Pistachios खाएं लेकिन सोच-समझकर वरना सेहत बन सकती है आफत! जानिए कितनी मात्रा है सही

Pistachios को ड्राई फ्रूट्स की दुनिया में बहुत पसंद किया जाता है। इसका नमकीन स्वाद लोगों को खूब भाता है और यही वजह है कि यह रोजमर्रा की डाइट में शामिल हो चुका है। पिस्ता में प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट्स की भरपूर मात्रा होती है। यह शरीर को ताकत देने के साथ साथ स्वाद का भी आनंद देता है। पिस्ता में मौजूद पोषक तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं।

पिस्ता में छिपे हैं कई जरूरी विटामिन और खनिज

पिस्ता विटामिन बी6, विटामिन सी, कैल्शियम, मैग्नीज, कॉपर और फॉस्फोरस जैसे जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होता है। विटामिन सी त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करता है जबकि आयरन की मौजूदगी एनीमिया की समस्या से राहत देती है। पिस्ता में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को अंदर से डिटॉक्स करते हैं। हड्डियों की मजबूती के लिए इसमें कैल्शियम और जिंक भी भरपूर होते हैं।

Pistachios खाएं लेकिन सोच-समझकर वरना सेहत बन सकती है आफत! जानिए कितनी मात्रा है सही

वज़न घटाने वालों के लिए एक हेल्दी स्नैकिंग ऑप्शन

जो लोग वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं उनके लिए पिस्ता एक बेहतरीन स्नैकिंग विकल्प हो सकता है। इसकी कम कैलोरी और हाई फाइबर वाली खासियत भूख को कंट्रोल करने में मदद करती है। फाइबर पाचन तंत्र को सही बनाए रखता है और मेटाबॉलिज़्म को एक्टिव रखता है जिससे वजन नियंत्रित रहता है। लेकिन यह तभी फायदेमंद है जब इसे सीमित मात्रा में खाया जाए।

 ज्यादा पिस्ता खाने के हो सकते हैं गंभीर नुकसान

पिस्ता गर्म तासीर वाला होता है इसलिए अधिक मात्रा में इसके सेवन से शरीर में गर्मी बढ़ सकती है। कुछ लोगों को इससे एलर्जी की शिकायत भी हो सकती है जिसमें खुजली, सूजन या त्वचा पर रैशेज हो सकते हैं। पाचन तंत्र पर दबाव पड़ता है जिससे अपच, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याएं हो सकती हैं। पिस्ता में मौजूद ऑक्सलेट्स की मात्रा किडनी स्टोन जैसी समस्या को जन्म दे सकती है।

सीमित मात्रा में ही लें इसका लाभ

पिस्ता जितना पौष्टिक होता है उतना ही ज्यादा मात्रा में खाने पर नुकसानदायक भी हो सकता है। रोजाना 10 से 15 पिस्ते पर्याप्त माने जाते हैं। इससे ज्यादा मात्रा में सेवन करने पर वजन बढ़ने की संभावना भी होती है। इसलिए अगर आप पिस्ता को अपनी डाइट में शामिल कर रहे हैं तो उसकी मात्रा को लेकर सजग रहें। संतुलन ही सबसे अच्छा उपाय है।

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