MP News: मध्य प्रदेश में 13 SAS अधिकारियों को मिल सकता है IAS प्रमोशन बड़ा फैसला

MP News: मध्य प्रदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) के अधिकारियों के लिए बड़ी प्रशासनिक हलचल देखने को मिल रही है। राज्य सरकार ने SAS अधिकारियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में पदोन्नति देने की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। आने वाले समय में 13 राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारियों को IAS पद पर प्रमोशन मिलने की संभावना जताई जा रही है। इस फैसले को लेकर प्रशासनिक हलकों में उत्साह का माहौल है क्योंकि लंबे समय से अधिकारी इस पदोन्नति का इंतजार कर रहे थे।

13 पदों के लिए 39 अधिकारियों के नाम पर होगा मंथन

सूत्रों के अनुसार IAS अवार्ड के लिए जल्द ही विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में कुल 39 राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारियों के नामों पर विचार किया जाएगा, जिनमें से केवल 13 अधिकारियों का चयन किया जाएगा। हालांकि इस प्रक्रिया में Non-SAS अधिकारियों को इस बार भी मौका नहीं मिलेगा, जिससे उनके बीच निराशा का माहौल है। बताया जा रहा है कि राप्रसे संघ के विरोध के चलते यह प्रक्रिया केवल SAS अधिकारियों तक सीमित कर दी गई है, जिससे चयन प्रक्रिया पर भी चर्चा तेज हो गई है।

चयन सूची में शामिल प्रमुख अधिकारियों के नाम सामने आए

DPC बैठक के लिए जिन 39 अधिकारियों के नामों पर विचार किया जाएगा उनमें कई वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी शामिल हैं। इनमें इच्छित गढ़पाले, जयेंद्र कुमार विजयावत, डॉ. अभय सिंह खरारी, रजनीश कसेरा, एकता जायसवाल, हृदयेश कुमार श्रीवास्तव, लता शरणागत, महीप किशोर तेजस्वी, मिलिंद कुमार नागदेवे, राज कुमार खत्री सहित कई अन्य नाम शामिल हैं। इसके अलावा अभिषेक दुबे, प्रियंका गोयल, संदीप कुमार सोनी, माया अवस्थी, वर्षा सोलंकी, विशाल चौहान और सुरभि तिवारी जैसे नाम भी सूची में शामिल हैं। इन सभी नामों में से अंतिम 13 का चयन किया जाएगा, जिनका भविष्य IAS पदोन्नति पर निर्भर करेगा।

DPC बैठक पर टिकी निगाहें और प्रशासनिक हलचल

राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने पदोन्नति के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया है और अब सभी की निगाहें होने वाली DPC बैठक पर टिकी हुई हैं। इसी बैठक में तय होगा कि किन 13 अधिकारियों को IAS बनने का अवसर मिलेगा। हालांकि इस प्रक्रिया को लेकर Non-SAS अधिकारियों में असंतोष भी देखा जा रहा है क्योंकि उन्हें एक बार फिर से बाहर रखा गया है। प्रशासनिक हलकों में इसे एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है जो आने वाले समय में राज्य की नौकरशाही संरचना को प्रभावित कर सकता है।

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