MP News: मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिज़र्व में पर्यटकों को अपनी पीठ पर बैठाकर बाघ दिखाने वाले हाथियों को अब एक नई पहचान मिलने जा रही है। जी हां बिल्कुल इंसानों की तरह अब इन हाथियों को भी पहचान पत्र यानी यूनिक आईडी मिलने वाला है। इन हाथियों की पहचान के लिए एक विशेष आईडी नंबर तैयार किया जाएगा जिसमें उनके फोटो से लेकर डीएनए तक की जानकारी शामिल होगी। यह पहल भारत सरकार और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा शुरू की गई है ताकि हाथियों के संरक्षण और देखरेख को और बेहतर बनाया जा सके।
डीएनए से तय होगी पहचान और मिलेगा यूनिक आईडी
कान्हा टाइगर रिज़र्व के उप संचालक पुनीत गोयल ने बताया कि यह यूनिक आईडी हाथियों के लिए एक तरह से उनकी जेनेटिक प्रोफाइल होगी। इसमें उनके शरीर का पूरा विवरण होगा जैसे कि उनका वजन, ऊंचाई, आयु, माइक्रोचिप डाटा और सबसे खास उनका डीएनए प्रोफाइल। इस काम के लिए वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को अधिकृत किया गया है। हाथियों के खून और मल के सैंपल लिए जा रहे हैं और उन्हें डीएनए परीक्षण के लिए भेजा जा रहा है ताकि हर हाथी की पहचान को हमेशा के लिए सुरक्षित रखा जा सके।

स्वास्थ्य और सुरक्षा पर भी रखी जाएगी नजर
इस पहल का एक और उद्देश्य यह भी है कि सभी हाथियों की सेहत पर नजर रखी जाए और उनके प्रजनन के तरीके को भी मॉनिटर किया जा सके। कान्हा टाइगर रिज़र्व के पशु चिकित्सक डॉ संदीप अग्रवाल का कहना है कि इस यूनिक आईडी से न केवल हाथियों की पहचान सुनिश्चित होगी बल्कि उनके एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजे जाने के समय भी उनकी निगरानी आसान हो जाएगी। साथ ही इससे यह भी तय किया जा सकेगा कि कहीं किसी हाथी का गलत उपयोग या अवैध व्यापार तो नहीं हो रहा है।
संरक्षण में आएगी पारदर्शिता और मजबूती
यह पूरी प्रक्रिया न केवल कान्हा टाइगर रिज़र्व बल्कि देशभर में हाथियों के संरक्षण को एक नई दिशा देगी। पहचान पत्र से यह भी सुनिश्चित होगा कि जंगलों में रह रहे हाथियों और पर्यटन के लिए उपयोग किए जाने वाले हाथियों में अंतर किया जा सके। इस तकनीक के जरिए हाथियों की अदला-बदली, बीमारियों का इलाज, और उनके उम्र के अनुसार पोषण की निगरानी भी आसान होगी। आने वाले समय में यह यूनिक आईडी हाथियों की सुरक्षा की गारंटी बन जाएगी और देश के अन्य टाइगर रिज़र्व में भी इस मॉडल को अपनाया जा सकता है।


