MP News: इंदौर-बैतूल से चुपचाप लाए गए बच्चे, आयोग को भी नहीं दी जानकारी! बड़ा रैकेट बेनकाब?

MP News: मध्यप्रदेश के सागर जिले में स्थित ‘घरौंदा आश्रम’ से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस आश्रम में रहने वाले शारीरिक और मानसिक रूप से अक्षम बच्चों से जबरन भीख मंगवाने की बात सामने आई है। यह खुलासा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की जांच में हुआ है। जांच में पाया गया कि इस आश्रम में सिर्फ बच्चे ही नहीं बल्कि बुजुर्ग और अन्य बेसहारा लोग भी रहते हैं और इन सभी से शहर के मंदिरों व भीड़-भाड़ वाली जगहों पर भीख मंगवाई जाती है।

राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य ओंकार सिंह द्वारा सागर जिला कलेक्टर को सौंपी गई रिपोर्ट में और भी गंभीर खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आश्रम के एक बच्चे की मौत के बाद उसका शव बिना प्रशासनिक अनुमति के किसी संस्था को दान कर दिया गया। यह न सिर्फ संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है बल्कि कानून का खुला उल्लंघन भी है। आयोग ने इस मामले को किशोर न्याय अधिनियम का सीधा उल्लंघन माना है और ‘घरौंदा आश्रम’ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है।

MP News: इंदौर-बैतूल से चुपचाप लाए गए बच्चे, आयोग को भी नहीं दी जानकारी! बड़ा रैकेट बेनकाब?

इंदौर और बैतूल से लाए गए बच्चे, समिति को जानकारी तक नहीं

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि इस आश्रम में इंदौर और बैतूल जिलों से लड़के-लड़कियों को लाया गया था, लेकिन इस प्रक्रिया की सूचना संबंधित जिलों की चाइल्ड वेलफेयर कमेटियों को नहीं दी गई। यह न सिर्फ प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन है बल्कि बच्चों की सुरक्षा से भी खिलवाड़ है। आयोग को यह भी संदेह है कि इन बच्चों को गैरकानूनी गतिविधियों में झोंका जा रहा है और मानवीय तस्करी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

दिव्यांगों से कराया जा रहा बाल श्रम, मानव तस्करी की आशंका

रिपोर्ट में एक और खतरनाक बात सामने आई है कि इस आश्रम में रहने वाले दिव्यांग बच्चों से जबरन श्रम करवाया जा रहा है। उन्हें साफ-सफाई, खाना पकाने और अन्य भारी कामों में लगाया जाता है। आयोग का कहना है कि यह मामला केवल बाल अधिकारों के उल्लंघन का नहीं, बल्कि मानवीय तस्करी का भी हो सकता है। इसलिए उन्होंने सघन जांच की सिफारिश की है और संबंधित विभागों से सतर्क रहने को कहा है।

‘घरौंदा आश्रम’ एक एनजीओ द्वारा संचालित किया जा रहा है लेकिन अब उस पर गंभीर आरोप लग चुके हैं। जांच में कई नियमों का उल्लंघन सामने आया है। आयोग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का नहीं बल्कि एक संगठित अपराध की तरह सामने आ रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस रिपोर्ट पर क्या सख्त कदम उठाता है और दोषियों को कब तक कानून के कठघरे में लाया जाता है।

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