MP News: नरसिंहपुर में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस ने बड़ा सफलता हासिल की है। पुलिस ने एक संगठित गैंग का पर्दाफाश किया, जो आम नागरिकों के बैंक खातों का उपयोग “म्यूल अकाउंट” के रूप में करके करोड़ों रुपये का साइबर फ्रॉड कर रहा था। जांच में पता चला कि यह गैंग लगभग 180 अलग-अलग खातों के माध्यम से 15 करोड़ रुपये से अधिक के अवैध लेनदेन में शामिल था। इस मामले में 17 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
फर्जी वादों के जरिए बैंक खाते हासिल किए गए
जांच में खुलासा हुआ कि गैंग के सदस्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रहने वाले भोले-भाले लोगों को आर्थिक लाभ का लालच देकर फंसाते थे। आरोपियों का कहना था कि खाते सीमित समय के लिए इस्तेमाल होंगे और बदले में उन्हें नकद भुगतान किया जाएगा। खाते खुलने के बाद पासबुक, एटीएम कार्ड और मोबाइल नंबर भी आरोपियों के पास चले जाते थे। इसके बाद साइबर फ्रॉड के जरिए प्राप्त राशि इन खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी।
ऑनलाइन गेमिंग और सेक्सटॉर्शन के जरिए पैसा धोना
पुलिस के अनुसार गैंग इन “म्यूल अकाउंट्स” का उपयोग ऑनलाइन गेमिंग, सेक्सटॉर्शन और अन्य साइबर फ्रॉड के जरिए प्राप्त धन को धोने के लिए करता था। फ्रॉड के पैसे इन खातों में जमा किए जाते और फिर अन्य खातों में ट्रांसफर या नकद निकाले जाते। कई मामलों में इन पैसों को ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म में जमा कर वैध दिखाने का प्रयास किया गया। पुलिस ने इस दौरान 9 पासबुक, 4 एटीएम कार्ड और 9 मोबाइल फोन जब्त किए। इसके साथ ही 35 म्यूल अकाउंट्स को बंद कराया गया।
साइबर अपराध पर जारी सख्त अभियान
इस मामले के तहत पुलिस ने संबंधित बैंकों को निर्देश दिया है कि अन्य संदिग्ध खातों पर निगरानी रखें और जरूरत पड़ने पर फ्रीज कर दें। नरसिंहपुर पुलिस पिछले एक साल से साइबर अपराधों पर लगातार कार्रवाई कर रही है। अब तक लगभग 45 लाख रुपये के संदिग्ध फंड को रोका गया है और 53 लाख रुपये की ठगी को पीड़ितों को लौटाया गया है। साइबर सेल और क्षेत्रीय थानों के SHO इस ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। पुलिस ने चेतावनी दी है कि साइबर अपराध के खिलाफ यह कार्रवाई भविष्य में भी जारी रहेगी।


