MP News: आज मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में जल गंगा संर्वधन अभियान का समापन समारोह आयोजित किया गया। यह अभियान प्रदेश में जल संरक्षण को लेकर चलाया गया एक 90 दिवसीय विशेष प्रयास था। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 1518 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली विभिन्न परियोजनाओं का भूमिपूजन और लोकार्पण किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में वर्चुअली हिस्सा लिया और लोगों को संबोधित किया। उनका संदेश रहा कि जल का संरक्षण आज की सबसे बड़ी ज़रूरत है और यह अभियान देश को जल संकट से उबारने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
ग्राम पंचायत से लेकर प्रदेश स्तर तक जल संरक्षण का व्यापक असर
अभियान के तहत महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से 578 करोड़ रुपये की लागत से 57,207 जल संरक्षण कार्य किए गए। वहीं प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत 63 करोड़ की लागत से 888 कार्य पूरे किए गए। इसके अलावा कार्यों की निगरानी के लिए वॉटरशेड वर्क मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर की शुरुआत भी की गई। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक जल सहेजने के लिए हर स्तर पर काम हुआ। 84,930 फार्म तालाब और 20,955 पुराने जल संरचनाएं पुनर्जीवित की गईं।
मध्यप्रदेश सरकार का संकल्प
अक्षय जल, सुरक्षित कलमुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में खंडवा में आयोजित हो रहा जल गंगा संवर्धन अभियान समापन समारोह एवं वॉटरशेड सम्मेलन
दिनांक-30 जून
स्थान- मंडी प्रांगण, खंडवा @DrMohanYadav51 @minmpwrd #CMMadhyaPradesh… pic.twitter.com/ajDt1hzJ1h— Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) June 30, 2025
सिंचाई परियोजनाओं से हजारों किसानों को लाभ
कार्यक्रम में जल संसाधन विभाग की चार प्रमुख सिंचाई परियोजनाएं — भाम राजगढ़ मीडियम प्रोजेक्ट, बिहार सरोला बैराज, लजेहरा बैराज और हपला डीपला माइनर प्रोजेक्ट का लोकार्पण हुआ। इन परियोजनाओं से 8557 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी जिससे 21 गांवों के 7260 किसानों को लाभ होगा। साथ ही नर्मदा घाटी विकास विभाग की 563 करोड़ रुपये की लागत वाली ‘जवार माइक्रो लिफ्ट सिंचाई योजना’ की भी घोषणा की गई जिससे 52 गांवों के 21,666 किसानों को सीधा फायदा होगा।
शहरी क्षेत्रों में भी जल संचयन की पहल, अमृत सरोवर और संरचनाओं का विकास
अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा 74 जल भंडारण संरचनाओं का जीर्णोद्धार किया गया है जिन पर लगभग 50 करोड़ रुपये खर्च किए गए। साथ ही पूरे प्रदेश में 1283 अमृत सरोवरों का निर्माण चल रहा है। इन सरोवरों और फार्म तालाबों का असर यह है कि पहली ही मानसूनी बारिश में पानी संरक्षित होना शुरू हो गया है और खेतों के पास बने कुएं भी रिचार्ज हो रहे हैं। यह जल संरक्षण की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।
इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें तकनीक का शानदार उपयोग किया गया। मनरेगा परिषद ने ‘प्लानर’ और ‘सिपरी’ सॉफ्टवेयर के जरिए जल संरक्षण के लिए सटीक स्थानों का चयन किया। सायंटिफिक तरीकों से यह देखा गया कि किस दिशा में पानी बहता है और उसी हिसाब से फार्म तालाब, अमृत सरोवर और रिचार्ज पिट्स का निर्माण किया गया। जल संरक्षण के क्षेत्र में यह एक नया मॉडल बनकर उभरा है जिसे देशभर में अपनाया जा सकता है।


