SUBHASH NAGAR आरओबी तैयार शुरू होते ही मिलेगी जाम से राहत

BHOPAL | सुभाष नगर रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) का काम पूरा हो चुका है। पीडल्यूडी ने निर्माण कार्य पूरा कर लिया है। रेलवे के हिस्से का निर्माण कार्य लॉकडाउन के चलते अटका हुआ था जिसे हाल ही में पूरा किया गया है। रेल लाइन के ठीक ऊपर ब्रिज को दोनों ओर से जोडऩे का काम हो चुका है। ब्रिज बनने के बाद अब इसके लोकार्पण की तैयारी चल रही है इस ब्रिज के शुरू होते ही सुभाष नगर प्रभात चौराहा पर ट्रैफिक का दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा। इसकी एक लाइन बनने के बाद ही यहां से यातायात शुरू करने की बात उठी थी लेकिन रेलवे और पीडल्यूडी ने सुरक्षा का हवाला देते हुए काम पूरा होने के बाद ही इसे खोलने का फैसला किया था। बता दें कि ब्रिज निर्माण की डेडलाइन भी डेढ़ साल पहले पूरी हो चुकी है। 
आठ महीने पहले पीडल्यूडी ने ब्रिज के अंतिम निर्माण कार्य के रूप में दोनों ही ओर की एप्रोच रोड का निर्माण कार्य पूरा कर लिया था। रेलवे के हिस्से का काम पूरा होने के बाद पीडल्यूडी द्वारा फिनिशिंग वर्क किया गया।प्रभात चौराहा की रोटरी पर अभी तक काम नहीं आरओबी के शुरू होते ही प्रभात चौराहा की ओर ट्रैफिक भार बढ़ जाएगा। वर्तमान में रोटरी बड़ी होने के कारण जाम के हालात बनते हैं। लिहाजा इसे छोटा करने का निर्णय लिया गया था। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की टीम ने सर्वे कर निगम को 20 दिन में इसे हटाने का जुमा  सौंपा था, लेकिन आठ महीने बाद भी इस पर काम शुरू नहीं हो सका है। ब्रिज पर बो-स्ट्रिंग (ब्रिज के ऊपरी हिस्से में लगाने वाला चंद्राकर हिस्सा या प्रत्यंचा) लगाने का काम पूरा होना था। बो-स्ट्रिंग मजबूती देने के साथ सुरक्षा के लिहाज से लगाया जाता है। इस तकनीक का उपयोग अधिक ऊंचाई वाले और अधिक वाहन भरी  क्षमता वाले ब्रिज के लिए किया जाता है।अप्रोच रोड बनने के बाद रेलवे के हिस्से का कार्य बचा था। जिसमें बो-स्ट्रिंग शिफ्टिंग  का काम चल रहा था। 
आठ माह पहले एक गर्डर रखा जा चुका था, दूसरा गार्डन रखने में तकरीबन 6 से 7 महीने का समय लग गया। ब्रिज निर्माण में नगर निगम और पीडल्यूडी के बीच पाइप लाइन शिफ्टिंग  का विवाद था। इस विवाद को सुलझने में ही एक साल से अधिक का समय लगा। नगर निगम ने जब मैदा मिल की ओर पाइप लाइन शिफ्टिंग  का काम पूरा किया, तब एप्रोच रोड का निर्माण किया गया। इसके अलावा भोपाल रेल मंडल ने निर्माण कार्य पूरा करने के लिए कमिश्नर रेलवे सेटी से दो बार अनुमति मांगी थी, लेकिन परमिशन नहीं दी गई थी। 
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