MP News: रविवार को मध्यप्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 9 आईएएस अधिकारियों का तबादला कर दिया। इस फेरबदल का सबसे बड़ा असर मुख्यमंत्री कार्यालय पर पड़ा है। डॉ. राजेश राजोरा को मुख्यमंत्री कार्यालय से हटा दिया गया है और उनकी जगह नीरज मंडलोई को नया अपर मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है। यह परिवर्तन मुख्यमंत्री कार्यालय की रणनीतिक टीम में ताजगी लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री कार्यालय से हटाए जाने के बावजूद डॉ. राजेश राजोरा को कई महत्वपूर्ण विभागों की अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। अब वे नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अतिरिक्त उपाध्यक्ष और नर्मदा बेसिन परियोजना कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक होंगे। इसके साथ ही उन्हें जल संसाधन विभाग का अतिरिक्त मुख्य सचिव भी बनाया गया है। यह दिखाता है कि सरकार डॉ. राजोरा के अनुभव का लाभ अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स में लेना चाहती है।

संजय दुबे को नगरीय विकास और आवास विभाग का अपर मुख्य सचिव बनाया गया है। वहीं, राखी सहाय को मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। संजय कुमार शुक्ला को सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) का अपर मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है। इसके अलावा डीपी आहूजा को सहकारिता विभाग का प्रमुख सचिव बनाया गया है। एम. सेल्वेंद्रन को सामान्य प्रशासन विभाग का सचिव और निशांत वरवड़े को कृषि विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है। प्रभाल सिपाही को उच्च शिक्षा विभाग का आयुक्त बनाया गया है।
मणिपुर में भी प्रशासनिक स्तर पर बड़ी हलचल हुई है। राज्यपाल अजय कुमार भल्ला के आदेश पर 11 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का तत्काल प्रभाव से तबादला किया गया है। इनमें 5 आईपीएस और 6 मणिपुर पुलिस सेवा के अधिकारी शामिल हैं। विक्टोरिया येंगखोम को CID (सुरक्षा) के एसपी पद से हटाकर मणिपुर पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज की अतिरिक्त निदेशक बनाई गई हैं। वहीं, चंदेल की एसपी बबीता रानी स्वैन को स्पेशल AIG (लॉ) के पद पर नियुक्त किया गया है।
यह तबादले एक ओर जहां प्रशासनिक कार्यों में गति लाने के लिए किए गए हैं, वहीं दूसरी ओर यह प्रयास भी हैं कि संवेदनशील राज्यों में स्थायित्व और अनुशासन बना रहे। विशेष रूप से मणिपुर में हाल के समय में उपजे तनाव को देखते हुए पुलिस महकमे में ये तबादले शांति बहाली की दिशा में एक अहम कदम माने जा रहे हैं। वहीं, मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री कार्यालय और प्रमुख विभागों में हुए बदलाव आगामी नीतिगत निर्णयों को प्रभावित कर सकते हैं।


