MP News: सात साल बाद पाकिस्तान की जेल से लौटे मानसिक रूप से बीमार भारतीय कैदी प्रसंजित रंगारी

MP News: मध्य प्रदेश के बलाघाट निवासी प्रसंजित रंगारी सात साल बाद पाकिस्तानी जेल से रिहा होकर 6 फरवरी को अपने परिवार से मिले। वह 2015 में अचानक लापता हो गया था और 2021 में पता चला कि वह पाकिस्तान की जेल में बंद था। मानसिक रूप से बीमार प्रसंजित ने इस दौरान जो कुछ झेला, उसकी पूरी कहानी उन्होंने साझा की। जेल में भारतीय कैदियों के साथ होने वाले व्यवहार को उन्होंने बखूबी बयान किया। उनकी रिहाई परिवार के लगातार प्रयासों और मानवाधिकार आयोग में दायर याचिका के बाद संभव हो सकी।

जीवन संघर्ष और मानसिक बीमारी की मार

प्रसंजित ने जब जबलपुर के रामदास खालसा इंस्टीट्यूट से B.Pharmacy की पढ़ाई पूरी की तो नौकरी की तलाश में इंदौर गए, लेकिन सफलता नहीं मिली। आर्थिक तंगी और निराशा ने उनकी मानसिक स्थिति को बिगाड़ दिया। वे मास्टर्स की पढ़ाई भी कर रहे थे, लेकिन परिवार की गरीबी के कारण उसे बीच में ही छोड़ना पड़ा। मानसिक बीमारी के कारण वे कई बार घर से भाग गए और लापता रहे। परिवार ने कई जगह मदद मांगी, लेकिन सफलता नहीं मिली। 2021 में उनकी बहन संगीमित्रा को पता चला कि प्रसंजित पाकिस्तान की जेल में बंद है। तब से उन्होंने उनकी रिहाई के लिए लगातार संघर्ष किया।

MP News: सात साल बाद पाकिस्तान की जेल से लौटे मानसिक रूप से बीमार भारतीय कैदी प्रसंजित रंगारी

पाकिस्तानी जेल में कैद जीवन

प्रसंजित ने बताया कि जेल में उन्हें सुबह 7 बजे उठाया जाता था और चाय के साथ ब्रेड दी जाती थी। 7:30 बजे से वे जेल के बागानों में पत्तियां तोड़ने और सफाई का काम करते थे। दोपहर में उन्हें मटन और चावल खिलाए जाते थे। शाम को टीवी देखने की अनुमति मिलती थी और रात 9 बजे उन्हें सोने भेज दिया जाता था। उन्होंने कहा कि मानसिक बीमारी के बावजूद जेल में कैदियों के साथ काफी सख्ती बरती जाती थी। उनके लिए यह सात साल बहुत कष्टदायक रहे, लेकिन वह अब अपने घर लौटकर खुश हैं और काम करने की इच्छा रखते हैं।

बहन संगीमित्रा का संघर्ष और रिहाई की प्रक्रिया

प्रसंजित की बहन संगीमित्रा ने 2021 के अंत में जानकारी मिलने के बाद भोपाल के कलेक्टर कार्यालय और कई अन्य स्थानों पर लगातार संपर्क किया। उन्होंने स्थानीय विधायक और सांसद से भी मदद मांगी, लेकिन केवल आश्वासन मिला। इसके बाद उन्होंने पड़ोसी मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील कपिल फुले की मदद ली, जिन्होंने मानवाधिकार आयोग में याचिका दायर की। याचिका में बताया गया कि प्रसंजित बिना मुकदमे के चार साल से अधिक समय तक पाकिस्तान की जेल में बंद थे और उनकी मानसिक बीमारी के कारण भेदभाव भी हुआ। 8 दिनों में मामला दर्ज हुआ और मार्च 2026 में रिहाई की प्रक्रिया तेज़ हुई। अप्रैल में पाकिस्तान ने भारत को उनकी जानकारी भेजी और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद अंततः प्रसंजित को रिहा किया गया।

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