MP News: मध्य प्रदेश में IAS अधिकारी संतोष वर्मा की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। वर्मा पहले ही ब्राह्मण लड़कियों के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देने के विवाद में घिरे हुए थे। अब सत्र न्यायालय ने उन्हें MG रोड थाने में उपस्थित होकर हस्ताक्षर के नमूने देने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच में सहयोग करना अनिवार्य है और बेली रद्द करने का निर्णय केवल हस्ताक्षर नमूने देने के बाद ही लिया जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई 4 मार्च को होगी।
दो फैसलों ने बढ़ाई विवाद की आग
जांच अधिकारी और अतिरिक्त लोक अभियोजक योगेश जयस्वाल के अनुसार, वर्मा के खिलाफ लासुदिया थाने में दर्ज धोखाधड़ी मामले में निलंबित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विजयेंद्र रावत की अदालत ने दो अलग-अलग फैसले सुनाए। एक फैसले में वर्मा को बरी कर दिया गया, जिसे उन्होंने अपनी प्रमोशन के लिए प्रस्तुत किया। दूसरे फैसले में आपसी समझौते का जिक्र था। इन दो विरोधाभासी आदेशों के बाद ADJ रावत ने खुद MG रोड पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। मामला उजागर होने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया।

हस्ताक्षर नमूने देने में रुकावट
MG रोड पुलिस पूरी जांच कर रही है और दस्तावेजों की प्रामाणिकता सत्यापित करने के लिए वर्मा के हस्ताक्षर नमूनों की मांग कर रही थी। आरोप है कि वर्मा जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे और हस्ताक्षर देने से इंकार कर रहे थे। इसके बाद पुलिस ने अदालत में आवेदन किया और उनके जमानत रद्द करने की मांग रखी।
बचाव पक्ष और सरकार की दलीलें
सुनवाई के दौरान वर्मा के वकील ने अदालत को बताया कि उनके मुव्वकिल को अनुचित रूप से फंसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी के समय ही हस्ताक्षर लिए गए थे। वहीं, सरकार की ओर से बताया गया कि दस्तावेज फिलहाल हाईकोर्ट में जांच के अधीन हैं, इसलिए नए हस्ताक्षर नमूने जरूरी हैं। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने संतोष वर्मा को आदेश दिया कि वे पुलिस स्टेशन में जाकर हस्ताक्षर नमूने दें। केवल इसके बाद बेली रद्द करने का निर्णय लिया जाएगा।


