Maharashtra Language Dispute: महाराष्ट्र में भाषा विवाद पर गरमाई सियासत, सुप्रीम कोर्ट की दहलीज़ पर पहुंचा मामला

Maharashtra Language Dispute: महाराष्ट्र में भाषा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस बार मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। मुंबई के वकील घनश्याम दयालु उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि राज ठाकरे और उनकी पार्टी के कार्यकर्ता उत्तर भारत से आने वाले लोगों पर हमला करते हैं और भाषा के नाम पर राजनीति करते हैं।

संविधान की भावना के खिलाफ है भाषा के नाम पर हिंसा

याचिकाकर्ता का कहना है कि यह पूरा मामला संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी राज्य में भाषा के नाम पर हिंसा करना और बाहरी लोगों को निशाना बनाना न केवल असंवैधानिक है बल्कि समाज को तोड़ने वाला कृत्य भी है। यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के खिलाफ जाता है जिसमें समानता और जीवन के अधिकार की बात की गई है।

Maharashtra Language Dispute: महाराष्ट्र में भाषा विवाद पर गरमाई सियासत, सुप्रीम कोर्ट की दहलीज़ पर पहुंचा मामला

लालिता कुमारी केस के दिशा-निर्देशों को लागू करने की मांग

याचिका में खास तौर पर लालिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार वाले ऐतिहासिक फैसले का जिक्र किया गया है। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि किसी भी संज्ञेय अपराध की जानकारी मिलते ही पुलिस को तुरंत एफआईआर दर्ज करनी होगी। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि इस फैसले के दिशा-निर्देश पूरे देश में अनिवार्य रूप से लागू किए जाएं और इसका पालन न करने पर संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो।

चुनाव आयोग और महाराष्ट्र सरकार भी बनीं पक्षकार

घनश्याम उपाध्याय की याचिका में सिर्फ महाराष्ट्र सरकार ही नहीं बल्कि चुनाव आयोग को भी पक्षकार बनाया गया है। उनका कहना है कि ऐसी राजनीतिक गतिविधियां जो समाज को बांटने का काम करें या हिंसा को बढ़ावा दें, उन पर चुनाव आयोग को सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट से अपील की गई है कि वह राज्य सरकार और अन्य संबंधित एजेंसियों को निर्देश दे ताकि संविधान की रक्षा की जा सके।

 सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की उम्मीद

इस मामले में याचिकाकर्ता को उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इस विवाद में हस्तक्षेप करेगा और संविधान के मूल सिद्धांतों की रक्षा करेगा। यदि कोर्ट इस पर कड़ा निर्णय लेता है तो यह न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश के लिए एक अहम मिसाल बनेगा। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हुई हैं।

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