MP News: मध्यप्रदेश भाजपा में संगठनात्मक फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर चल रहा असमंजस अब लगभग समाप्त होने की कगार पर है। पार्टी सूत्रों की मानें तो 1 जुलाई 2025 को भोपाल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के नाम की औपचारिक घोषणा की जा सकती है। इस दिन केंद्रीय चुनाव अधिकारी और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की भोपाल यात्रा प्रस्तावित है।
भाजपा इस बार प्रदेश अध्यक्ष पद पर महिला या आदिवासी चेहरे को मौका देने की तैयारी में है। यह केवल एक संगठनात्मक निर्णय नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक-सामाजिक संदेश भी हो सकता है। चूंकि इस वक्त प्रदेश में कोई तत्काल चुनाव नहीं है, ऐसे में भाजपा संगठन अपने सामाजिक आधार को मज़बूत करने के लिए महिला सशक्तिकरण और आदिवासी प्रतिनिधित्व जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित कर सकती है।
क्यों ज़रूरी है नेतृत्व परिवर्तन?
पिछले छह महीने से मप्र भाजपा के अध्यक्ष पद को लेकर कई नामों पर मंथन चल रहा था, लेकिन सहमति नहीं बन पाने के कारण मामला लंबित था। सूत्रों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद बनी स्थिति और संगठनात्मक प्राथमिकताओं के कारण यह निर्णय टलता रहा। लेकिन अब जब हालात सामान्य हैं और केंद्र से लेकर प्रदेश तक सत्ता भाजपा के पास है, तो पार्टी इस बदलाव को देर नहीं करना चाहती।
इन नामों पर मंथन तेज:
महिला चेहरे:
•अर्चना चिटनीस (पूर्व मंत्री, खंडवा)
•लता बनखेड़े (अनुसूचित जाति वर्ग से, संगठन में मजबूत पकड़)
•संध्या राय (अनुभव और सामाजिक समरसता की पहचान)
•संपतिया उइके (राज्यसभा सांसद, आदिवासी समुदाय से)
•सावित्री ठाकुर, माया नरौलिया, कविता पाटीदार — ये भी सूची में शामिल हैं, जो क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साध सकती हैं।
आदिवासी चेहरे:
•गजेंद्र पटेल (खरगोन सांसद, मजबूत लोकसभा प्रदर्शन)
•फग्गन सिंह कुलस्ते (पूर्व केंद्रीय मंत्री, आदिवासी समाज में मजबूत पकड़)
•सुमेर सिंह सोलंकी (राज्यसभा सांसद, संगठन से जुड़े)
•कुंवर सिंह टेकाम, दुर्गादास उइके (भाजपा के आदिवासी मोर्चा में सक्रिय)
अन्य दावेदार:
•हेमंत खंडेलवाल (बैतूल के पूर्व सांसद)
•लाल सिंह आर्य (SC मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष)
भाजपा का उद्देश्य – संदेश और संतुलन
भाजपा जानती है कि नेतृत्व में कोई भी चयन केवल संगठनात्मक नहीं होता, वह सीधे जनता तक एक राजनीतिक-सामाजिक संदेश भी पहुंचाता है। महिला अध्यक्ष बनाकर भाजपा यह संदेश देना चाहती है कि वह महिलाओं को नेतृत्व में प्राथमिकता देती है, वहीं आदिवासी अध्यक्ष के ज़रिए पार्टी अपने सबसे पुराने मतदाता आधार को साधना चाहती है, जो 2023 विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की ओर झुका था।
मध्यप्रदेश में 22 प्रतिशत आदिवासी और लगभग 49% महिला मतदाता हैं। भाजपा की नज़र 2028 विधानसभा और 2029 लोकसभा चुनावों के दीर्घकालिक समीकरणों पर है।
दिल्ली दरबार में अंतिम निर्णय
सूत्रों के अनुसार भाजपा का शीर्ष नेतृत्व — राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृहमंत्री अमित शाह, संगठन महामंत्री बीएल संतोष, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्तर पर इन नामों पर अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है। दिल्ली में लगातार बैठकों और चर्चा के दौर जारी हैं। मध्यप्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह और सह-प्रभारी सतीश उपाध्याय भी इस चयन प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
सार्वजनिक संकेत क्या कहते हैं?
हाल के दिनों में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कई कार्यक्रमों में महिला और जनजातीय प्रतिनिधियों के साथ मंच साझा किया है। प्रदेश भाजपा के आंतरिक सर्वे में भी यह बात सामने आई है कि संगठन के भीतर महिलाओं और युवाओं को ज़िम्मेदारी दिए जाने की माँग तेजी से उठ रही है।
क्या हो सकता है आगे?
•30 जून या 1 जुलाई को आधिकारिक चुनाव कार्यक्रम जारी होगा।
•नए अध्यक्ष की घोषणा धर्मेंद्र प्रधान की मौजूदगी में हो सकती है।
•अध्यक्ष का कार्यकाल अगले तीन वर्ष का होगा — संगठनात्मक और चुनावी दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण।
मध्यप्रदेश भाजपा के लिए यह नेतृत्व परिवर्तन केवल आंतरिक सुधार नहीं, बल्कि एक गहरे राजनीतिक अर्थ वाला निर्णय साबित हो सकता है। चाहे वह महिला हो या आदिवासी चेहरा, भाजपा जिस भी नाम पर मुहर लगाएगी, वह पार्टी की आगामी राजनीति का रोडमैप तय करेगा।


