MP News: भोपाल, मध्य प्रदेश की राजधानी, हमेशा किसी न किसी चौंकाने वाली घटना के कारण सुर्खियों में रहती है। हाल ही में करोंड क्षेत्र के विनायक कॉलोनी में एक हाई-वोल्टेज टॉवर ने स्थानीय निवासियों के लिए परेशानी खड़ी कर दी है। टॉवर की ऊँचाई और चौड़ाई इतनी कम है कि भारी वाहनों के गुजरने में कठिनाई होती है। इससे न सिर्फ ट्रैफिक प्रभावित होता है, बल्कि बिजली के झटके का खतरा भी बना रहता है। बारिश के मौसम में इस सड़क पर निकलना आम लोगों के लिए बेहद डरावना हो जाता है।
बारिश में खतरे का द्विगुणित प्रभाव
स्थानीय लोग बताते हैं कि बारिश के दौरान हाई-वोल्टेज टॉवर के नीचे से गुजरना और भी खतरनाक हो जाता है। ऊपर से गुजर रही बिजली की लाइन और नीचे संभावित इलेक्ट्रिक शॉक का खतरा लोगों को डरा देता है। नागरिकों का कहना है कि इस टॉवर के कारण हर साल एक या दो लोग मौत के शिकार हो जाते हैं। बावजूद इसके जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे निवासियों में प्रशासन के प्रति नाराजगी और बढ़ती जा रही है।

20 साल का लंबित मसला: टॉवर बना हुआ, सड़क नहीं
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या लगभग 20 वर्षों से बनी हुई है। इस अवधि में न तो सड़क का निर्माण ठीक से हुआ और न ही खतरनाक हाई-वोल्टेज टॉवर को हटाया गया। लगातार शिकायतों के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला, जिससे जनता का धैर्य समाप्त होने लगा है। लोग प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हैं और मांग कर रहे हैं कि जल्द से जल्द इस मामले में कार्रवाई की जाए।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और पिछला उदाहरण
भाजपा के प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा कि मामला उनके ध्यान में आया है और विभाग इसकी जांच कर रहा है। कांग्रेस नेता शाहरीर खान ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले 90-डिग्री ब्रिज और अब यह टॉवर, मध्य प्रदेश सरकार इंजीनियरिंग में नए रिकॉर्ड बना रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। गौरतलब है कि भोपाल के ऐशबाग क्षेत्र में 2025 में बने 648 मीटर लंबे 90-डिग्री शार्प टर्न वाले रेलवे ओवरब्रिज (ROB) ने भी सुरक्षा और डिजाइन दोषों के कारण सुर्खियां बटोरी थीं।


