MP News: 7 साल बाद पाकिस्तान की जेल से रिहा होकर बालाघाट लौटा मानसिक रूप से बीमार प्रसन्नजीत

MP News: बालाघाट के खैरलांजी गांव के रहने वाले प्रसन्नजीत रंगारी पाकिस्तान की जेल से 7 साल बाद अपने घर वापस लौटे हैं। शुक्रवार शाम उन्हें जिला प्रशासन की व्यवस्था के तहत अमृतसर से घर लाया गया। प्रसन्नजीत की रिहाई से परिवार और गांव वाले बेहद खुश हैं। खासकर उनकी बहन संघमित्रा, जिन्होंने सालों तक अपने भाई की रिहाई के लिए संघर्ष किया। गांव पहुंचने पर विधायक गौरव पारधी, एसडीएम, तहसीलदार और स्थानीय लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया।

मानसिक बीमारी के बीच लापता हुआ था प्रसन्नजीत

प्रसन्नजीत बी-फार्मेसी के छात्र थे, लेकिन अचानक मानसिक बीमारी के कारण साल 2017-18 में वे लापता हो गए थे। एक बार बिहार चले जाने के बाद वापस घर लौटे, लेकिन फिर 2019 में फिर लापता हो गए। परिवार ने उनकी तलाश की, लेकिन कहीं भी खबर नहीं मिली, जिसके बाद वे मृत मान लिए गए। दिसंबर 2021 में परिवार को पता चला कि प्रसन्नजीत पाकिस्तान की जेल में बंद हैं। उनके जेल में होने की जानकारी मिलने के बाद बहन संघमित्रा ने हरसंभव प्रयास शुरू किया ताकि भाई को वापस लाया जा सके।

MP News: 7 साल बाद पाकिस्तान की जेल से रिहा होकर बालाघाट लौटा मानसिक रूप से बीमार प्रसन्नजीत

31 जनवरी को हुई थी पाकिस्तान से 7 भारतीय कैदियों की रिहाई

31 जनवरी 2026 को पाकिस्तान से सात भारतीय कैदियों को रिहा किया गया, जिनमें प्रसन्नजीत रंगारी भी शामिल थे। प्रसन्नजीत को सुनिल अदे के नाम से पाकिस्तान की बाटापुर जेल में रखा गया था। उनकी रिहाई के बाद जिला प्रशासन ने अमृतसर से उन्हें बालाघाट तक लाने की व्यवस्था की। एक टीम में सचिव, रोजगार सहायक, पुलिस और राजस्व विभाग के अमला शामिल थे। प्रसन्नजीत के जीजा भी उनके साथ थे, जिन्होंने 5 फरवरी को अमृतसर से यात्रा शुरू की और 6 फरवरी की शाम को बालाघाट पहुंच गए।

रिहाई के बाद भी प्रसन्नजीत हैं कम बोलने वाले

रिहाई के बाद प्रसन्नजीत अभी ज्यादा बातचीत नहीं कर रहे हैं, लेकिन परिवार वालों ने बताया कि वे सबको पहचान तो रहे हैं। विधायक गौरव पारधी ने प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री का धन्यवाद किया, जिनकी कोशिशों से यह रिहाई संभव हुई। प्रसन्नजीत की बहन संघमित्रा ने अपने भाई की वापसी के लिए संघर्ष जारी रखा था, जिससे आखिरकार यह खुशी मिली। प्रशासन और पुलिस भी प्रसन्नजीत की देखभाल और पुनर्वास के लिए काम कर रहे हैं ताकि वे जल्द सामान्य जीवन में लौट सकें।

लेटेस्ट न्यूज़
- Advertisment -

धार्मिक

error: Content is protected !!