MP News: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करेरा उपखंड में सरकारी जमीन से जुड़े बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। जांच में यह सामने आया है कि राजस्व विभाग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलकर सरकारी जमीन का गबन किया। इस मामले में नौकरशाहों और कर्मचारियों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के आधार पर सात लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू की गई है, जिनमें नायब तहसीलदार, पटवारी, क्लर्क और रीडर शामिल हैं।
जांच में सामने आया संगठित योजना का जाल
कलेक्टर रविंद्र कुमार चौधरी के निर्देश पर डिप्टी कलेक्टर शिवदयाल ढाकड़ ने इस मामले की पूरी जांच की। जांच में यह सामने आया कि राजस्व रिकॉर्ड में फर्जीवाड़ा, दस्तावेजों की छेड़छाड़ और फाइलों को नष्ट करने जैसे गंभीर कृत्य किए गए थे। तहसीलदार की शिकायत के आधार पर दीनारा थाना में FIR दर्ज की गई। जांच में यह खुलासा हुआ कि अधिकारियों और कर्मचारियों ने वर्षों तक जमीन के रिकॉर्ड में मनमानी की और जमीन के खरीद-फरोख्त में शामिल रहे।
1980 से चल रही थी फर्जीवाड़ा की साजिश
जांच में पता चला कि सरकारी सर्वे नंबर 101 और 247 से जुड़ी अनियमितताएं 1980-81 के सर्वे से शुरू हुईं और 1989-90 के समय से इस जमीन की खरीद-फरोख्त जारी रही। दस्तावेजों में पन्नों को हटाना, सर्वे नंबर बदलना और जमीन की जानकारी में अनधिकृत बदलाव किए गए। फर्जी पट्टे जारी किए गए, लेकिन उनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं मिला। इस प्रकार यह पूरा मामला एक संगठित और लंबे समय से चल रही साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है।
पुलिस चौकी और अन्य रिकॉर्ड भी नहीं बचे
जांच में यह भी सामने आया कि इस घोटाले में गांव की पुलिस चौकी के सर्वे नंबर तक को रिकॉर्ड से हटा दिया गया। इससे प्रशासनिक स्तर पर मिलीभगत और लापरवाही का गंभीर प्रमाण मिलता है। अंततः शिकायत के बाद यह मामला कलेक्टर तक पहुंचा और ऑनलाइन रिकॉर्ड की छेड़छाड़ के माध्यम से जमीन को बेचने से रोकने की कोशिश का खुलासा हुआ। अब करोड़ों की जमीन से जुड़े इस घोटाले की पूरी गुत्थी उजागर हुई है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है।


