MP News: भोपाल में लोकायुक्त संगठन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। मंगलवार, 17 मार्च 2026 को लोकायुक्त पुलिस ने एक बड़ी ट्रैप ऑपरेशन के दौरान मध्य प्रदेश हाउसिंग एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड के डाटा एंट्री ऑपरेटर ज्ञानेंद्र कुमार पटेल को ₹5,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई एक शिकायत के बाद की गई, जिसमें शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि पटेल ने लीज़ रिन्यूअल के लिए रिश्वत की मांग की थी।
शिकायत और ट्रैप ऑपरेशन का विवरण
शिकायतकर्ता दूधनाथ शुक्ला, जो सुलतानाबाद के निवासी हैं, ने लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके परिवार के नाम पर 1993 में आवंटित ईडब्ल्यूएस हाउस की लीज़ रिन्यूअल के लिए ज्ञानेंद्र पटेल ने ₹10,000 की रिश्वत की मांग की थी। लोकायुक्त टीम ने शिकायत को सत्यापित किया और आरोपी को रंगे हाथों पकड़ने की योजना बनाई। 17 मार्च को जैसे ही शिकायतकर्ता ने पहले किश्त के रूप में ₹5,000 सौंपे, टीम ने तत्काल छापेमारी कर आरोपी को गिरफ्तार किया।
घटना स्थल और कानूनी कार्रवाई
यह ट्रैप ऑपरेशन हाउसिंग बोर्ड के गोमांटिका कॉम्प्लेक्स स्थित कार्यालय में संपन्न हुआ, जहां आरोपी ज़ोन-1 के एस्टेट ब्रांच में कार्यरत था। लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया। मौके से रिश्वत की राशि जब्त की गई और आगे की जांच जारी है। ऑपरेशन का नेतृत्व डीजी लोकायुक्त योगेश देशमुख के निर्देश पर किया गया, जो राज्य में “ज़ीरो टॉलरेंस” नीति लागू कर चुके हैं।
लोकायुक्त का संदेश और आम जनता के लिए अपील
इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया कि रिश्वतखोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लोकायुक्त ने आम जनता से अपील की है कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत की मांग करता है तो तुरंत 1064 टोल-फ्री नंबर पर शिकायत करें। शिकायतकर्ता दूधनाथ शुक्ला ने कहा, “सेवानिवृत्त होने के बावजूद मुझे रिश्वत देने के लिए मजबूर किया जा रहा था, लेकिन अब न्याय मिला।” यह गिरफ्तारी केवल एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की सफाई की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


