MP News: विक्रमादित्य के आदर्शों से प्रेरित मध्यप्रदेश में 139 दिवसीय विक्रमोत्सव-2026 का आयोजन

MP News: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नव संवत्सर की बधाई देते हुए कहा कि यह वर्ष प्रदेश की प्रगति, समृद्धि और नई उपलब्धियों का वर्ष सिद्ध होगा। उन्होंने उज्जैन में वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ पर्व की तैयारियों का उल्लेख करते हुए बताया कि सभी कार्यक्रम सुचारू रूप से प्रगति पर हैं। इसके साथ ही श्रीराम वनगमन पथ और श्रीकृष्ण पाथेय जैसी योजनाओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ा जा रहा है। सीएम ने कहा कि नव संवत्सर हमारी सांस्कृतिक चेतना और प्राकृतिक जीवन पद्धति का प्रतीक है।

विक्रमादित्य की प्रेरणा और मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक चेतना

सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वर्ष 2083 का शुभारंभ विक्रम संवत् से हुआ है, जिसकी शुरुआत उज्जयिनी से हुई। उन्होंने सम्राट विक्रमादित्य के न्यायप्रिय शासन, पराक्रम और ज्ञानशीलता का जिक्र किया। सम्राट विक्रमादित्य ने विदेशी आक्रांताओं को पराजित कर भारतीय संस्कृति और राष्ट्र की अस्मिता को संरक्षित किया। उनके सुशासन के आदर्श आज भी प्रशासन और शासन के लिए प्रेरणा हैं। इसके प्रचार के लिए मध्यप्रदेश में विक्रमोत्सव-2026 का आयोजन किया जा रहा है जो 12 फरवरी से 30 जून तक 139 दिनों तक चलेगा। इस उत्सव में सम्राट के जीवन और उपलब्धियों को विभिन्न सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और बौद्धिक कार्यक्रमों के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया जाएगा।

कृषि कल्याण और विकास के नए संकल्प

सीएम ने बताया कि नवसंवत्सर के अवसर पर मध्यप्रदेश में कृषक कल्याण वर्ष के रूप में योजनाएं लागू की गई हैं। कृषि प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसान इसकी आधारशिला हैं। इस वर्ष पहली कृषि कैबिनेट बैठक बड़वानी जिले के भीलट बाबा देवस्थल में हुई, जिसमें 27,500 करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी दी गई। इसके तहत आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, प्राकृतिक खेती और कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन पर जोर दिया गया। सीएम ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने और कृषि आधारित उद्योगों के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

पर्यावरण संरक्षण और नवसृजन का संदेश

सीएम डॉ. मोहन यादव ने नव संवत्सर पर जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरुआत की जानकारी दी। यह अभियान शिप्रा तट, उज्जैन से प्रारंभ होकर प्रदेश के जल स्रोतों को सुरक्षित करने और जल संरक्षण की पारंपरिक पद्धतियों को नई तकनीक से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि इसे जन आंदोलन बनाएं। नवसंवत्सर के इस अवसर पर सीएम ने कहा कि नवचेतना और नवसृजन के साथ सभी मिलकर विकसित मध्यप्रदेश और विकसित भारत की दिशा में कदम बढ़ाएं। उन्होंने प्रदेशवासियों को सुखी, समृद्ध और आनंदमय जीवन की शुभकामनाएं दी।

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