शराब ठेकेदारों की मनमानी, विभाग के आदेश के बाद भी MRP से अधिक महंगी बेच रहे शराब

Author Picture
By MPSAMACHAR Published On: July 19, 2021

धर्मेंद्र शर्मा, ग्वालियर। शहर में शराब कारोबारियों (Liquor Contractors) की मनमानी इस बात से देखी जा रही है कि आबकारी विभाग की ओर से जारी किए गए आदेश के बाद भी शराब प्रेमियों को तय एमआरपी से ज्यादा रेटों में बियर विक्रय की जा रही है। ऐसा नजारा सिर्फ शहर की एक दुकान का नहीं, बल्कि लगभग ज्यादातर दुकानों पर यही आलम है। जहां पर बियर की एमआरपी से 10 से 20 रुपए तक ज्यादा लिए जा रहे हैं। खास बात यह है कि आबकारी आयुक्त के द्वारा जारी आदेश के बाद भी ना तो ऐसी दुकानों पर नकेल कसी जा रही है और ना ही शराब ठेकेदार के द्वारा एमआरपी से ज्यादा दामों की वसूली पर अंकुश लगाया जा रहा है। 

ये भी पढ़े : खंडवा BJP विधायक देवेंद्र वर्मा की गाड़ी पलटी, बड़ा हादसा होने से टला

ग्वालियर जिले में आबकारी विभाग की नाक के नीचे शराब ठेकेदारों के द्वारा मदिरा प्रेमियों से एमआरपी से ज्यादा रुपए वसूलना आम बात हो गई है। अभी हाल ही में कुछ महीनों पहले शहर की कुछ दुकानों से एक्सपायरी डेट की बियर बेचे जाने की शिकायत सामने आई थी। जिसके बाद आबकारी विभाग की ओर से फौरी तौर पर कार्रवाई करने के बाद मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। लेकिन एक बार फिर से शहर के शराब ठेकेदार शराब प्रेमियों की जेब पर डाका डाल रहे हैं। आलम यह है कि बियर बोटल या केन की बिक्री पर एमआरपी से 10 से 20 रुपए ज्यादा लोगों से लिए जा रहे हैं।

ये भी पढ़े : कांग्रेस का निगम के ख़िलाफ़ हल्लाबोल, विधायक बोले- अधिकारियों और मंत्रियों को चैन से नही सोने देंगे

यह आलम तब है, जब आबकारी आयुक्त राजीव दुबे ने 4 दिन पहले ही 14 जुलाई को एक आदेश जारी कर सभी दुकानदारों को सूचित किया है, कि किसी भी ग्राहक को एमआरपी से ज्यादा की शराब बिक्री नहीं की जाएगी। लेकिन आबकारी आयुक्त के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए शहर के लगभग ज्यादातर दुकानदार एमआरपी से ज्यादा बीयर की बिक्री कर रहे हैं। ऐसे में आबकारी विभाग के निरीक्षण अमले पर ही सवाल खड़ा होता है, कि वह अपने अधिकारी के आदेश की ही तामिल दुकानों पर नहीं करा पा रहे हैं। दरसअल ज्यादातर ग्राहक बोतल या कैन पर बिना एक्सपायरी और एमआरपी देखें बीयर खरीदकर पीना शुरू कर देते हैं और कुछ ग्राहक अगर शराब दुकानदार से एमआरपी की बात करते हैं, तो वह या तो उन्हें चलता कर देते हैं या फिर उनके रुपए वापस कर देता है।

ये भी पढ़े : सितंबर-अक्टूबर में हो सकते हैं नगरीय निकाय चुनाव, तैयारी हुई शुरू