Indian Constitution: ‘संविधान की आत्मा से छेड़छाड़’ – इंदिरा गांधी के इरादों पर बीजेपी का बड़ा खुलासा

Indian Constitution: बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर जोरदार हमला किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर 30 दिसंबर 1975 के टाइम्स ऑफ इंडिया की एक अख़बार की कटिंग साझा की। इस कटिंग में छपी खबर का शीर्षक था – “Indira aims to make fundamental changes in the Constitution”। इसके साथ भंडारी ने लिखा कि इंदिरा गांधी ने भारतीय संविधान की आत्मा को फिर से लिखने की कोशिश की थी।

“तानाशाही की ओर देश को धकेलना चाहती थीं इंदिरा”: बीजेपी प्रवक्ता का आरोप

प्रदीप भंडारी ने लिखा कि यह कोई अफवाह नहीं बल्कि ऐतिहासिक सच्चाई है। उन्होंने कहा, “भारत के लोगों और लोकतांत्रिक भावना को धन्यवाद, हम कांग्रेस की संपूर्ण तानाशाही से बाल-बाल बचे।” उनका मानना है कि इंदिरा गांधी का प्रयास था कि वे संविधान में बुनियादी बदलाव करके सत्ता पर एकछत्र अधिकार रखें। यह बयान आपातकाल की पृष्ठभूमि में आया है जिसे भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय माना जाता है।

आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर कांग्रेस पर दोबारा निशाना

25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर भी प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस और खासतौर से इंदिरा गांधी पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था, “50 साल पहले गांधी- वाड्रा परिवार ने संविधान की हत्या की थी। उन्होंने सत्ता में बने रहने के लिए लोकतंत्र को कुचल दिया था।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अब तक इसके लिए देश से माफी नहीं मांगी है।

“अभिव्यक्ति की आज़ादी का गला घोंटा गया था”

भंडारी ने कहा कि उस दौर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय की कांग्रेस सरकार तय करती थी कि लोग क्या कह सकते हैं और क्या नहीं। सैकड़ों पत्रकारों को जेल में डाला गया क्योंकि उन्होंने सरकार के खिलाफ सच लिखने की हिम्मत की थी। लाखों लोगों को बिना मुकदमे के हिरासत में लिया गया था और देश की संस्थाओं पर कब्ज़ा कर लिया गया था।

जबरन नसबंदी, डर और दमन की राजनीति पर भी हमला

प्रदीप भंडारी ने यह भी आरोप लगाया कि आपातकाल के दौरान देश में जबरन नसबंदी कराई गई, नागरिकों को डराया गया और परिवारों को तोड़ दिया गया। उनका कहना था कि यह ऐसा अध्याय है जिसे कोई भारतीय भूल नहीं सकता। उनका यह बयान कांग्रेस पर दबाव बनाने और इंदिरा गांधी की नीतियों को फिर से चर्चा में लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

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