Earthquake: मंगलवार की सुबह अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के लोगों के लिए डरावनी रही। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) के अनुसार यहां 6.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। भूकंप की गहराई 10 किलोमीटर थी जो काफी उथली मानी जाती है। हालांकि किसी जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है लेकिन इस झटके ने लोगों को हिला कर रख दिया।
भूकंप का केंद्र और डर
भूकंप का केंद्र अंडमान सागर में बताया गया है जो एक भूगर्भीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र है। यहां अक्सर हल्के और मध्यम स्तर के भूकंप आते रहते हैं लेकिन इस बार तीव्रता ज्यादा थी। भूकंप के समय अधिकतर लोग सो रहे थे इसलिए झटका महसूस होते ही लोग घरों से बाहर निकल आए। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने झटकों को लेकर पोस्ट कीं।

जुलाई में कई बार कांपी धरती
जुलाई के महीने में भारत के कई हिस्सों में धरती कांप चुकी है। दिल्ली-एनसीआर में भी जुलाई में तीन बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। 22 जुलाई को गुजरात के कच्छ क्षेत्र में भी 3.6 तीव्रता का भूकंप आया था। बार-बार आ रहे भूकंपों से न केवल लोग घबरा गए हैं बल्कि आपदा प्रबंधन विभाग भी पूरी सतर्कता बरत रहा है।
क्यों आते हैं भूकंप?
धरती की सतह देखने में शांत लगती है लेकिन इसके भीतर लगातार हलचल चलती रहती है। वैज्ञानिक बताते हैं कि पृथ्वी 12 टेक्टोनिक प्लेट्स पर स्थित है। जब ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं या खिसकती हैं तो ऊर्जा निकलती है जो भूकंप के रूप में महसूस होती है। भूकंप की तीव्रता और गहराई इस टकराव की तीव्रता पर निर्भर करती है।
प्रशासन और विशेषज्ञ सतर्क
बार-बार आ रहे भूकंपों के कारण अब प्रशासन और विशेषज्ञ सतर्क हो गए हैं। आपदा प्रबंधन एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने की तैयारियां की जा रही हैं। भूकंप से पहले और बाद की जागरूकता भी लोगों के बीच बढ़ाई जा रही है ताकि नुकसान को कम किया जा सके।


