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महापौर चुनाव लड़ने के लिए छोडी सरकारी नौकरी, मां का सपना बेटा महापौर चुनाव लडे

इंदौर। एमपी शिक्षा विभाग में सब इंजीनियर 33 साल के महेंद्र मकासरे ने सरकारी नौकरी से इस्तीफा देकर नगर निगम चुनाव में निर्दलीय महापौर पद के लिए नामांकन दर्ज कराया है। मकासरे का नामांकन फॉर्म अप्रूव हो गया है और उन्हें बुधवार यानी आज चुनाव चिन्ह भी आवंटित हो जाएगा।

मेरे पिता मजदूरी करते थे और मां कभी घर-घर बर्तन मांजने का काम करती थीं। मां की इच्छा थी कि मैं खूब पढ़ाई करूं और इंजीनियर बनूं। घर में आर्थिक समस्या के चलते मैंने पिता के साथ मजदूरी की, सब्जी बेचने का काम भी किया, क्योंकि मैं अपनी मां के सपने को पूरा करना चाहता था। अब मेरी मां चाहती हैं कि इंदौर शहर का मेयर बनूं और जनता की सेवा करूं। मैं अपनी मां के हर सपने को पूरा करना चाहता हूं और इसीलिए सरकारी नौकरी छोड़कर मेयर पद के लिए चुनावी मैदान में उतरा हूं। मैं हारा तो भी आगे जनता की सेवा ही करूंगा। मां के सपनों को पूरा करने के लिए मैं कुछ भी करने को तैयार हूं।

 

मकासरे ने नगरीय निकाय चुनावों में भाजपा, कांग्रेस, आप और एनसीपी के प्रत्याशियों के सामने ताल ठोकी है। दैनिक भास्कर से विशेष चर्चा में मकासरे ने अपना चुनावी घोषणा पत्र भी साझा किया। मकासरे ने बताया कि इंजीनियरिंग करने के बाद 2009 में शिक्षा विभाग में सब इंजीनियर की नौकरी जॉइन की थी, लेकिन अब इस्तीफा देकर महापौर पद के लिए निर्दलीय नामांकन भरा है। मकासरे आगे बताते हैं कि मां की इच्छा थी कि मैं इंजीनियर बनूं तो मैंने वैष्णव पॉलिटेक्निक से इंजीनियरिंग की। अब मां चाहती है कि मैं जनता की सेवा करूं, इसलिए चुनाव लड़ रहा हूं।

 

 

मकासरे ने कहा, मुझे पूरा विश्वास है कि इंदौर की जनता मुझे अपना आशीर्वाद देकर इंदौर का महापौर बनाएगी, लेकिन किसी कारण से मैं हार भी जाता हूं तो भी मैं अब लोगों की सेवा ही करूंगा। मेरी उम्र 33 साल है और मेरी दो बेटियां हैं। मेरा जन्म बड़वानी में हुआ था, लेकिन पिछले 30 साल से इंदौर के द्वारकापुरी कॉलोनी में रह रहा हूं।मकासरे ने बताया कि शिक्षा विभाग में सब इंजीनियर की नौकरी शुरू करने के बाद उन्होंने इंदौर के 80 से 100 साल पुराने 24 जर्जर स्कूलों का सर्वे कर उनकी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी। इसके बाद 12 स्कूलों का री-डेवलपमेंट का काम हो चुका है। जबकि 12 स्कूलों का री-डेवलपमेंट का काम चल रहा है।

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