100 करोड़ रुपए से अधिक की सिंधिया राजवंश की ज्वैलरी पहनकर सजेंगे राधा-कृष्ण, ऑनलाइन होंगे दर्शन

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By MPSAMACHAR Published On: August 11, 2020
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ग्वालियर। ग्वालियर के फूलबाग गोपाल मंदिर में जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान राधाकृष्ण का श्रृंगार करीब 100 करोड़ रुपए के अधिक की ज्वैलरी से किया जाएगा। सिंधिया राजवंश के ये प्राचीन ज्वैलरी मध्यभारत की सरकार के समय गोपाल मंदिर को सौंप दिए गए थे। इन बेशकीमती ज्वैलरी में हीरे और पन्ना जडि़त हैं। 
 
ज्वैलरी को हर साल जिला कोषालय से कड़ी सुरक्षा के बीच मंदिर लाया जाता है। ज्वैलरी की लिस्टिंग के बाद उनका वजन किया जाएगा। इसके बाद गंगाजल से धोने के बाद भगवान को पहनाए जाएंगे। सुरक्षा के लिए जन्माष्टमी के दिन यहां 200 से अधिक पुलिस जवान तैनात किए जाते हैं। मंदिर के इतिहास में पहली बार कोरोना संकट के चलते इस बार मंदिर के अंदर श्रद्धालुओं को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। 
 
श्रृंगार के बाद भगवान के दर्शन फेसबुक लाइव के जरिए कराए जाएंगे। निगमायुक्त संदीप माकिन के अनुसार 12 अगस्त को सुबह बैंक के लॉकर से भगवान के गहने निकालकर उनका श्रृंगार किया जाएगा। गहनों की सुरक्षा के लिए पुलिस जवानों की तैनाती तो होगी ही साथ ही सीसीटीवी कैमरों के जरिए भी इनकी निगरानी की जाएगी।
ज्वैलरी रात में ही जमा कराए जाएंगे कोषालय में
कृष्ण जन्म के बाद रात 12 बजे ही इन जेवरातों को ट्रेजरी खुलवाकर उसमें रखवाया जाएगा और दूसरे दिन सुबह इन्हें दोबारा से बैंक के लॉकर में रखवा दिया जाएगा। सौ करोड़ कीमत के हैं गहने सिंधिया रियासत द्वारा बनवाए गए इस मंदिर में राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं के लिए बहुमूल्य रत्नों से जडि़त सोने की जेवरात हैं। एंटीक होने के कारण इनका बाजार मूल्य सौ करोड़ से अधिक आंका जाता है।
ये हैं भगवान के गहने
भगवान के जेवरातों में राधाकृष्ण का सफेद मोती वाला पंचगढ़ी हार, सात लड़ी हार, जिसमें 62 असली मोती और 55 पन्ने लगे हैं। कृष्ण भगवान सोने के तोड़े तथा सोने का मुकुट, राधाजी का ऐतिहासिक मुकुट, जिसमें पुखराज और माणिक जडि़त के साथ बीच में पन्ना लगा है। यह मुकुट लगभग तीन किलो वजन का है। राधा रानी के मुकुट में 16 ग्राम पन्ना रत्न लगे हुए हैं। श्रीजी तथा राधा के झुमके, सोने की नथ, कंठी, चूडिय़ां,कड़े इत्यादि हैं। भगवान के भोजन के लिए सोने, चांदी के प्राचीन बर्तन भी हैं। साथ ही भगवान की समई, इत्र दान, पिचकारी, धूपदान, चलनी, सांकड़ी, छत्र, मुकुट, गिलास, कटोरी,कुंभकरिणी, निरंजनी आदि भी हैं।