MP News: भारतीय सेना को मिली नई ताकत प्रहरी मशीन गनों की पहली खेप सौंपी गई

MP News: भारतीय सेना की युद्ध क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। सेना को 7.62 मिमी कैलिबर की ‘प्रहरी’ लाइट मशीन गनों की पहली खेप सौंपी गई है। इस पहली खेप में कुल दो हजार आधुनिक हथियार शामिल हैं जो अब सेना के इस्तेमाल के लिए तैयार हैं। यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि इन हथियारों का निर्माण पूरी तरह देश में ही किया गया है। इससे न केवल सेना की ताकत बढ़ेगी बल्कि देश की रक्षा उत्पादन क्षमता को भी मजबूती मिलेगी। इस कदम को भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति की दिशा में एक अहम उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

मेक इन इंडिया के तहत स्वदेशी निर्माण की बड़ी सफलता

इन ‘प्रहरी’ मशीन गनों का निर्माण Adani Defence and Aerospace ने ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत किया है। कंपनी ने इस परियोजना में बड़ी सफलता हासिल करते हुए निर्धारित समय से पहले ही हथियारों की पहली खेप तैयार कर ली। जानकारी के अनुसार कुल चालीस हजार मशीन गनों की आपूर्ति का ऑर्डर दिया गया था जिसमें यह पहली खेप शामिल है। इन हथियारों का निर्माण ग्वालियर के पास मालानपुर स्थित स्मॉल आर्म्स कॉम्प्लेक्स में किया गया है। इस परियोजना ने देश में रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में नई संभावनाओं को जन्म दिया है और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा दिया है।

निर्धारित समय से पहले डिलीवरी और आगे की योजना

शनिवार को एक औपचारिक कार्यक्रम के दौरान इन मशीन गनों को सेना को सौंपा गया। इस अवसर पर रक्षा मंत्रालय के अधिकारी ए अम्बारासु और कंपनी के सीईओ आशीष राजवंशी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान पहली खेप को लेकर ट्रकों के काफिले को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। कंपनी के अनुसार यह डिलीवरी तय समय से लगभग ग्यारह महीने पहले पूरी कर ली गई है। कंपनी का कहना है कि पूरी परियोजना को पूरा करने के लिए उन्हें सात साल से अधिक का समय दिया गया था लेकिन अब पूरा ऑर्डर अगले तीन वर्षों के भीतर पूरा करने की योजना है। यह तेज गति से काम करने की क्षमता को भी दर्शाता है।

‘प्रहरी’ मशीन गनों की खासियत और सेना को मिलेगा फायदा

नई ‘प्रहरी’ लाइट मशीन गन आधुनिक तकनीक से लैस हैं जो सैनिकों को युद्ध के दौरान अधिक सटीकता और बेहतर मारक क्षमता प्रदान करेंगी। इनका वजन अपेक्षाकृत कम है जिससे इन्हें कठिन और दुर्गम इलाकों में आसानी से ले जाया जा सकता है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के स्वदेशी हथियारों का निर्माण भारत को आत्मनिर्भर बनाने के साथ साथ सेना की ऑपरेशनल क्षमता को भी मजबूत करेगा। यह कदम देश की रक्षा तैयारियों को और सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और भविष्य में विदेशी हथियारों पर निर्भरता को कम करने में मदद करेगा।

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