इंदौर। प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत अभियान को आगे बढ़ाने में इंदौर अहम भूमिका अदा कर रहा है। स्वदेशी राखी के बाद अब मिट्टी और गोबर से गणेश प्रतिमा बनाने के लिए शहर में वैदिक गणेश कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। शहर से लेकर गांवों की महिलाएं साथ मिलकर इन अनोखी मूर्तियों को तैयार कर रही हैं।
मूर्तियों में गंगाजल, तुलसी के बीज, गोबर का प्रयोग किया गया है और इन्हें घर में ही गमले, बगीचे और बर्तन में विसर्जित किया जा सकता है।
कोरोना महामारी के बीच इस बार गणेश के अलग रूप भी नज़र आ रहे है, इकोफ्रैंडली गणेश मूर्ति में भगवान गणेश डॉक्टर के रूप में नज़र आ रहे हैं, तो कहीं गणेशजी को मास्क पहनाया गया है। खास बात यह है कि इस बार पीओपी से बनी मूर्तियां और केमिकलयुक्त कलर से रंगी मूर्तियों का उपयोग नहीं किया जा रहा है, इस बार बाजार में मिट्टी और गोबर से बनी गणेश मूर्तियां ही नजर आएंगी।
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