Indore News: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए उन 75 छात्रों के लिए NEET-UG परीक्षा फिर से आयोजित करने का निर्देश दिया है जिन्होंने 3 जून से पहले याचिका दायर की थी। इन छात्रों ने 4 मई को हुई परीक्षा के दौरान बिजली गुल होने के कारण उजाले की कमी का हवाला देकर दोबारा परीक्षा की मांग की थी। कोर्ट ने माना कि इन छात्रों की गलती नहीं थी, फिर भी वे अन्य छात्रों की तुलना में असुविधाजनक स्थिति में थे।
बारिश और बिजली कटौती बनी परीक्षा में बाधा
परीक्षा वाले दिन इंदौर में भारी बारिश के चलते 49 में से 40 परीक्षा केंद्रों पर बिजली चली गई थी। कई केंद्रों में प्राकृतिक रोशनी की भी कमी थी जिससे छात्र प्रश्नों को ठीक से पढ़ नहीं सके। नतीजतन, कई छात्रों को समय पर उत्तर लिखने में कठिनाई हुई। छात्रों ने अदालत में दलील दी कि इस कारण उन्हें अन्य छात्रों की तुलना में नुकसान हुआ, जो बेहतर रोशनी में परीक्षा दे पाए।

कोर्ट ने खुद की जांच: कमरे की लाइट बुझाकर देखी स्थिति
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने खुद यह जांचने के लिए कोर्टरूम की लाइट बंद करवाई कि कम रोशनी में पढ़ना और लिखना कितना कठिन होता है। इस प्रयोग से यह साफ हो गया कि छात्रों को वास्तव में नुकसान हुआ था। कोर्ट ने इस आधार पर माना कि परीक्षा में समानता और निष्पक्षता बनी रहनी चाहिए, जो इस स्थिति में नहीं थी।
सिर्फ याचिका दायर करने वालों को मिलेगा लाभ
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार यह दोबारा परीक्षा सिर्फ उन छात्रों के लिए होगी जिन्होंने 3 जून से पहले याचिका दायर की थी। इसका मतलब है कि केवल 75 छात्र ही इस पुनः परीक्षा का हिस्सा बनेंगे। कोर्ट ने NTA को निर्देश दिया है कि वह जल्द से जल्द परीक्षा आयोजित करे और उनका रिजल्ट घोषित करे ताकि इन छात्रों का भविष्य प्रभावित न हो।
परीक्षा की निष्पक्षता पर उठे सवाल, बना राष्ट्रीय मुद्दा
NEET-UG इस बार कई कारणों से विवादों में रहा है, लेकिन इंदौर की यह घटना खास तौर पर इसलिए चर्चा में आई क्योंकि छात्रों की समस्याओं को कोर्ट ने गंभीरता से लिया। यह फैसला न केवल इन 75 छात्रों के लिए राहत का कारण बना है बल्कि पूरे देश में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर एक गहन विचार का विषय बन गया है।


