MP: मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के सालीचौका नगर क्षेत्र में इन दिनों पेट्रोल पंपों पर किसानों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के माहौल के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों में ईंधन की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। किसान डर रहे हैं कि आने वाले दिनों में डीजल, पेट्रोल और एलपीजी गैस की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इसी आशंका के चलते वे बड़ी मात्रा में ईंधन खरीदकर स्टॉक करने में जुटे हुए हैं।
गेहूं कटाई और मूंग बोनी से पहले डीजल की जरूरत
इस समय जिले में गेहूं की कटाई का सीजन शुरू होने वाला है और मूंग की बोनी की तैयारी भी जारी है। खेतों में हार्वेस्टर और अन्य कृषि यंत्रों के संचालन के लिए बड़ी मात्रा में डीजल की आवश्यकता पड़ती है। किसान चिंता में हैं कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है और ईंधन की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो डीजल-पेट्रोल के दाम बढ़ सकते हैं और यह उनकी खेती पर असर डाल सकता है। ऐसे में स्थानीय किसान हरसंभव एहतियात के तौर पर पहले से ही डीजल स्टॉक कर रहे हैं।

ड्रम, कुप्पे और टंकियों में ईंधन भरवाते किसान
सालीचौका के पेट्रोल पंपों पर किसान बड़े-बड़े ड्रम, कुप्पे और टंकियों में डीजल भरवाते नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि खेती का काम पूरी तरह ईंधन पर निर्भर है और किसी भी कमी या महंगाई से उनके काम में बाधा आ सकती है। कई किसान एलपीजी गैस की संभावित कमी को लेकर भी चिंतित हैं और पहले से ही सिलेंडर भरवाने में लगे हुए हैं। इस तरह की तैयारियां यह दर्शाती हैं कि ग्रामीण इलाकों में वैश्विक घटनाओं का असर सीधे स्थानीय स्तर पर महसूस किया जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय युद्ध का स्थानीय प्रभाव
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहा यह युद्ध स्थानीय किसानों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। लोग एहतियात के तौर पर ईंधन का भंडारण कर रहे हैं ताकि खेती का काम बिना किसी रुकावट के पूरा किया जा सके। कृषि गतिविधियों पर इसका असर पहले ही दिख रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक युद्ध का असर केवल तेल की कीमतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण इलाकों में किसानों की रोजमर्रा की जिंदगी और खेती पर भी असर डाल सकता है।


