MP News: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के सिमरिया के पास हुए बस हादसे में पुलिसकर्मियों ने जिस साहस और तत्परता का परिचय दिया उसने पूरे प्रदेश को गर्व महसूस कराया है। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में सुरक्षा ड्यूटी से लौट रहे PTS रीवा के जवानों ने जैसे ही दुर्घटना देखी वे बिना समय गंवाए मौके पर पहुंच गए। हालात बेहद खतरनाक थे क्योंकि सड़क पर कांच के टुकड़े बिखरे हुए थे और बस पलटी हुई थी। इसके बावजूद जवान बिना जूते पहने कांच और मलबे के बीच दौड़ पड़े और राहत कार्य शुरू कर दिया। उनकी इस त्वरित प्रतिक्रिया ने कई लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बिना जूते कांच पर दौड़े जवान और शुरू किया बचाव कार्य
जैसे ही जवानों ने हादसा देखा वे तुरंत अपने वाहन से उतरकर घटनास्थल की ओर दौड़े। किसी ने जूते पहनने का इंतजार नहीं किया और न ही किसी प्रकार की सावधानी की परवाह की। सड़क पर फैले कांच के टुकड़ों और पत्थरों के बीच से गुजरते हुए वे सीधे बस तक पहुंचे। वहां उन्होंने पहले स्थिति का आकलन किया और तुरंत राहत कार्य शुरू किया। कुछ जवान घायलों को बाहर निकालने में जुट गए जबकि अन्य ने आसपास के लोगों को मदद के लिए निर्देशित किया। उनकी इस तेजी और समर्पण ने राहत कार्य को संगठित और प्रभावी बना दिया।
हाथों से उठाई पलटी बस और बचाई कई जिंदगियां
घटनास्थल पर पहुंचकर पुलिसकर्मियों ने सबसे पहले डायल 112 को सूचना दी और फिर सामूहिक रूप से बचाव अभियान शुरू किया। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि जवानों ने अपने हाथों के जोर से पलटी हुई बस को लगभग तीन फीट तक उठाया। इस साहसिक प्रयास के चलते बस के नीचे फंसे लोगों को बाहर निकालना संभव हो सका। घायल यात्रियों को तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया गया जहां उनका इलाज शुरू हुआ। इस रेस्क्यू ऑपरेशन में पुलिस की तत्परता और टीमवर्क के कारण करीब 40 लोगों की जान बचाई जा सकी। यह घटना आपदा प्रबंधन में पुलिस की भूमिका का एक उत्कृष्ट उदाहरण बन गई है।
मुख्यमंत्री ने की सराहना और 113 जवानों को मिला इनाम
इस पूरे घटनाक्रम की प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सराहना की है। उन्होंने पुलिसकर्मियों के साहस और सेवा भाव को सलाम करते हुए 113 अधिकारियों और कर्मचारियों को नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है। पुलिस मुख्यालय द्वारा भी इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है। यह सम्मान न केवल उन जवानों के लिए प्रेरणा है जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की जान बचाई बल्कि पूरे पुलिस बल के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वर्दी केवल अनुशासन का प्रतीक नहीं बल्कि संकट के समय समाज की सबसे मजबूत ढाल है।


