MP news: रात के सन्नाटे में सांप का कहर, अंधविश्वास बना मौत का कारण

MP news: सागर जिले के मलगोनी थाने के तहत आने वाले गांव चुरारी में मंगलवार की रात एक दर्दनाक हादसा हुआ। रात के लगभग 12 बजे सरोज रानी अपने 12 वर्षीय बेटे निलेश आदिवासी के साथ घर में सो रही थीं। तभी अचानक एक जहरीले सांप ने दोनों को डस लिया। मां-बेटे को नींद में ही यह हमला हुआ और थोड़ी ही देर में निलेश की तबीयत बिगड़ने लगी। सरोज रानी ने तुरंत परिवार को घटना की जानकारी दी लेकिन इसके बाद जो हुआ वह दिल दहला देने वाला है।

अंधविश्वास बना मौत की वजह: झाड़-फूंक में बर्बाद हुए कीमती घंटे

घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवारवालों ने सबसे पहले झाड़-फूंक का सहारा लिया। नजदीकी ओझाओं के पास मां-बेटे को ले जाया गया जहां तंत्र-मंत्र के चक्कर में 12 कीमती घंटे बर्बाद कर दिए गए। इस दौरान निलेश की हालत लगातार बिगड़ती रही लेकिन किसी ने अस्पताल ले जाने की जरूरत नहीं समझी। आखिरकार जब उसकी हालत गंभीर हो गई तब उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद निलेश को मृत घोषित कर दिया। वहीं, सरोज रानी की हालत अभी स्थिर बताई जा रही है।

MP news: सागर जिले के मलगोनी थाने के तहत आने वाले गांव चुरारी में मंगलवार की रात एक दर्दनाक हादसा हुआ। रात के लगभग 12 बजे सरोज रानी अपने 12 वर्षीय बेटे निलेश आदिवासी के साथ घर में सो रही थीं। तभी अचानक एक जहरीले सांप ने दोनों को डस लिया। मां-बेटे को नींद में ही यह हमला हुआ और थोड़ी ही देर में निलेश की तबीयत बिगड़ने लगी। सरोज रानी ने तुरंत परिवार को घटना की जानकारी दी लेकिन इसके बाद जो हुआ वह दिल दहला देने वाला है।

डॉक्टर नहीं ओझा: गांव में अब भी जिंदा है अंधविश्वास

थाना प्रभारी अशोक यादव ने बताया कि परिवार को समय रहते मेडिकल सहायता मिल जाती तो शायद निलेश की जान बच सकती थी। प्रशासन की लगातार चेतावनियों के बावजूद गांवों में अंधविश्वास की जड़ें इतनी गहरी हैं कि लोग अब भी डॉक्टर की बजाय पहले ओझा के पास जाते हैं। प्रशासन द्वारा जागरूकता अभियान चलाने के बावजूद अंधविश्वास पर विश्वास ज्यादा है।

बारिश में ज़हरीले जीवों का कहर

बुंदेलखंड क्षेत्र में मानसून के दौरान सांप और अन्य जहरीले जीवों के काटने की घटनाएं आम हो गई हैं। हर साल कई मासूम जानें सिर्फ इसलिए चली जाती हैं क्योंकि लोग समय पर अस्पताल नहीं पहुंचते। सांप के डसते ही एंटी-वेनम इंजेक्शन लगाना ज़रूरी होता है लेकिन गांव में जागरूकता की कमी और विश्वास का अभाव अक्सर ज़िंदगी छीन लेता है।

प्रशासन की कोशिशें और गांव की ज़मीनी हकीकत

सागर जिला प्रशासन कई बार गांवों में कैंप लगाकर लोगों को जानकारी देने की कोशिश करता है कि किसी भी ज़हरीले जीव के डसने पर बिना देरी अस्पताल जाएं। लेकिन गांव के लोगों में अब भी झाड़-फूंक की संस्कृति गहराई तक बसी है। नतीजा ये कि निलेश जैसे मासूम बच्चों की मौतें होती रहती हैं। प्रशासन ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और जांच जारी है लेकिन असली बदलाव गांव वालों की सोच में ही आ सकता है।

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