ग्वालियर | मध्यप्रदेश अपनों पर रहम औरों पर सितम! जी हां मध्य प्रदेश के ग्वालियर में यह शायरी बिल्कुल सही साबित हो रही है ग्वालियर जिले के सरकारी विभागों से सर्विस और प्रॉपर्टी टैक्स वसूलने में नगर निगम के पसीने छूट रहे हैं जिले के 1 दर्जन से अधिक सरकारी विभागों से नगर निगम को 100 करोड़ से अधिक की राशि वसूलना है लेकिन रिकवरी ग्राफ साल दर साल गिर रहा यहां के सरकारी विभागों से सर्विस और प्रॉपर्टी टैक्स की वसूली टारगेट की आधी ही हो रही है|
AG ऑफिस (Accountant General) – 3 करोड़ 97 लाख
जीवाजी विश्वविद्यालय – 6 करोड़ 73 लाख
मेला प्राधिकरण – 5 करोड़ 47 लाख
रेलवे – 12 करोड़
MPEB – 8 करोड़
ग्वालियर विकास प्राधिकरण – 1 करोड़ 92 लाख
दुग्ध संघ – 40 लाख
इसी तरह कई और शहर के बड़े बकायेदार हैं जिनसे नगर निगम को सालों से पेंडिंग प्रॉपर्टी और सर्विस टैक्स वसूलना है लेकिन महज पत्राचार की खानापूर्ति के चलते नगर निगम का रिकवरी ग्राफ लगातार गिरता चला जा रहा हैत्र|
साल 2015-16
टारगेट – 43 करोड़, 82 लाख
वसूली – 23 करोड़, 30 लाख
साल 2017-18
टारगेट – 85 करोड़, 28 लाख
वसूली – 51 करोड़, 79 लाख
साल 2019-20
टारगेट – 75 करोड़
वसूली – 57 करोड़, 94 लाख
आम जनता से सख्ती से टैक्स वसूलने वाला नगर निगम इन सरकारी विभागों के आगे बौना साबित हो रहा है हालांकि नगर निगम के अधिकारी अब अपनी किरकिरी होने के चलते वसूली को लेकर कुर्की की कार्रवाई की बात कह रहे हैं म्युनिसिपल कमिश्नर शिवम वर्मा का कहना है कि जिन सरकारी विभागों का टैक्स बकाया है पहले उन्हें नोटिस देंगे इसके बाद भी टैक्स का भुगतान नहीं किया जाएगा तो कुर्की की कार्रवाई करेंगे|
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