MP News: मध्य प्रदेश के कटनी में 163 नाबालिग बच्चों से जुड़े कथित मानव तस्करी मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। इस घटना ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं बल्कि राज्यों के बीच भी विवाद की स्थिति पैदा कर दी है। बिहार के जन जागरण शक्ति संगठन ने इस पूरे मामले को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है और कई गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला अब तेजी से राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है।
अररिया से लातूर जा रहे बच्चों को रोका गया बालगृह में रखा गया
जानकारी के अनुसार अररिया जिले से बच्चों को लातूर और अन्य क्षेत्रों में स्थित मदरसों में शिक्षा के लिए भेजा जा रहा था। इस दौरान 163 बच्चों को कटनी में रोककर बालगृह में रखा गया। आरोप है कि इन बच्चों के साथ मदरसा शिक्षकों पर मानव तस्करी का मामला दर्ज किया गया जिसके बाद यह विवाद और बढ़ गया। बच्चों के परिजनों का कहना है कि वे पढ़ाई के लिए सहमति देकर बच्चों को भेज रहे थे और सभी आवश्यक दस्तावेज मौजूद थे।
अभिभावकों और संगठन ने जांच पर उठाए सवाल मुआवजे की मांग
बिहार में आयोजित पत्रकारवार्ता में जन जागरण शक्ति संगठन ने आरोप लगाया कि बच्चों को पूरी तरह वैध दस्तावेजों और अभिभावकों की सहमति के साथ भेजा गया था। संगठन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और बच्चों तथा शिक्षकों को मुआवजा देने की मांग की है। अभिभावकों का कहना है कि उनके बच्चों की शिक्षा बाधित हुई और उन्हें अनावश्यक रूप से रोका गया जिससे मानसिक और सामाजिक नुकसान हुआ।
बाल कल्याण समिति ने सुरक्षा कारणों का दिया हवाला जांच की बात कही
बाल कल्याण समिति कटनी ने इस मामले में अलग रुख अपनाया है। समिति का कहना है कि बच्चों के पास पर्याप्त वैध दस्तावेज नहीं थे और उनकी सुरक्षा को देखते हुए उन्हें रोकना आवश्यक था। समिति ने यह भी कहा कि पूरे मामले की जांच की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों इसके लिए सख्त दिशा निर्देश जारी किए जाएंगे। फिलहाल यह मामला लगातार तूल पकड़ रहा है और सभी पक्ष अपनी-अपनी दलीलें पेश कर रहे हैं।


