MP News: मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के जवासिया गांव में एक ऐसा मंजर देखने को मिला जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं लेकिन दिलों को मुस्कुरा दिया। 71 साल के सोहनलाल जैन की अंतिम यात्रा के दौरान उनके सबसे अच्छे दोस्त अंबालाल प्रजापति ने रोने के बजाय संगीत पर थिरकते हुए उन्हें विदाई दी। ये नजारा किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था लेकिन भावनाओं से इतना भरा हुआ था कि हर शख्स की रूह कांप गई।
दोस्त की आखिरी ख्वाहिश ने जीता दिल
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो और एक पत्र ने लोगों के दिलों को छू लिया है। यह पत्र सोहनलाल ने अपनी मौत से पहले लिखा था जिसमें उन्होंने अपने दोस्त अंबालाल से अंतिम यात्रा में न रोने और नाचने की ख्वाहिश जाहिर की थी। 51 वर्षीय अंबालाल प्रजापति ने इस वादे को निभाने में एक पल की भी देर नहीं की और जब शव यात्रा निकली तो ग़म और श्रद्धा के बीच वह संगीत पर झूमते दिखे।
दोस्त हो तो ऐसा…अंतिम यात्रा में रोए नहीं, नाचे…
मामला मंदसौर के जवासिया गांव का है।जहां दोस्त सोहनलाल जैन की मौत हो जाती है। उनकी मौत पर दौस्त अम्बालाल प्रजापत ने डांस किया। मरने से पहले सोहन लाल को लिखकर देकर गए थे कि गाजे बाजे से शव लेकर जाए। साथ में नाचते चले। #राजस्थान pic.twitter.com/00hcahKJXd— एक नजर (@1K_Nazar) July 31, 2025
जब प्रातः फेरी बनी दोस्ती की नींव
अंबालाल ने बताया कि उनकी और सोहनलाल की दोस्ती वर्षों पुरानी थी। दोनों हर दिन गांव की प्रातः फेरी में साथ भाग लेते थे और यही दिनचर्या उनकी गहरी दोस्ती की नींव बन गई। दो साल पहले सोहनलाल को कैंसर हो गया था। उन्होंने रतलाम से लेकर अहमदाबाद तक इलाज कराया लेकिन ज़िंदगी की जंग हार गए। फिर भी उन्होंने जाते-जाते दोस्ती की मिसाल कायम कर दी।
भावुक कर देने वाला अंतिम नृत्य
अंबालाल ने कहा कि सोहनलाल अक्सर उनसे कहते थे कि मेरी अंतिम यात्रा में कोई आंसू नहीं बहाना बल्कि मुझे नाचते हुए विदा करना। जब वह दिन आया तो अंबालाल ने दोस्ती का फर्ज निभाया और दुख के सागर में भी खुशी की लहर पैदा कर दी। उनके चेहरे पर मुस्कान थी लेकिन आंखों में गहराई से भरा दर्द भी साफ दिख रहा था।
सोशल मीडिया पर बजी दोस्ती की ताल
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। एक यूज़र ने लिखा, “दोस्ती की मिसाल। आखिरी वादा निभाते हुए दोस्त ने अंतिम यात्रा में किया नृत्य।” लोग इसे सच्ची और दुर्लभ दोस्ती की कहानी बता रहे हैं। यह सिर्फ एक आखिरी विदाई नहीं थी बल्कि उस दोस्ती की अमर गाथा थी जो जीवन के अंतिम क्षण तक कायम रही।


