MP News: विधायक प्रीतम लोधी ने एसडीओपी को दी खुली चुनौती वीडियो ने मचाया हड़कंप

MP News: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में करैरा क्षेत्र में हुए सड़क हादसे के बाद अब मामला सियासी रंग लेता नजर आ रहा है। पिछोर विधायक प्रीतम लोधी के पुत्र दिनेश लोधी द्वारा कथित रूप से लापरवाही से वाहन चलाते हुए राहगीरों को टक्कर मारने की घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई की। लेकिन इस कार्रवाई के बाद विधायक का एक वीडियो सामने आया है, जिसने पूरे मामले को और ज्यादा विवादित बना दिया है। वीडियो के वायरल होते ही राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है और इस पर अलग अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

वायरल वीडियो में अधिकारी को दी गई खुली चुनौती

सोमवार सुबह वायरल हुए वीडियो में विधायक प्रीतम लोधी करैरा के एसडीओपी डॉ आयुष जाखड़ से तीखे और विवादित शब्दों में बात करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में विधायक कहते दिखाई देते हैं कि करैरा किसी के पिता की जागीर नहीं है और उनका बेटा वहां आएगा और चुनाव भी लड़ेगा। उन्होंने अधिकारी को चुनौती भरे अंदाज में यह भी कहा कि यदि दम है तो रोक कर दिखाएं। इस दौरान उन्होंने पुलिस अधिकारी पर पक्षपात के आरोप भी लगाए और कहा कि अधिकारी वहीं जाते हैं जहां उन्हें लाभ मिलता है। इस बयान के सामने आने के बाद प्रशासनिक मर्यादा और जनप्रतिनिधियों के आचरण को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

हादसे की पूरी घटना और पुलिस कार्रवाई

पूरा मामला 16 अप्रैल 2026 की सुबह का है जब दिनेश लोधी अपनी थार गाड़ी से जिम जा रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाते हुए उन्होंने कई राहगीरों को टक्कर मार दी, जिसमें पांच लोग घायल हो गए। घायलों को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। पीड़ित संजय परिहार की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया और जांच शुरू की। पुलिस ने वाहन पर लगी काली फिल्म और हूटर हटवाए तथा मोटर व्हीकल एक्ट के तहत चालानी कार्रवाई भी की। इसके साथ ही आरोपी को थाने बुलाकर पूछताछ की गई और घटना स्थल पर ले जाकर पूरी जानकारी ली गई।

पुलिस का पक्ष और बढ़ता विवाद

इस पूरे मामले पर एसडीओपी डॉ आयुष जाखड़ ने स्पष्ट किया कि पुलिस ने पूरी कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर की है और किसी प्रकार की व्यक्तिगत टिप्पणी या धमकी नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि आरोपी को केवल कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए बुलाया गया था। हालांकि विधायक के बयान और वीडियो के सामने आने के बाद यह मामला अब केवल एक सड़क हादसे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासन और राजनीति के टकराव का मुद्दा बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में संयम और कानून का पालन ही सबसे जरूरी है, ताकि न्याय प्रक्रिया पर किसी तरह का असर न पड़े।

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