MP News: मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में पुलिस ने फर्जी दस्तावेज और तस्वीरों का इस्तेमाल कर सिम कार्ड सक्रिय करने वाले संगठित रैकेट का भंडाफोड़ किया है। साइबर सेल और सिरोंज पुलिस स्टेशन की संयुक्त कार्रवाई में तीन पॉइंट ऑफ़ सेल (PoS) एजेंट गिरफ्तार किए गए। जांच में पता चला कि एक ही व्यक्ति की तस्वीर का इस्तेमाल कर कई नाम और पते के तहत सिम कार्ड जारी किए जा रहे थे।
एआई टूल ‘ASTR’ से सामने आया रैकेट
फ्रॉड की पूरी साजिश दूरसंचार विभाग के एआई आधारित टूल, ‘ASTR’ (Artificial Intelligence and Facial Recognition powered Solution for Telecom SIM Subscriber Verification) से उजागर हुई। इस जांच में खुलासा हुआ कि एक ही व्यक्ति की फोटो कई सिम कार्ड पर इस्तेमाल की जा रही थी। भोपाल मुख्यालय से प्राप्त इनपुट के आधार पर विदिशा साइबर सेल ने छानबीन शुरू की, जिसमें सिरोंज और गंज बसोदा के एजेंटों की संलिप्तता सामने आई।
चार सालों तक चलाया गया रैकेट
एसपी रोहित कश्यप ने बताया कि आरोपियों—इम्तियाज, फ़राज़ खान और चत्रवंश (उर्फ संजू कुशवाह)—ने 2019 से 2022 तक यह फर्जी सिम नेटवर्क चलाया। ये अन्य लोगों के आधार और वोटर आईडी का इस्तेमाल करते थे, लेकिन सिम कार्ड जारी करने के लिए किसी और व्यक्ति की फोटो लगाते थे। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्हें यह तरीका सिम बेचने पर मिलने वाले बोनस और सिम पोर्ट करने पर मिलने वाली कमिशन कमाई के लिए अपनाना पड़ा।
डिजिटल वॉलेट और अन्य इस्तेमाल भी हुआ
जांच में यह भी पता चला कि इन फर्जी सिम कार्डों का इस्तेमाल डिजिटल वॉलेट बनाने, जैसे पेटीएम अकाउंट खोलने में भी किया गया। पुलिस फिलहाल अन्य संभावित आपराधिक उपयोगों की जांच कर रही है। गिरफ्तार आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उनके खिलाफ धोखाधड़ी, दस्तावेज़ फर्जीवाड़ा और आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज किए गए हैं।


