p>यह नया कदम डिजिटाइजेशन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल है, जो मंत्रालय के कार्यों को तेजी और दक्षता के साथ पूरा करने में सहायक साबित होगा। इस व्यवस्था से सरकारी फाइलों का प्रबंधन और आसान हो जाएगा।</p>
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