MP News: मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने न्याय व्यवस्था और पारिवारिक रिश्तों दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक महिला ने अपने पति से तलाक पाने के लिए अदालत को गुमराह करते हुए ऐसा तरीका अपनाया, जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह गया। महिला ने अपने ही पति की बहन को उसकी दूसरी पत्नी बताकर कोर्ट में पेश कर दिया और इस आधार पर तलाक की डिक्री हासिल कर ली। अब यह मामला हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है और कानूनी बहस का विषय बना हुआ है।
28 साल पुरानी शादी और बढ़ता विवाद
मिली जानकारी के अनुसार, 46 वर्षीय महिला की शादी वर्ष 1998 में हिंदू रीति-रिवाजों के तहत हुई थी। उसका पति एक निजी मार्केटिंग कंपनी में अधिकारी है, जिसके चलते उसे अक्सर काम के सिलसिले में बाहर रहना पड़ता था। समय के साथ पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ते गए और रिश्ते में खटास आ गई। हालात ऐसे हो गए कि वर्ष 2015 से दोनों अलग-अलग रहने लगे। महिला किसी भी हालत में तलाक चाहती थी, जबकि पति इसके लिए तैयार नहीं था, जिससे मामला और जटिल हो गया।
तलाक के लिए रची साजिश, ननद को बना दिया ‘दूसरी पत्नी’
वर्ष 2021 में महिला ने कुटुंब न्यायालय में तलाक की याचिका दायर की और पति पर दूसरी शादी करने का गंभीर आरोप लगाया। सबूत के तौर पर उसने एक पारिवारिक फोटो पेश की, जिसमें पति अपने रिश्तेदारों के साथ खड़ा था। हैरानी की बात यह रही कि उसी फोटो में मौजूद अपनी ननद को ही महिला ने पति की दूसरी पत्नी बता दिया। कोर्ट ने प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर महिला के पक्ष में एकपक्षीय फैसला सुना दिया। इस दौरान पति को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाया और महिला को तलाक की डिक्री मिल गई।
सच सामने आया तो हाई कोर्ट पहुंचा मामला
पति के अनुसार, उस समय उसकी मां का निधन हो गया था और वह पारिवारिक जिम्मेदारियों में व्यस्त था, जिसके कारण वह कोर्ट प्रक्रिया पर ध्यान नहीं दे पाया। अप्रैल 2026 में जब उसे तलाक की जानकारी मिली, तो उसने मामले की जांच शुरू की। कोर्ट रिकॉर्ड और फोटो देखने के बाद वह हैरान रह गया, क्योंकि जिसे दूसरी पत्नी बताया गया था, वह उसकी सगी बहन थी। इसके बाद पति ने इस फैसले को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ग्वालियर बेंच में चुनौती दी है। अधिवक्ता धर्मेंद्र शर्मा के अनुसार, यह मामला अदालत को गुमराह करने और झूठे साक्ष्य पेश करने का गंभीर उदाहरण है। अब इस पर जल्द सुनवाई होने वाली है और सभी की नजरें अदालत के फैसले पर टिकी हैं।


