MP news: छतरपुर बना जल का द्वीप! बारिश से बेहाल जनजीवन, कहां मिलेगा राहत?

MP news: छतरपुर जिले में लगातार दो दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने पिछले 30 से 35 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। सिर्फ दो दिनों में जिले में 22 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। 1 जून से 18 जुलाई के बीच कुल 42.3 इंच बारिश हो चुकी है जो औसत वर्षा के बराबर है। मौसम विभाग के मुताबिक यह बारिश सामान्य से कहीं अधिक है।

बिजावर में सर्वाधिक बारिश, खेत और घरों में भरा पानी

जिले के विभिन्न क्षेत्रों में वर्षा की तीव्रता अलग-अलग रही लेकिन सभी स्थानों पर सामान्य से अधिक पानी गिरा है। बिजावर में सबसे ज्यादा 44.9 इंच बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा बड़ामलहरा में 42 इंच, नौगांव में 36.5 इंच, गौरिहार में 33.8 इंच, राजनगर में 29.6 इंच, बकस्वाहा में 24.4 इंच और लवकुशनगर में 22.9 इंच वर्षा हुई है। तेज बारिश के चलते खेतों में पानी भर गया है और कई इलाकों में तो घरों के अंदर तक पानी घुस गया है।

MP news: छतरपुर जिले में लगातार दो दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने पिछले 30 से 35 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। सिर्फ दो दिनों में जिले में 22 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। 1 जून से 18 जुलाई के बीच कुल 42.3 इंच बारिश हो चुकी है जो औसत वर्षा के बराबर है। मौसम विभाग के मुताबिक यह बारिश सामान्य से कहीं अधिक है।

बाढ़ जैसे हालात, जनजीवन प्रभावित, स्कूल बंद

बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है। कई जगहों पर बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। जलभराव के कारण सड़कों पर आवागमन बाधित है और प्रशासन ने एहतियात के तौर पर स्कूलों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में हालत और भी ज्यादा खराब है जहां खेतों में फसलें पूरी तरह डूब गई हैं और ग्रामीणों के घरों में घुटनों तक पानी भर गया है।

जल स्रोत उफान पर, प्रशासन अलर्ट पर

लगातार बारिश के चलते जिले के लगभग सभी जल स्रोत उफान पर हैं। तालाबों, नालों और नदियों का जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है। जिला प्रशासन ने राहत एवं बचाव टीमों को सतर्क कर दिया है। जलभराव वाले इलाकों में नाव और जेसीबी मशीनें तैनात की गई हैं ताकि आपात स्थिति में राहत कार्यों को तेजी से अंजाम दिया जा सके।

पिछले साल से कई गुना अधिक बारिश

इस बार की बारिश पिछले साल के मुकाबले कई गुना ज्यादा हो चुकी है। जहां पिछले साल जुलाई तक इतनी वर्षा नहीं हुई थी वहीं इस बार आधे जुलाई तक ही औसत आंकड़ा पार हो चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मौसम बदलाव का संकेत है और इससे फसलों और जनस्वास्थ्य दोनों पर प्रभाव पड़ेगा। प्रशासन लोगों से अपील कर रहा है कि वे जलजमाव वाले क्षेत्रों से दूर रहें और किसी भी आपदा की स्थिति में प्रशासन को तुरंत सूचित करें।

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