MP News: भोजशाला विवाद पर हाई कोर्ट में सुनवाई शुरू एएसआई रिपोर्ट से बढ़ा मामला

MP News: मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक Bhojshala के धार्मिक स्वरूप को लेकर विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। इस मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी Archaeological Survey of India की रिपोर्ट के आधार पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सोमवार से नियमित सुनवाई शुरू हुई। याचिकाकर्ता हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से दलील दी गई कि भोजशाला का मूल स्वरूप कभी मस्जिद का नहीं रहा है और यह तथ्य एएसआई की रिपोर्ट में भी सामने आया है। मामले की सुनवाई करीब दो घंटे तक चली और मंगलवार को भी जारी रहने की संभावना है।

पूजा और नमाज को लेकर पक्षों के तर्क

सुनवाई के दौरान एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने वर्ष 2003 के आदेश में संशोधन की मांग उठाई। उनका कहना है कि वर्तमान में हिंदू पक्ष को केवल मंगलवार को पूजा की अनुमति दी गई है जो उचित नहीं है। उन्होंने कोर्ट से मांग की कि भोजशाला में 24 घंटे पूजा की अनुमति दी जाए और नमाज पर पूरी तरह से रोक लगाई जाए। उनके अनुसार यह स्थल राष्ट्रीय महत्व की संरक्षित धरोहर है और इसके धार्मिक स्वरूप के विपरीत कोई गतिविधि नहीं होनी चाहिए। सुनवाई के दौरान इन तर्कों पर विस्तार से बहस हुई और दोनों पक्षों की दलीलों को सुना गया।

भोजशाला को राष्ट्रीय धरोहर बताते हुए ऐतिहासिक दावे

एडवोकेट जैन ने अपनी दलीलों में कहा कि भोजशाला को राष्ट्रीय महत्व की संरक्षित धरोहर के रूप में मान्यता प्राप्त है और इसके साथ किसी भी प्रकार का बदलाव कानून के विरुद्ध होगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि अगस्त 1935 से पहले तक यहां नमाज पढ़ने का कोई प्रमाण नहीं मिलता। उनके अनुसार संरक्षित स्थल होने के बावजूद इसके मूल स्वरूप को बनाए रखने के बजाय बाद में इसमें बदलाव किए गए और नमाज की अनुमति दी गई। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर भोजशाला का मूल स्वरूप एक सांस्कृतिक और शैक्षणिक केंद्र रहा है।

ऐतिहासिक प्रतिमाओं और साक्ष्यों का उल्लेख

सुनवाई के दौरान एडवोकेट जैन ने 1875 का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय धार से वाग्देवी और अंबा देवी की प्रतिमाएं लंदन ले जाई गई थीं, जो वर्तमान में वहां के संग्रहालय में रखी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि स्वतंत्रता के बाद पुरातत्वविद विष्णु श्रीधर वाकणकर ने लंदन जाकर इन प्रतिमाओं की पुष्टि की थी और उन्हें वापस लाने के प्रयास भी किए गए थे। इसके साथ ही उन्होंने कोर्ट में फोटोग्राफ और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए दावा किया कि भोजशाला मूल रूप से सरस्वती मंदिर या सरस्वती सदन था, जहां संस्कृत शिक्षा दी जाती थी। एएसआई की रिपोर्ट और प्रस्तुत साक्ष्यों को उन्होंने अपने पक्ष के समर्थन में महत्वपूर्ण आधार बताया।

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