MP News: मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में लंबे समय से कुटुंब न्यायालय में चल रहे पति-पत्नी के विवाद का आखिरकार समाधान हो गया। विवाद के पीछे दंपत्ति की मासूम बेटी की भलाई सबसे बड़ा कारण रही। नेशनल लोक अदालत का आयोजन शनिवार को न्यायालय परिसर में किया गया, जिसमें लगभग 20 मामलों में दंपतियों के बीच समझौते संपन्न हुए। जो दंपती न्यायालय में शामिल नहीं हो पाए, उनके समझौते मोबाइल और ऑनलाइन माध्यम से कराए गए।
ऑनलाइन समझौते से भी हुआ विवाद का निवारण
खंडवा की कुटुंब न्यायालय ने कई मामलों में ऑनलाइन समझौते करवाए। इस दौरान एक विशेष मामला दिल्ली में रहने वाले दंपति का भी था। पति धर्मेंद्र (परिवर्तित नाम) दिल्ली में नौकरी करते हैं, जबकि पत्नी ज्योति (परिवर्तित नाम) खंडवा में रहती हैं। शादी के बाद पत्नी दिल्ली नहीं जाना चाहती थी, जबकि पति और उनकी दिव्यांग बेटी के भविष्य को लेकर उसे दिल्ली ले जाना चाहते थे। न्यायालय ने ऑनलाइन माध्यम से दंपति को समझाया और बेटी की परवरिश के लिए दोनों को साथ रहने का समझौता करवाया।
न्यायाधीश की समझाइश से राजी हुए पति-पत्नी
कुटुंब न्यायाधीश योगराज उपाध्याय ने दंपत्ति को समझाया कि छोटी-छोटी बातों पर विवाद से रिश्ते न टूटें और आपस में सहमति से समस्याओं को सुलझाएं। उन्होंने पति-पत्नी को भविष्य में होने वाली मानसिक और सामाजिक परेशानियों के बारे में भी अवगत कराया। दिव्यांग बेटी की भलाई पर जोर देने के बाद दोनों ने समझौता कर लिया और साथ रहने के लिए तैयार हो गए। न्यायाधीश ने समझौते में शामिल दंपतियों को तुलसी का पौधा भेंट कर शांति और समृद्धि की प्रेरणा भी दी।
विवाद सुलझा, परिवार में लौट आई खुशहाली
इस समझौते से सबसे बड़ी राहत उनकी दिव्यांग बेटी को मिली। लंबे समय तक चले विवाद के बावजूद परिवार ने समझदारी दिखाते हुए बेटी के भविष्य को प्राथमिकता दी। अदालत की मध्यस्थता और न्यायाधीश की संवेदनशील समझाइश ने परिवार के लिए स्थायी समाधान प्रस्तुत किया। इस तरह नेशनल लोक अदालत के माध्यम से परिवारों में शांति और संतुलन कायम करने की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण सामने आया।


