MP News: Narsinghpur नगरपालिका कार्यालय में बुधवार को लोकायुक्त की कार्रवाई ने पूरे परिसर में हड़कंप मचा दिया। यहां पदस्थ बाबू संजय तिवारी को 25 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। अचानक हुई इस कार्रवाई के बाद दफ्तर में अफरा तफरी का माहौल बन गया और कर्मचारियों के बीच पूरे दिन इस घटना की चर्चा होती रही। इस कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी दफ्तरों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिकायत और लंबित भुगतान का मामला
लोकायुक्त इंस्पेक्टर ब्रजमोहन सिंह नरवरिया के अनुसार शिकायतकर्ता भीष्म नारायण राजपूत एक कंस्ट्रक्शन कंपनी संचालित करते हैं। उनकी कंपनी को कृष्णा वार्ड के मरहई माता क्षेत्र में पेवर ब्लॉक निर्माण का ठेका मिला था। काम पूरा होने के बाद करीब 3.39 लाख रुपये का भुगतान लंबित था। इसी भुगतान को जारी कराने के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही थी, लेकिन इसी दौरान रिश्वत की मांग सामने आई जिसने पूरे मामले को गंभीर बना दिया।
बाबू पर कमीशन मांगने और धमकी देने का आरोप
आरोप है कि बिल पास करने के एवज में बाबू संजय तिवारी ने 15 प्रतिशत कमीशन की मांग की, जो लगभग 50 हजार रुपये बनती थी। जब शिकायतकर्ता ने इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई, तो आरोपी कम राशि लेने पर सहमत हो गया और भुगतान जारी होने के बाद रिश्वत देने की बात तय हुई। शिकायतकर्ता रिश्वत देने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन आरोप है कि बाबू ने एफडीआर यानी सिक्योरिटी डिपॉजिट रोकने और अन्य भुगतान अटकाने की धमकी दी। इस दबाव के चलते शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त से संपर्क कर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
ट्रैप कार्रवाई और आरोपी की गिरफ्तारी
शिकायत की पुष्टि होने के बाद लोकायुक्त टीम ने योजना बनाकर ट्रैप तैयार किया। आरोपी ने 38 हजार रुपये की मांग की थी, लेकिन शिकायतकर्ता 25 हजार रुपये ही जुटा सके। तय योजना के अनुसार बुधवार को जैसे ही संजय तिवारी ने अपने कार्यालय में रिश्वत की रकम ली, लोकायुक्त टीम ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया। इसके बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की विधिक कार्रवाई जारी है। इस कार्रवाई के बाद नगरपालिका कार्यालय की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं।


