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सरकार ने झुग्गियों के बदले दिए फ्लैट, मालिकों ने उन्हें किराए पर दे दिया, अब होगी कार्रवाई

भोपाल, मध्यप्रदेश: शहर के हाउसिंग फॉर ऑल (एचएफए) योजना के तहत आवंटित फ्लैट्स का एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। नगर निगम द्वारा किए गए हालिया सर्वे में पता चला है कि इन फ्लैट्स में से 21% फ्लैट्स को मकान मालिकों ने किराए पर दे दिया है, जबकि योजना के तहत ऐसा करना प्रतिबंधित है। निगम ने शहर के 5 प्रमुख प्रोजेक्ट्स भानपुर, कोकता, हिनोतिया आलम, मालीखेड़ी और राहुल नगर में 3,054 फ्लैट्स का सर्वे किया, जिसमें 639 फ्लैट्स में किराएदार रहते पाए गए।

फ्लैट्स के आवंटन में अनियमितताएं

नगर निगम द्वारा संचालित इस सर्वे में यह पाया गया कि जिन लोगों को झुग्गियों या किराए के मकानों से राहत देने के लिए फ्लैट आवंटित किए गए थे, उनमें से कई ने अपने आवास को किराए पर चढ़ा दिया। झुग्गीवासियों को आवंटित 1,293 फ्लैट्स में से 267 फ्लैट्स में किराएदार मिले। इसके अलावा, 1,761 फ्लैट्स उन लोगों को दिए गए थे जो पहले खुद किराए पर रहते थे, इनमें से 372 फ्लैट्स को भी किराए पर दे दिया गया।

नगर निगम का एक्शन प्लान

इस अनियमितता के सामने आने के बाद अब नगर निगम फ्लैट मालिकों के खिलाफ कार्रवाई करने जा रहा है। सर्वे के आधार पर निगम इन मकान मालिकों को नोटिस जारी करेगा। यदि मकान मालिकों ने किराए पर दिए गए फ्लैट्स को खुद इस्तेमाल में नहीं लिया, तो उनके आवंटन को निरस्त करने की संभावना है। योजना के तहत यह स्पष्ट रूप से शर्त थी कि आवंटित फ्लैट्स को किराए पर नहीं दिया जा सकता है।

अभी और भी प्रोजेक्ट्स की जांच बाकी

भोपाल में एचएफए योजना के तहत कुल 18 प्रोजेक्ट्स हैं, जिनमें लगभग 15,000 फ्लैट्स शामिल हैं। अभी तक 5 प्रोजेक्ट्स का सर्वे पूरा हुआ है, जबकि बाकी 13 प्रोजेक्ट्स की जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में यह संभावना है कि और भी ऐसे मामले सामने आ सकते हैं जहां मकान मालिकों ने नियमों का उल्लंघन करते हुए अपने फ्लैट किराए पर दिए हों।

नियमों के उल्लंघन पर सख्त कदम

हाउसिंग फॉर ऑल योजना के तहत दिए गए फ्लैट्स का मकसद था कि निम्न आय वर्ग के लोग रियायती दरों पर अपना मकान प्राप्त करें। लेकिन मकान मालिकों द्वारा फ्लैट किराए पर चढ़ाने से योजना के उद्देश्य पर प्रश्नचिह्न लग गया है। निगम का कहना है कि आवंटन नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि फ्लैट्स उन्हीं को मिले, जो इसके वास्तविक हकदार हैं।

इस सर्वे ने यह साबित कर दिया है कि सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग किस हद तक हो सकता है। नगर निगम की यह कार्रवाई अन्य प्रोजेक्ट्स के लिए भी एक सख्त चेतावनी हो सकती है, ताकि हाउसिंग योजनाओं का सही ढंग से क्रियान्वयन हो सके और सही लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित हो।

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