MP News: छतरपुर में पुलिस हिरासत में युवक की मौत, आत्महत्या या मारपीट सच्चाई जांच के घेरे में

MP News: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। राजनगर थाना परिसर में पुलिस हिरासत के दौरान 22 वर्षीय युवक की लाश फांसी के फंदे पर लटकी मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान राजेश पटेल के रूप में हुई है। पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला प्रतीत होता है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कोई सुसाइड नोट बरामद हुआ है या नहीं। घटना सामने आते ही प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।

सुबह हिरासत और शाम को मौत की सूचना

मृतक के पिता किशोरी लाल का आरोप है कि शनिवार सुबह करीब दस बजे दो पुलिसकर्मी उनके बेटे राजेश को घर से थाने ले गए थे। यह कार्रवाई बिना किसी लिखित नोटिस या स्पष्ट कारण के की गई। परिवार का कहना है कि शाम तक जब वे बेटे की खबर का इंतजार कर रहे थे तब अचानक उसकी मौत की सूचना दी गई। सूचना मिलते ही परिवार और रिश्तेदार स्तब्ध रह गए। आरोप है कि पुलिस हिरासत में राजेश के साथ मारपीट की गई जिससे उसकी मौत हुई। परिवार इस दावे को पूरी मजबूती से रख रहा है।

MP News: छतरपुर में पुलिस हिरासत में युवक की मौत, आत्महत्या या मारपीट सच्चाई जांच के घेरे में

पैसों की मांग और गंभीर आरोप

परिजनों का आरोप है कि राजेश को छोड़ने के बदले उनसे पचास हजार रुपये की मांग की गई थी। गांव वालों की मदद से जब वे पैसे जुटाने की कोशिश कर रहे थे तभी बेटे की मौत की खबर आ गई। परिवार ने साफ कहा है कि राजेश ने आत्महत्या नहीं की बल्कि पुलिस की पिटाई से उसकी जान गई है। यह भी आरोप लगाया गया कि जिस पुलिसकर्मी ने युवक को पकड़ा वह उस समय ड्यूटी पर भी नहीं था। हैरानी की बात यह रही कि युवक का शव उस कमरे के वॉशरूम में मिला जहां महिला और बच्चों की सुनवाई होती है।

जांच शुरू, पुलिसकर्मी निलंबित

घटना की सूचना मिलते ही एसपी आगम जैन और मजिस्ट्रेट मौके पर पहुंचे। एफएसएल टीम ने जांच शुरू की और पूरे थाना परिसर को सील कर अतिरिक्त बल तैनात किया गया। स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया और बड़ी संख्या में लोग थाने के बाहर जमा होकर प्रदर्शन करने लगे। नारेबाजी के बीच पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए गए। एसपी आगम जैन ने कहा कि मजिस्ट्रियल जांच शुरू कर दी गई है और पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल द्वारा वीडियोग्राफी के साथ कराया जाएगा। परिवार के आरोपों के आधार पर दो आरक्षकों को निलंबित कर दिया गया है और प्रारंभिक जांच एसडीओपी को सौंपी गई है। पुलिस का कहना है कि एक महिला की शिकायत पर युवक को पूछताछ के लिए लाया गया था। जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई सामने आ सकेगी।

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