मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में उस वक्त सियासी हलचल तेज हो गई जब देर रात विधानसभा सचिवालय के खुलने की खबर सामने आई। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी और इसे लेकर विपक्ष ने सत्तारूढ़ दल पर गंभीर आरोप लगाए।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष Jitu Patwari गुरुवार रात करीब 11 बजे अचानक विधानसभा पहुंच गए। उनके साथ पार्टी के अन्य नेता भी मौजूद थे। सचिवालय पहुंचते ही पटवारी सीधे प्रमुख सचिव Arvind Sharma के कक्ष में पहुंचे और इस पूरे मामले पर आपत्ति जताई।
पटवारी ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर देर रात सचिवालय खोला गया, ताकि कांग्रेस विधायक Rajendra Bharti की सदस्यता खत्म करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की जा रही है।
बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेताओं के पहुंचने के कुछ ही देर बाद सचिव कार्यालय से निकल गए, जिससे इस पूरे घटनाक्रम पर और भी सवाल खड़े हो गए हैं। कांग्रेस का कहना है कि यह सब कुछ गोपनीय तरीके से किया जा रहा था।
दरअसल, दतिया सीट से विधायक राजेंद्र भारती को हाल ही में एक पुराने धोखाधड़ी मामले में अदालत से तीन साल की सजा सुनाई गई है। यह मामला 1998 से 2011 के बीच बैंक रिकॉर्ड में हेराफेरी कर अवैध रूप से ब्याज लेने से जुड़ा है। कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए जुर्माना भी लगाया है।
कानूनी प्रावधानों के अनुसार, अगर किसी जनप्रतिनिधि को दो साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो उसकी सदस्यता रद्द की जा सकती है। ऐसे में राजेंद्र भारती की विधायकी पर खतरा मंडरा रहा है। हालांकि, उन्हें फिलहाल जमानत मिल गई है और उनके पास फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देने का विकल्प भी मौजूद है।
गौरतलब है कि राजेंद्र भारती ने 2023 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के वरिष्ठ नेता Narottam Mishra को हराकर जीत हासिल की थी।
इस पूरे मामले ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। अब देखना होगा कि आगे कानूनी और राजनीतिक स्तर पर क्या मोड़ आता है, और क्या वाकई इस मामले में कोई दबाव या असामान्य प्रक्रिया अपनाई गई थी।


