MP News: भारतीय जनता पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में मध्यप्रदेश की सभी 29 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया। इस जीत के पीछे ज़मीनी रणनीति, बूथ स्तर तक की पहुंच और जातिगत गणित का गहरा अध्ययन था। अब पार्टी इसी फॉर्मूले को आगामी 2028 के विधानसभा चुनाव में दोहराने जा रही है। पार्टी ने मिशन 2028 नाम से विशेष रणनीति तैयार की है जिसके तहत कुल 172 विधानसभा सीटों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इनमें 127 सीटें अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) बहुल क्षेत्र की होंगी और 45 सामान्य श्रेणी की सीटें भी होंगी जहां दलित और आदिवासी वर्ग का प्रभाव निर्णायक होता है।
पचमढ़ी में हुआ रणनीतिक मंथन, नए लक्ष्यों पर निगाह
हाल ही में पचमढ़ी में आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में बीजेपी विधायकों और सांसदों को मिशन 2028 को लेकर प्रशिक्षण दिया गया। इस शिविर में विशेषज्ञों के साथ मिलकर भाजपा ने उन क्षेत्रों की पहचान की जहां उनका प्रदर्शन कमजोर रहा था या जहां विपक्ष की पकड़ मजबूत मानी जाती है। खासतौर पर उन सामान्य सीटों पर ध्यान केंद्रित किया गया जहां दलित और आदिवासी वोट बैंक निर्णायक भूमिका में हैं। पार्टी ने सभी विधायकों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इन समुदायों के बीच संवाद बढ़ाएं और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए ठोस प्रयास करें।

बीजेपी संगठन अब सिर्फ चुनाव के समय ही नहीं बल्कि पूरे पांच साल तक कार्यकर्ताओं के माध्यम से क्षेत्र में सक्रिय रहने की योजना पर काम कर रहा है। मंडल और बूथ स्तर पर कमेटियों को फिर से सक्रिय किया जा रहा है और उनमें खासतौर पर अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लोगों को प्रतिनिधित्व देने पर बल दिया जा रहा है। पार्टी जानती है कि ये वर्ग अब सिर्फ भावनात्मक मुद्दों से नहीं बल्कि विकास, शिक्षा, रोजगार और योजनाओं के निष्पादन से प्रभावित होते हैं। ऐसे में संगठन ने प्रत्येक विधानसभा में इन वर्गों से जुड़े मुद्दों पर फोकस करते हुए काम शुरू कर दिया है।
आरक्षण के बदलते समीकरण को ध्यान में रखकर प्लानिंग
बीजेपी को इस बात का भी अनुमान है कि 2026 में होने वाली जनगणना और उसके बाद संभावित परिसीमन (delimitation) से विधानसभा सीटों के आरक्षण में बदलाव आ सकता है। पार्टी इन संभावित बदलावों को ध्यान में रखते हुए अभी से उन सामान्य सीटों पर ध्यान दे रही है जहां एससी-एसटी वर्ग की संख्या बहुतायत में है। ये संभव है कि इन सीटों में से कुछ भविष्य में आरक्षित हो जाएं। ऐसे में पार्टी अभी से वहां जमीनी पकड़ मजबूत कर रही है ताकि यदि सीट आरक्षित हो भी जाए तो वहां पार्टी की जड़ें बनी रहें।
बीजेपी मिशन 2028 को सिर्फ जीत तक सीमित नहीं रख रही है। पार्टी का मकसद है कि आगामी विधानसभा चुनाव में ऐसा बहुमत हासिल हो जिससे ना सिर्फ सरकार बनाई जा सके बल्कि राज्य में निर्णायक नीतिगत बदलाव भी संभव हो सकें। इसके लिए पार्टी हर क्षेत्र में “मोदी सरकार की योजनाएं – आपके द्वार” अभियान को और धार दे रही है। साथ ही पंचायत और नगर निगम चुनावों में भी उसी स्तर की तैयारी के संकेत दिए गए हैं ताकि पार्टी की नींव मजबूत बनी रहे और विपक्ष को कोई मौका ना मिल सके।


