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	<title>धार्मिक Archives - MP Samachar - MP Samachar, मध्य प्रदेश समाचार, Latest MP Hindi News, मध्यप्रदेश न्यूज़</title>
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	<description>“MP Samachar - जहाँ सच सामने आता है”</description>
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	<item>
		<title>MP Board 10वीं व 12वीं लेकर ये बड़ा अपडेट, इन में हुआ बदलाव</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Desk Input]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Dec 2024 06:03:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[इतिहास]]></category>
		<category><![CDATA[एमपी समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[खेल]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
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		<category><![CDATA[MP Board:]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भोपाल। मध्य प्रदेश बोर्ड की कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं फरवरी के अंतिम सप्ताह से शुरू होने जा रही हैं। अब केवल तीन महीने का समय शेष है। इस बार स्कूल शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों के 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के परिणामों में सुधार के लिए नई पहल शुरू की है। बेस्ट [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>भोपाल। मध्य प्रदेश बोर्ड की कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं फरवरी के अंतिम सप्ताह से शुरू होने जा रही हैं। अब केवल तीन महीने का समय शेष है। इस बार स्कूल शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों के 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के परिणामों में सुधार के लिए नई पहल शुरू की है।</p>
<p><strong>बेस्ट ऑफ फाइव योजना समाप्त</strong> इस बार 10वीं में &#8220;बेस्ट ऑफ फाइव&#8221; योजना को समाप्त कर दिया गया है, जिससे परिणाम बेहतर बनाने के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं। राज्य स्तर पर विषयवार मास्टर ट्रेनर चयनित किए गए हैं, जो सीएम राइज स्कूलों के शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षण देकर विद्यार्थियों को बेहतर तरीके से तैयार करने में मदद करेंगे।</p>
<p><strong>वार्डन शिक्षक और मॉनिटरिंग सिस्टम</strong> सभी स्कूलों में वार्डन शिक्षकों की नियुक्ति की जा रही है। ये शिक्षक प्रत्येक पांच विद्यार्थियों की जिम्मेदारी लेकर उनकी पढ़ाई, खानपान और दैनिक गतिविधियों पर नजर रखेंगे। हर सप्ताह रिपोर्ट तैयार की जाएगी और विद्यार्थियों के लिए नियमित टेस्ट आयोजित किए जाएंगे।</p>
<p><strong>मास्टर ट्रेनर की विशेष भूमिका</strong> इस बार &#8220;प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग&#8221; पद्धति अपनाई गई है, जिसमें विद्यार्थियों की समस्याओं को प्रोजेक्ट के जरिए हल करने का प्रयास किया जाएगा। प्रदेश के 274 सीएम राइज स्कूलों से 32 शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में चुना गया है। इन्हें पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण देकर संभाग के अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी दी गई है।</p>
<p><strong>छमाही परीक्षा और विशेष कक्षाएं</strong> सोमवार से शुरू होने वाली छमाही परीक्षा के दौरान भी पढ़ाई जारी रहेगी। अगले दिन की तैयारी के लिए अतिरिक्त कक्षाएं आयोजित की जाएंगी। शीतकालीन अवकाश में तीन वर्षों के बोर्ड परीक्षा प्रश्नपत्रों का अभ्यास कराया जाएगा, और कमजोर बिंदुओं पर काम करने के लिए विषय-विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा निरीक्षण किया जाएगा।</p>
<p><strong>अच्छे प्रदर्शन के लिए प्रेरणा</strong> विद्यार्थियों को प्रेरित करने के लिए उन्हें पिछले वर्षों की टॉपर्स की उत्तरपुस्तिकाएं दिखाई जाएंगी। इससे वे अच्छे अंक लाने के तरीके सीख सकें।</p>
<p><strong>विशेष पहलें</strong></p>
<ul>
<li>तिमाही परीक्षा के आधार पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आयोजित की जाएगी।</li>
<li>30% से कम परिणाम वाले स्कूलों के शिक्षकों से चर्चा की जाएगी।</li>
<li>कमजोर प्रदर्शन वाले विषयों (गणित, विज्ञान, अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान) के शिक्षकों से बात की जाएगी।</li>
<li>परीक्षा तनाव कम करने के लिए हेल्पलाइन (18002330175) पर कॉल करने की सुविधा दी गई है।</li>
<li>प्रेरणादायक वीडियो दिखाए जाएंगे और परीक्षा के बाद अच्छे प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा।</li>
</ul>
<p><strong>खराब प्रदर्शन वाले विद्यार्थियों के लिए उपाय</strong> तिमाही परीक्षा में खराब प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के लिए अलग से विशेष कक्षाएं लगाई जाएंगी।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>सिंहस्थ 2028: 5882 करोड़ की मंजूरी, इन कार्यों से बदलेगी उज्जैन की तस्वीर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[MPSAMACHAR]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 16 Oct 2024 11:07:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; उज्जैन। मध्य प्रदेश सरकार सिंहस्थ 2028 महापर्व की तैयारी में जुट गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल समिति की पहली बैठक में 5882 करोड़ रुपये के विभिन्न बुनियादी ढांचा कार्यों को मंजूरी दी गई है। यह महापर्व ना केवल देश बल्कि विश्व स्तर पर चर्चा का विषय बनेगा और [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><strong>उज्जैन।</strong> मध्य प्रदेश सरकार सिंहस्थ 2028 महापर्व की तैयारी में जुट गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल समिति की पहली बैठक में 5882 करोड़ रुपये के विभिन्न बुनियादी ढांचा कार्यों को मंजूरी दी गई है। यह महापर्व ना केवल देश बल्कि विश्व स्तर पर चर्चा का विषय बनेगा और इस दिशा में किए गए कार्य उज्जैन की तस्वीर को बदलने में महत्वपूर्ण साबित होंगे। उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह के अनुसार इस विशाल राशि का उपयोग विभिन्न प्रमुख परियोजनाओं पर किया जाएगा, जिसमें जल संसाधन, नगरीय प्रशासन, ऊर्जा और सड़क निर्माण शामिल हैं।</p>
<p><strong>1. जल संसाधन परियोजनाएं&#8230;</strong><br />
&#8211; 29.21 किमी घाट निर्माण के लिए 778.91 करोड़ रुपये।<br />
&#8211; कान्ह नदी डायवर्सन के लिए 1024.95 करोड़ रुपये।<br />
&#8211; शिप्रा नदी में जल निरंतर प्रवाह योजना के लिए 614.53 करोड़ रुपये।<br />
&#8211; कान्ह नदी पर 11 बैराजों के निर्माण के लिए 43.51 करोड़ रुपये।</p>
<p><strong>2. नगरीय प्रशासन और आवास&#8230;</strong><br />
&#8211; उज्जैन शहर की सीवरेज परियोजना के लिए 198 करोड़ रुपये।<br />
&#8211; ऊर्जा विभाग के तहत अति उच्च दबाव उपकेंद्र के लिए 250 करोड़ रुपये।</p>
<p><strong>3. सड़क निर्माण&#8230;</strong><br />
&#8211; शंकराचार्य चौराहा से दत्त अखाड़ा मार्ग के लिए 18 करोड़ रुपये।<br />
&#8211; इंदौर-उज्जैन चार लेन मार्ग का 6 लेन में विस्तार के लिए 1692 करोड़ रुपये।<br />
&#8211; इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड चार लाइन परियोजना के लिए 950 करोड़ रुपये।</p>
<p><strong>4. संस्कृति और पर्यटन&#8230;</strong><br />
&#8211; महाकाल लोक कॉरिडोर में पाषाण प्रतिमाओं का निर्माण और विकास कार्य के लिए 75 करोड़ रुपये।<br />
&#8211; कुंभ संग्रहालय का अनुरक्षण एवं विकास कार्य के लिए 25 करोड़ रुपये।</p>
<p>इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल बुनियादी ढांचे को सुधारना नहीं है, बल्कि उज्जैन की संस्कृति, परंपरा और धार्मिक महत्व को भी उभारना है। सिंहस्थ महापर्व एक ऐसा अवसर है जो लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है, और इन विकास कार्यों के माध्यम से सरकार सुनिश्चित करना चाहती है कि इस बार का महापर्व भव्य और सुगम हो सकें।</p>
<p>इन निवेशों के साथ उज्जैन का आर्थिक और सांस्कृतिक विकास निश्चित है। शहर की सड़कें, जल व्यवस्थाएं और नगरीय सुविधाएँ बेहतर होंगी, जिससे न केवल स्थानीय निवासियों को बल्कि पर्यटकों को भी लाभ होगा। सरकार के इस प्रयास से उज्जैन को एक नया रूप मिलेगा, जो उसे न केवल धार्मिक नगरी बल्कि एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करेगा। सिंहस्थ 2028 के सफल आयोजन के लिए की गई ये तैयारियाँ उज्जैन की पहचान को और भी मजबूत करेंगी।</p>
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		<item>
		<title>जयश्री गायत्री फूड के डेयरी प्रोडक्ट्स में मिली चर्बी, FSSAI की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[MPSAMACHAR]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 14 Oct 2024 04:55:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
		<category><![CDATA[भोपाल]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के जयश्री गायत्री फूड के डेयरी प्रोडक्ट्स में पशुओं की चर्बी के इस्तेमाल का खुलासा हुआ है। यह जानकारी FSSAI की हालिया रिपोर्ट में सामने आई है, जिसने प्रदेश में हड़कंप मचा दिया है। EOW की कार्रवाई गायत्री फूड प्रोडक्ट के ठिकानों पर हाल ही में EOW द्वारा [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><strong>भोपाल।</strong> मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के जयश्री गायत्री फूड के डेयरी प्रोडक्ट्स में पशुओं की चर्बी के इस्तेमाल का खुलासा हुआ है। यह जानकारी FSSAI की हालिया रिपोर्ट में सामने आई है, जिसने प्रदेश में हड़कंप मचा दिया है।</p>
<p><strong>EOW की कार्रवाई</strong></p>
<p>गायत्री फूड प्रोडक्ट के ठिकानों पर हाल ही में EOW द्वारा छापे मारे गए थे। कंपनी पर आरोप है कि उसने गलत तरीके से प्रोडक्ट के पास सर्टिफिकेट प्राप्त कर विदेशों में डेयरी प्रोडक्ट सप्लाई किए। इस मामले ने स्थानीय स्तर पर और भी विवाद उत्पन्न कर दिया है। इस खुलासे ने उपभोक्ताओं के बीच चिंता पैदा कर दी है, खासकर उन लोगों के लिए जो डेयरी प्रोडक्ट्स का नियमित उपयोग करते हैं। कई लोग सोशल मीडिया पर अपनी चिंताओं को साझा कर रहे हैं और सरकार से इस मामले में कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।</p>
<p>वहीं, विधानसभा के उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि गायत्री फूड प्रोडक्ट के पनीर, घी और चीज में एनिमल फैट का उपयोग किया गया है। कटारे ने कहा कि गायत्री फूड ने बालाजी मंदिर में भी घी की सप्लाई की थी, जिसका उपयोग प्रसादम तैयार करने में किया जाता था। कटारे ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि वह गायत्री फूड प्रोडक्ट द्वारा सप्लाई किए गए घी की सूची सार्वजनिक करें, ताकि उपभोक्ताओं को सचेत किया जा सके।</p>
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		<item>
		<title>रावण दहन से पहले होता है हिरण्यकश्यप का वध, 400 साल पुरानी परंपरा</title>
		<link>https://mpsamachar.in/hiranyakashyap-is-killed-before-ravana-dies-a-400-year-old-tradition/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 12 Oct 2024 06:52:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एमपी समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
		<category><![CDATA[प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[खरगोन]]></category>
		<category><![CDATA[दशहरा]]></category>
		<category><![CDATA[नवरात्रि]]></category>
		<category><![CDATA[भावसार समाज]]></category>
		<category><![CDATA[हिरण्यकश्यप वध]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>खरगोन: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में दशहरा का पर्व एक अनोखी और प्राचीन परंपरा के साथ मनाया जाता है, जो 406 साल से चली आ रही है। यहां के भावसार समाज द्वारा दशहरा तभी मनाया जाता है, जब भगवान नरसिंह द्वारा हिरण्यकश्यप का वध किया जाता है। यह विशेष आयोजन हर साल नवरात्रि की [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://mpsamachar.in/hiranyakashyap-is-killed-before-ravana-dies-a-400-year-old-tradition/">रावण दहन से पहले होता है हिरण्यकश्यप का वध, 400 साल पुरानी परंपरा</a> appeared first on <a href="https://mpsamachar.in">MP Samachar - MP Samachar, मध्य प्रदेश समाचार, Latest MP Hindi News, मध्यप्रदेश न्यूज़</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>खरगोन: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में दशहरा का पर्व एक अनोखी और प्राचीन परंपरा के साथ मनाया जाता है, जो 406 साल से चली आ रही है। यहां के भावसार समाज द्वारा दशहरा तभी मनाया जाता है, जब भगवान नरसिंह द्वारा हिरण्यकश्यप का वध किया जाता है। यह विशेष आयोजन हर साल नवरात्रि की अष्टमी और नवमी की रात को होता है और इस परंपरा को देखने के लिए सैकड़ों लोग जुटते हैं।</p>
<h3>406 साल पुरानी परंपरा की शुरुआत</h3>
<p>खरगोन के भावसार समाज ने इस अनूठी परंपरा की शुरुआत 406 साल पहले की थी। यहां नवरात्रि के दौरान मां अंबे और मां महाकाली की सवारी खप्पर (तांबे का पात्र) में निकलती है। अष्टमी और नवमी की मध्य रात्रि से लेकर सुबह तक चलने वाली इस सवारी में समाज के लोग देवी-देवताओं का रूप धारण करते हैं और गरबा खेलते हैं। इस आयोजन का मुख्य आकर्षण भगवान नरसिंह द्वारा हिरण्यकश्यप का वध होता है, जिसके बाद ही दशहरा मनाया जाता है।</p>
<h3>मां अंबे और महाकाली की सवारी</h3>
<p>अष्टमी की रात मां अंबे की सवारी शेर पर निकलती है, और नवमी की रात मां महाकाली की सवारी होती है। सवारी ब्रह्म मुहूर्त में भगवान नरसिंह की सवारी से संपन्न होती है। जब भगवान नरसिंह हिरण्यकश्यप का वध करते हैं, तभी दशहरा का पर्व मनाने की शुरुआत होती है। यह आयोजन नवमी की रात 2 बजे से लेकर सुबह 5 बजे तक चलता है।</p>
<h3>समाज के बुजुर्गों की धरोहर</h3>
<p>खप्पर समिति के अध्यक्ष मोहन भावसार के अनुसार, यह परंपरा उनके पूर्वजों द्वारा शुरू की गई थी, जिसे आज भी समाज के लोग पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ निभा रहे हैं। देशभर में रावण दहन करके दशहरा मनाया जाता है, लेकिन खरगोन में रावण दहन से पहले हिरण्यकश्यप का वध किया जाता है, जो इस परंपरा को खास और अनोखा बनाता है।</p>
<h3>इस साल का आयोजन</h3>
<p>इस साल यह आयोजन 10 और 11 अक्टूबर की रात को संपन्न हुआ। गुरुवार 10 अक्टूबर की रात झाड़ पूजन के बाद पहले भगवान गणेश की सवारी निकली, और फिर शेर पर सवार होकर मां अंबे प्रकट हुईं। शुक्रवार 11 अक्टूबर की रात मां महाकाली की सवारी निकली, और सुबह ब्रह्म मुहूर्त में भगवान नरसिंह ने हिरण्यकश्यप का वध किया। इसके बाद खरगोन के लोग दशहरा मनाने की शुरुआत करेंगे।</p>
<h3>दशहरे की खासियत</h3>
<p>खरगोन के इस प्राचीन आयोजन की खास बात यह है कि दशहरा तब तक नहीं मनाया जाता जब तक कि भगवान नरसिंह हिरण्यकश्यप का वध नहीं करते। यह परंपरा और उत्सव देश में शायद ही कहीं और देखने को मिले। भावसार समाज ने इसे अपनी पहचान और धरोहर के रूप में संभाल कर रखा है, और हर साल इस अनोखे पर्व को बड़े धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।</p>
<p>The post <a href="https://mpsamachar.in/hiranyakashyap-is-killed-before-ravana-dies-a-400-year-old-tradition/">रावण दहन से पहले होता है हिरण्यकश्यप का वध, 400 साल पुरानी परंपरा</a> appeared first on <a href="https://mpsamachar.in">MP Samachar - MP Samachar, मध्य प्रदेश समाचार, Latest MP Hindi News, मध्यप्रदेश न्यूज़</a>.</p>
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		<item>
		<title>वीर मलखान की भक्ति और रणकौशला देवी का अद्भुत मंदिर: एक हजार साल से अधिक पुराना है इतिहास</title>
		<link>https://mpsamachar.in/devotion-to-veer-malkhan-and-amazing-temple-of-rankaushala-devi-history-is-more-than-a-thousand-years-old/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Oct 2024 06:15:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एमपी समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
		<category><![CDATA[प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भिंड, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश के भिंड जिले के दबोह कस्बे से महज 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित अमाहा गांव में विराजी मां रणकौशला देवी का मंदिर एक हजार साल पुराना है। यह मंदिर वीर योद्धा मलखान सिंह की भक्ति और माता हिंगलाज देवी के आशीर्वाद से जुड़ी ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यताओं का प्रतीक [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://mpsamachar.in/devotion-to-veer-malkhan-and-amazing-temple-of-rankaushala-devi-history-is-more-than-a-thousand-years-old/">वीर मलखान की भक्ति और रणकौशला देवी का अद्भुत मंदिर: एक हजार साल से अधिक पुराना है इतिहास</a> appeared first on <a href="https://mpsamachar.in">MP Samachar - MP Samachar, मध्य प्रदेश समाचार, Latest MP Hindi News, मध्यप्रदेश न्यूज़</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भिंड, मध्य प्रदेश:</strong> मध्य प्रदेश के भिंड जिले के दबोह कस्बे से महज 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित अमाहा गांव में विराजी मां रणकौशला देवी का मंदिर एक हजार साल पुराना है। यह मंदिर वीर योद्धा मलखान सिंह की भक्ति और माता हिंगलाज देवी के आशीर्वाद से जुड़ी ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यताओं का प्रतीक है।</p>
<h4><strong>मंदिर का ऐतिहासिक महत्व</strong></h4>
<p>मंदिर का इतिहास 11वीं शताब्दी में बुंदेलखंड के वीर योद्धाओं आल्हा-उदल के चचेरे भाई मलखान से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि मलखान सिंह की माता तिलका देवी, मां हिंगलाज की उपासक थीं, और वह पाकिस्तान में स्थित हिंगलाज शक्ति पीठ के दर्शन करना चाहती थीं। जब मलखान सिंह अपनी माता के साथ वहां पहुंचे, तो मां हिंगलाज ने मलखान को दर्शन दिए और उनके साथ आने का वचन दिया। मां ने यह शर्त रखी कि वह जहां बैठेंगी, वहीं विराजमान हो जाएंगी।</p>
<h4><strong>मलखान सिंह और मां रणकौशला देवी</strong></h4>
<p>मलखान सिंह मां हिंगलाज को अपने साथ सिरसा गढ़ की रियासत में लेकर जा रहे थे। लेकिन रास्ते में गुरु गोरखनाथ के आग्रह पर मां अमाहा गांव के पास उतर गईं और यहीं विराजमान हो गईं। इस स्थान पर वीर मलखान सिंह ने मंदिर का निर्माण करवाया, और यहां मां का भव्य स्वरूप स्थापित किया। यहां के लोग मां को रणकौशला देवी या रेहकोला देवी के नाम से पूजते हैं।</p>
<h4><strong>रणकौशला देवी की महिमा और श्रद्धा</strong></h4>
<p>मां रणकौशला देवी को शत्रुओं पर विजय दिलाने वाली देवी के रूप में जाना जाता है। वीर मलखान सिंह जब भी किसी युद्ध के लिए जाते थे, मां का आशीर्वाद लेकर रणभूमि में उतरते थे। माना जाता है कि पृथ्वीराज चौहान से हुए युद्ध में मां रणकौशला के आशीर्वाद से मलखान सिंह ने चौहान को हराया और कैद भी किया था, हालांकि गुरु गोरखनाथ के आदेश पर उन्हें मुक्त कर दिया गया।</p>
<h4><strong>अदृश्य पूजा का रहस्य</strong></h4>
<p>मां रणकौशला देवी के मंदिर के अदृश्य पूजा का रहस्य आज भी कायम है। मान्यता है कि ब्रह्ममुहूर्त में सबसे पहले वीर मलखान सिंह के सूक्ष्म शरीर के रूप में दर्शन होते हैं, और मां रणकौशला देवी सबसे पहले उन्हें दर्शन देती हैं। मंदिर के पुजारी के अनुसार, जब भी मंदिर के पट खोले जाते हैं, दहलीज पर पूजा के फूल और जल पहले से चढ़े मिलते हैं।</p>
<h4><strong>भव्य निर्माण और श्रद्धालुओं की आस्था</strong></h4>
<p>मां रणकौशला देवी के भव्य स्वरूप को 1998 में श्रीनगर से आए कारीगरों द्वारा अष्टधातु और स्वर्ण से तैयार किया गया, जिससे मां की प्रतिमा हिंगलाज माता की छवि जैसी प्रतीकात्मक हो गई। इस मंदिर में श्रद्धालु विशेष रूप से संतान प्राप्ति के लिए पूजा करते हैं, और उनकी मनोकामनाएं पूरी होने पर पालना चढ़ाने की परंपरा निभाई जाती है।</p>
<p>मां रणकौशला देवी का मंदिर देश-विदेश से श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां की धार्मिक मान्यताओं और चमत्कारिक घटनाओं के चलते श्रद्धालु पूरे वर्ष माता के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आते हैं।</p>
<p>The post <a href="https://mpsamachar.in/devotion-to-veer-malkhan-and-amazing-temple-of-rankaushala-devi-history-is-more-than-a-thousand-years-old/">वीर मलखान की भक्ति और रणकौशला देवी का अद्भुत मंदिर: एक हजार साल से अधिक पुराना है इतिहास</a> appeared first on <a href="https://mpsamachar.in">MP Samachar - MP Samachar, मध्य प्रदेश समाचार, Latest MP Hindi News, मध्यप्रदेश न्यूज़</a>.</p>
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		<title>रिश्वत की मांग पर महिला ने किया अजब कांड, गाय लेकर पहुंची कार्यालय, कर्मचारी हुआ फरार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Oct 2024 06:03:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एमपी समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>टीकमगढ़: मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में रिश्वतखोरी का अजीबो-गरीब मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने जमीन पर हो रहे कब्जे को रोकने के लिए एसडीएम कार्यालय से स्टे की मांग की थी, लेकिन एक कर्मचारी ने 50,000 रुपये रिश्वत की डिमांड कर दी। आर्थिक तंगी से जूझ रही महिला के पास पैसे [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>टीकमगढ़:</strong> मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में रिश्वतखोरी का अजीबो-गरीब मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने जमीन पर हो रहे कब्जे को रोकने के लिए एसडीएम कार्यालय से स्टे की मांग की थी, लेकिन एक कर्मचारी ने 50,000 रुपये रिश्वत की डिमांड कर दी। आर्थिक तंगी से जूझ रही महिला के पास पैसे नहीं थे, तो उसने अजीबो-गरीब कदम उठाते हुए रिश्वत के बदले अपनी गाय ही कार्यालय में दे दी, जिससे दफ्तर में हड़कंप मच गया और रिश्वत मांगने वाला कर्मचारी भाग खड़ा हुआ।</p>
<h4><strong>क्या है पूरा मामला?</strong></h4>
<p>टीकमगढ़ के बल्देवगढ़ तहसील के कैलपुरा गांव की एक महिला ने बताया कि उसकी जमीन पर गांव के एक दबंग ने कब्जा कर लिया था। जब वह पुलिस में शिकायत करने गई, तो पुलिस ने कहा कि बिना स्टे ऑर्डर के वे कोई कार्रवाई नहीं कर सकते। मजबूर होकर महिला एसडीएम कार्यालय पहुंची, लेकिन वहां कोई उसकी सुनवाई नहीं कर रहा था। आठवें दिन उसे एक कर्मचारी मिला, जिसने स्टे देने के बदले 50,000 रुपये रिश्वत की मांग कर दी।</p>
<h4><strong>रिश्वत के बदले गाय लेकर पहुंची महिला</strong></h4>
<p>रिश्वत देने के लिए पैसे न होने पर महिला ने अगले दिन अपनी गाय को लेकर एसडीएम कार्यालय पहुंचने का निश्चय किया। उसने गाय को तहसीलदार की जीप से बांध दिया और दफ्तर में जाकर रिश्वत मांगने वाले कर्मचारी को ढूंढने लगी। महिला ने दफ्तर के लोगों से कहा, &#8220;अगर पैसे नहीं हैं, तो मेरी गाय रख लो, लेकिन मुझे स्टे ऑर्डर दे दो, वरना दबंग मेरी जमीन पर कब्जा कर लेंगे।&#8221;</p>
<h4><strong>आत्महत्या की धमकी से मचा हड़कंप</strong></h4>
<p>स्थिति तब और बिगड़ गई जब महिला ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि अगर उसे स्टे ऑर्डर नहीं मिला, तो वह आत्महत्या कर लेगी। दफ्तर में मौजूद अधिकारी और कर्मचारी घबरा गए। यह स्थिति देखते हुए रिश्वत मांगने वाला कर्मचारी मौका पाकर दफ्तर से भाग खड़ा हुआ।</p>
<h4><strong>अधिकारियों पर उठे सवाल</strong></h4>
<p>इस पूरे घटनाक्रम ने तहसील कार्यालय में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी की पोल खोल दी है। महिला द्वारा की गई इस कार्रवाई से न सिर्फ कर्मचारी भाग निकला, बल्कि पूरे कार्यालय में हड़कंप मच गया। फिलहाल, सवाल यह उठ रहा है कि क्या महिला को न्याय मिलेगा और रिश्वत मांगने वाले कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।</p>
<h4><strong>न्याय की उम्मीद</strong></h4>
<p>यह मामला अब अधिकारियों की नजर में है, और देखना होगा कि प्रशासन इस महिला की गुहार सुनता है या नहीं। भ्रष्टाचार के खिलाफ महिला की अनोखी लड़ाई ने एक बार फिर समाज में रिश्वतखोरी और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत को उजागर किया है।</p>
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		<title>हैरान कर देगी ऐसी भक्ति!, 35 साल से तालाब में पद्मासन लगाकर रामायण का कर रहे पाठ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Oct 2024 05:58:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एमपी समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
		<category><![CDATA[प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>धार: धर्म और भक्ति की अनूठी मिसाल पेश करने वाले अशोक दायमा की भक्ति चर्चा का विषय बनी हुई है। 60 वर्षीय अशोक दायमा पिछले 35 वर्षों से जीरापुर स्थित 64 योगिनी मानसरोवर माता मंदिर के तालाब के गहरे पानी में पद्मासन लगाकर रामचरितमानस के 120 दोहों का पाठ करते आ रहे हैं। यह अद्भुत [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>धार:</strong> धर्म और भक्ति की अनूठी मिसाल पेश करने वाले अशोक दायमा की भक्ति चर्चा का विषय बनी हुई है। 60 वर्षीय अशोक दायमा पिछले 35 वर्षों से जीरापुर स्थित 64 योगिनी मानसरोवर माता मंदिर के तालाब के गहरे पानी में पद्मासन लगाकर रामचरितमानस के 120 दोहों का पाठ करते आ रहे हैं। यह अद्भुत भक्ति अनुष्ठान नवरात्रि के अवसर पर विशेष रूप से ध्यान आकर्षित कर रहा है, और लोग उनके इस अद्वितीय साधना से प्रेरित हो रहे हैं।</p>
<h4><strong>अनोखी भक्ति की विरासत</strong></h4>
<p>अशोक दायमा पेशे से शिक्षक हैं, लेकिन उनकी भक्ति ने उन्हें धर्मनिष्ठ समाज में विशेष स्थान दिलाया है। तालाब के गहरे पानी में पद्मासन लगाकर रामचरितमानस का पाठ करना एक कठिन और असाधारण साधना है, जिसे उन्होंने अपने पिता से विरासत में प्राप्त किया। अशोक ने बताया कि जब वे 10 साल के थे, उनके पिता ने उन्हें तैरना और पद्मासन करना सिखाया था, जिसके बाद से वे लगातार इस अनुष्ठान को जारी रखे हुए हैं।</p>
<h4><strong>प्राकृतिक तत्वों के साथ साधना</strong></h4>
<p>उनकी साधना के दौरान वे एक हाथ में शंख और दूसरे हाथ में रामायण लेकर पानी के बीचों बीच पद्मासन की मुद्रा में बैठते हैं और शंखनाद करते हुए रामचरितमानस का पाठ करते हैं। तालाब के गहरे पानी में लहरों के बीच स्थिर रहकर इस तरह का अनुष्ठान करना उनकी भक्ति की गहराई और मानसिक संतुलन का प्रतीक है। नवरात्रि के दौरान उनकी यह साधना विशेष रूप से चर्चित होती है और सैकड़ों श्रद्धालु उन्हें देखने आते हैं।</p>
<h4><strong>भक्ति से प्रेरणा का संदेश</strong></h4>
<p>अशोक दायमा केवल अपनी भक्ति तक ही सीमित नहीं रहते, बल्कि वह इस अद्वितीय साधना को आगे बढ़ाने का भी प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने अपने परिवार और बच्चों को तैरने और इस साधना की शिक्षा दी है। उनका मानना है कि जैसे उन्हें यह विरासत में मिली, वैसे ही वे इसे आने वाली पीढ़ियों को सौंपेंगे। उनकी साधना से लोग न केवल धार्मिक आस्था से प्रेरित होते हैं, बल्कि यह भी सीखते हैं कि कैसे मन और शरीर का संयम किसी साधक को अद्वितीय बना सकता है।</p>
<h4><strong>श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र</strong></h4>
<p>उनकी यह साधना लोगों को मंत्रमुग्ध करती है, और रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु उन्हें तालाब में इस अनुष्ठान को करते हुए देखने आते हैं। उनकी भक्ति और समर्पण ने उन्हें धार जिले के धार्मिक समाज में एक प्रतिष्ठित स्थान दिलाया है। उनके अनुकरणीय साधना और भक्ति का संदेश लोगों को आस्था और विश्वास की शक्ति में विश्वास करने की प्रेरणा देता है।</p>
<p>अशोक दायमा की यह अनोखी भक्ति एक अद्वितीय उदाहरण है कि कैसे व्यक्ति धर्म और आस्था के प्रति अडिग रहकर अपने जीवन को साधना और समर्पण की ऊंचाईयों तक पहुंचा सकता है। उनकी साधना न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।</p>
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		<title>पंडिताई करने अमेरिका गया, 14 साल तक फंसा रहा, मां की अर्थी को कंधा तक नहीं दे सका</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 10 Oct 2024 07:49:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एजुकेशन]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>छतरपुर: छतरपुर जिले के निवासी कृष्ण कुमार द्विवेदी ने 14 वर्षों का लंबा इंतजार समाप्त करते हुए आखिरकार अमेरिका से स्वदेश लौटने में सफलता हासिल की। 2008 में स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती चैरिटेबल ट्रस्ट, नैनी, इलाहाबाद में शामिल होने के बाद, उन्हें 26 जनवरी 2011 को 50 अन्य वैदिक पंडितों के साथ अमेरिका के शिकागो भेजा [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>छतरपुर:</strong> छतरपुर जिले के निवासी कृष्ण कुमार द्विवेदी ने 14 वर्षों का लंबा इंतजार समाप्त करते हुए आखिरकार अमेरिका से स्वदेश लौटने में सफलता हासिल की। 2008 में स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती चैरिटेबल ट्रस्ट, नैनी, इलाहाबाद में शामिल होने के बाद, उन्हें 26 जनवरी 2011 को 50 अन्य वैदिक पंडितों के साथ अमेरिका के शिकागो भेजा गया था।</p>
<p>कृष्ण कुमार के अनुसार, संगठन के नियमों के अनुसार, अगर कोई वैदिक पंडित अच्छा कार्य करता है, तो उसे 2 साल की बजाय 3 साल तक शिकागो में रहने का मौका मिलता है। हालांकि, कृष्ण कुमार ने कुछ पंडितों के साथ मिलकर शिकागो शहर का भ्रमण किया और वहां 6 दिनों तक रह गए। इस दौरान, उन्होंने यह नहीं समझा कि शिकागो में रुकने के लिए एक निश्चित समय सीमा है।</p>
<h3>वीजा की समाप्ति और वापसी के जतन</h3>
<p>कृष्ण कुमार ने बताया कि इसी दौरान उनका वीजा समाप्त हो गया, जिससे वह शिकागो में फंस गए। उन्होंने स्वदेश लौटने के कई प्रयास किए, जिसमें अमेरिकी दूतावास में भारतीय अधिकारियों के साथ पत्राचार भी शामिल था। परंतु, उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्हें यहां तक कि अपनी मां के अंतिम संस्कार में भी शामिल होने का अवसर नहीं मिला।</p>
<h3>घर लौटने पर धूमधाम से स्वागत</h3>
<p>अंततः, 14 वर्षों के संघर्ष के बाद, कृष्ण कुमार अपने गांव लौटने में सफल हुए। उनकी वापसी पर गांव के लोगों ने ढोल नगाड़ों के साथ उनका भव्य स्वागत किया। गांव वालों ने उनकी साहसिकता और धैर्य की प्रशंसा की और उनकी घर वापसी को एक विशेष अवसर माना।</p>
<p>कृष्ण कुमार के साथ-साथ उनके परिवार और गांव के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है, क्योंकि उन्होंने इतने लंबे समय बाद अपने घर लौटने की खुशी को महसूस किया है। अब वे अपने जीवन को फिर से शुरू करने और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने के लिए तैयार हैं।</p>
<p>कृष्ण कुमार का यह अनुभव उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो विदेश में अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए जाते हैं, लेकिन कभी-कभी परिस्थितियों के कारण उन्हें वापसी में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।</p>
<p>The post <a href="https://mpsamachar.in/went-to-america-to-study-remained-stuck-for-14-years-couldnt-even-support-his-mothers-funeral-pyre/">पंडिताई करने अमेरिका गया, 14 साल तक फंसा रहा, मां की अर्थी को कंधा तक नहीं दे सका</a> appeared first on <a href="https://mpsamachar.in">MP Samachar - MP Samachar, मध्य प्रदेश समाचार, Latest MP Hindi News, मध्यप्रदेश न्यूज़</a>.</p>
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		<item>
		<title>महाकाल के दर पहुंचे भारतीय क्रिकेटर: मयंक अग्रवाल, प्रसिद्ध कृष्णा और विशाल विजयकुमार ने भस्म आरती में की शिरकत</title>
		<link>https://mpsamachar.in/indian-cricketers-reached-the-door-of-mahakal-mayank-agarwal-prasiddha-krishna-and-vishal-vijaykumar-participated-in-the-bhasma-aarti/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 09 Oct 2024 08:10:06 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[खेल]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक]]></category>
		<category><![CDATA[प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उज्जैन: उज्जैन स्थित विश्वविख्यात महाकालेश्वर मंदिर में आज भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों ने बाबा महाकाल के दर्शन किए और भस्म आरती में भाग लिया। क्रिकेटर मयंक अग्रवाल, प्रसिद्ध कृष्णा और विशाल विजयकुमार इस धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा बने और बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया। भस्म आरती, महाकालेश्वर मंदिर की एक अनूठी और महत्वपूर्ण [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://mpsamachar.in/indian-cricketers-reached-the-door-of-mahakal-mayank-agarwal-prasiddha-krishna-and-vishal-vijaykumar-participated-in-the-bhasma-aarti/">महाकाल के दर पहुंचे भारतीय क्रिकेटर: मयंक अग्रवाल, प्रसिद्ध कृष्णा और विशाल विजयकुमार ने भस्म आरती में की शिरकत</a> appeared first on <a href="https://mpsamachar.in">MP Samachar - MP Samachar, मध्य प्रदेश समाचार, Latest MP Hindi News, मध्यप्रदेश न्यूज़</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>उज्जैन: उज्जैन स्थित विश्वविख्यात महाकालेश्वर मंदिर में आज भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों ने बाबा महाकाल के दर्शन किए और भस्म आरती में भाग लिया। क्रिकेटर मयंक अग्रवाल, प्रसिद्ध कृष्णा और विशाल विजयकुमार इस धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा बने और बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p>भस्म आरती, महाकालेश्वर मंदिर की एक अनूठी और महत्वपूर्ण पूजा है, जिसे देखने के लिए भक्तों की बड़ी संख्या जुटती है। सुबह की इस आरती में शामिल होना एक विशेष अनुभव होता है और इसे भगवान शिव के प्रति श्रद्धा का एक अनमोल अवसर माना जाता है। भारतीय क्रिकेटरों ने इस आध्यात्मिक माहौल में भाग लेते हुए बाबा महाकाल के समक्ष पूजा-अर्चना की और देश व क्रिकेट के लिए आशीर्वाद मांगा।</p>
<p>महाकाल का दरबार – आम से खास तक सबके लिए खुला</p>
<p>महाकालेश्वर मंदिर हमेशा से ही आम जनता से लेकर विशिष्ट व्यक्तियों तक के लिए आस्था का केंद्र रहा है। हर दिन हजारों श्रद्धालु देश-विदेश से यहां भगवान महाकाल के दर्शन करने आते हैं। राजनीतिक, सामाजिक और मनोरंजन जगत की कई हस्तियां भी समय-समय पर बाबा महाकाल के दरबार में पहुंचकर आशीर्वाद लेती हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>महाकालेश्वर मंदिर का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व</p>
<p>महाकालेश्वर मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर भी है। यहां की भस्म आरती और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान महादेव के अनुयायियों के लिए विशेष महत्व रखते हैं। बाबा महाकाल की पूजा के साथ ही यहां श्रद्धालु अपनी व्यक्तिगत और राष्ट्रीय उन्नति के लिए प्रार्थना करते हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>The post <a href="https://mpsamachar.in/indian-cricketers-reached-the-door-of-mahakal-mayank-agarwal-prasiddha-krishna-and-vishal-vijaykumar-participated-in-the-bhasma-aarti/">महाकाल के दर पहुंचे भारतीय क्रिकेटर: मयंक अग्रवाल, प्रसिद्ध कृष्णा और विशाल विजयकुमार ने भस्म आरती में की शिरकत</a> appeared first on <a href="https://mpsamachar.in">MP Samachar - MP Samachar, मध्य प्रदेश समाचार, Latest MP Hindi News, मध्यप्रदेश न्यूज़</a>.</p>
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		<item>
		<title>ब्राह्मणों ने की रावण दहन परंपरा पर रोक लगाने की मांग, &#8216;पुतला दहन करना ब्राह्मण समाज का अपमान&#8217;</title>
		<link>https://mpsamachar.in/brahmins-demand-ban-on-ravana-burning-tradition-burning-effigy-is-an-insult-to-brahmin-society/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 09 Oct 2024 04:07:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[एमपी समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उज्जैन: दशहरा पर्व पर रावण दहन की परंपरा को लेकर मध्य प्रदेश में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है। अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने रावण दहन पर रोक लगाने की मांग की है, जिसके पीछे उनका तर्क है कि रावण त्रिकालदर्शी और महान विद्वान थे, और उनका पुतला दहन करना ब्राह्मण समाज का [&#8230;]</p>
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<div class="relative p-1 rounded-sm flex items-center justify-center bg-token-main-surface-primary text-token-text-primary h-8 w-8"><strong>उज्जैन</strong>: दशहरा पर्व पर रावण दहन की परंपरा को लेकर मध्य प्रदेश में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है। अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने रावण दहन पर रोक लगाने की मांग की है, जिसके पीछे उनका तर्क है कि रावण त्रिकालदर्शी और महान विद्वान थे, और उनका पुतला दहन करना ब्राह्मण समाज का अपमान है। इस वर्ष 12 अक्टूबर को दशहरा पर्व मनाया जाएगा, लेकिन इसके पहले ही उज्जैन में ब्राह्मण समाज के लोगों ने सरकार से इस प्राचीन परंपरा को समाप्त करने का अनुरोध किया है।</div>
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<h3><strong>रावण को बताया विद्वान और त्रिकालदर्शी</strong></h3>
<p>अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज के संस्थापक अध्यक्ष महेश पुजारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र लिखकर रावण दहन पर प्रतिबंध की मांग की है। उनका कहना है कि रावण न केवल एक विद्वान थे, बल्कि त्रिकालदर्शी भी थे। उन्होंने राक्षस कुल का उद्धार करने के लिए माता सीता का हरण किया, जिसके कारण ही भगवान राम ने उन्हें मुक्ति प्रदान की। महेश पुजारी के अनुसार, रावण दहन की प्रथा से ब्राह्मण समाज का अपमान होता है, और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए।</p>
<h3><strong>ब्राह्मण समाज का अपमान होने का आरोप</strong></h3>
<p>महेश पुजारी का कहना है कि दशहरे पर रावण के पुतले का दहन ब्राह्मणों को अपमानित करने जैसा प्रतीत होता है। उनका आरोप है कि रावण का दहन एक षड्यंत्र का हिस्सा है, जिसके माध्यम से ब्राह्मण कुल को बदनाम करने की कोशिश की जाती है। इसीलिए उन्होंने रावण के पुतले के दहन पर रोक लगाने की मांग की है और सुझाव दिया है कि अगर दहन करना है, तो उन लोगों का पुतला दहन किया जाना चाहिए, जो महिलाओं के साथ अपराध करते हैं।</p>
<h3><strong>राक्षस प्रवृत्तियों का अंत करने की आवश्यकता</strong></h3>
<p>महेश पुजारी ने यह भी कहा कि इस समय रावण का पुतला जलाने से बेहतर है कि हम अपनी मन की राक्षस प्रवृत्तियों को समाप्त करें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज के समय में कई लोग रावण से भी बुरे काम कर रहे हैं, और उन पर ध्यान दिया जाना चाहिए। ब्राह्मण समाज के अन्य पदाधिकारियों ने भी इस मांग का समर्थन किया है।</p>
<p>रावण दहन पर रोक लगाने की मांग एक गंभीर मुद्दा बन गया है, खासकर तब जब दशहरे के त्योहार में रावण दहन की परंपरा हजारों सालों से चली आ रही है। ब्राह्मण समाज द्वारा उठाए गए तर्कों को ध्यान में रखते हुए यह देखना होगा कि सरकार इस पर क्या कदम उठाती है</p>
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