MP News: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भोजशाला-मस्जिद परिसर का दौरा करने का लिया अहम निर्णय

MP News: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने धार के भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर को लेकर जारी विवाद पर बड़ा कदम उठाया है। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगल पीठ ने दो अप्रैल से पहले परिसर का दौरा करने का आदेश दिया है। यह विवाद काफी समय से चल रहा है। हिंदू पक्ष इसे वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे 11वीं सदी का कमाल मौला मस्जिद बताता है। कोर्ट ने दो अप्रैल को नियमित सुनवाई की तारीख तय की है और परिसर का दौरा मामले के तथ्य स्पष्ट करने के लिए किया जाएगा।

दौरे में पक्षकारों की उपस्थिति पर रोक

हाई कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि विवादित परिसर का दौरा किया जाएगा, लेकिन इस दौरान किसी भी पक्ष को मौके पर रहने की अनुमति नहीं होगी। कोर्ट ने अलग-अलग अंतरिम अर्जियों को सुनवाई के लिए मंजूर किया और कहा कि दस्तावेज और हलफनामे अदालत में पेश किए जा सकते हैं। कोर्ट ने आश्वासन दिया कि सभी पक्षों को मामले में अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलेगा। यह कदम विवादित परिसर की वास्तविक स्थिति और ऐतिहासिक स्वरूप को समझने के लिए उठाया गया है।

एएसआई की रिपोर्ट ने बढ़ाई विवाद की गंभीरता

धार का विवादित परिसर एएसआई द्वारा संरक्षित है। एएसआई ने दो साल पहले वैज्ञानिक सर्वेक्षण करके विस्तृत रिपोर्ट सौंप दी थी। इस 2,000 पन्नों की रिपोर्ट में कहा गया है कि मस्जिद के निर्माण से पहले परिसर में धार के परमार राजाओं की शासनकाल की विशाल संरचना विद्यमान थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि सजावटी स्तंभ और वास्तुकला के आधार पर यह माना जा सकता है कि मस्जिद के स्तंभों में प्राचीन मंदिरों के हिस्सों का पुन: उपयोग किया गया। इस रिपोर्ट ने दोनों पक्षों के बीच विवाद और भी बढ़ा दिया है।

दोनों पक्षों का दावा और वीडियोग्राफी की मांग

हिंदू पक्ष का दावा है कि एएसआई सर्वेक्षण में मिले सिक्के, मूर्तियां और शिलालेख साबित करते हैं कि परिसर मूलत: प्राचीन मंदिर था। वहीं, मुस्लिम पक्ष ने सर्वेक्षण पर सवाल उठाते हुए इसे खारिज किया। मुस्लिम पक्ष के याचिकाकर्ता मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी के नेता अब्दुल समद ने कोर्ट में अर्जी दायर कर वीडियोग्राफी और रंगीन तस्वीरें मुहैया कराने की मांग की है। उनका दावा है कि सर्वेक्षण में जैन और बौद्ध समुदायों से जुड़ी मूर्तियां भी शामिल की गई हैं। वक्फ बोर्ड और मुतवल्ली की ओर से भी अदालत में अपने दावे पेश किए जा रहे हैं।

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