MP News: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के युवक देवा डहरिया की जिंदगी एक समय बेहद कठिन परिस्थितियों में गुजर रही थी। हाथों में ईंटों का बोझ और माथे पर पसीने की बूंदें उसकी रोजमर्रा की पहचान बन चुकी थीं। जिस उम्र में युवा अपने भविष्य के सपने संजोते हैं उसी उम्र में देवा को परिवार की आर्थिक स्थिति के कारण पढ़ाई छोड़कर मजदूरी का रास्ता अपनाना पड़ा। किताबों से दूर होकर उसने अपने परिवार का सहारा बनने का निर्णय लिया। यह दौर उसके जीवन का सबसे चुनौतीपूर्ण समय था जहां सपनों की जगह जिम्मेदारियों ने ले ली थी।
कोविड काल बना जीवन का टर्निंग प्वाइंट
साल 2020 में जब कोविड-19 महामारी ने पूरे देश को प्रभावित किया तब देवा के जीवन में भी एक बड़ा बदलाव आया। लॉकडाउन के चलते काम बंद हो गया और वह अपने गांव लौट आया। यहीं से उसकी जिंदगी ने एक नई दिशा पकड़नी शुरू की। उसके दोस्त रोशन खुटे ने उसे छत्तीसगढ़ ओपन स्कूल के बारे में जानकारी दी। इसी प्रेरणा के बाद देवा ने करीब आठ साल बाद फिर से पढ़ाई शुरू करने का फैसला लिया। यह निर्णय उसके भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ जिसने उसकी किस्मत बदल दी।
लगातार मेहनत और असफलताओं के बाद सफलता
देवा ने कोरोना काल में ही 10वीं की परीक्षा पास की और इसके बाद वर्ष 2023 में कोचिंग शुरू कर दी। उसने पुलिस भर्ती के साथ साथ आर्मी एसएससी जीडी और नगर सैनिक जैसी कई परीक्षाओं में भी हिस्सा लिया लेकिन शुरुआती प्रयासों में सफलता नहीं मिली। बावजूद इसके उसने हार नहीं मानी और लगातार तीन वर्षों तक कड़ी मेहनत और अभ्यास जारी रखा। उसकी मेहनत और धैर्य ने आखिरकार रंग दिखाया और वर्ष 2026 में उसका चयन रायपुर जिले में पुलिस आरक्षक के पद पर हो गया। यह सफलता उसके संघर्ष और आत्मविश्वास का परिणाम थी।
ईंट भट्ठे से वर्दी तक का प्रेरणादायक सफर
आज देवा डहरिया रायपुर में डीसीपी के अधीन प्रशिक्षण ले रहा है और एक पुलिस आरक्षक के रूप में अपने नए जीवन की शुरुआत कर चुका है। जो व्यक्ति कभी ईंट भट्ठे पर काम करता था वह अब कानून व्यवस्था का हिस्सा बनकर समाज की सेवा करने जा रहा है। उसका यह सफर इस बात का उदाहरण है कि कठिन परिस्थितियां भी अगर हिम्मत और लगन हो तो सफलता में बदल सकती हैं। देवा की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो संघर्षों से जूझ रहे हैं और अपने सपनों को पूरा करने की उम्मीद रखते हैं।


