MP News: दिल्ली के Rouse Avenue Court ने एक अहम फैसले में कांग्रेस विधायक Rajendra Bharti को ग्रामीण बैंक धोखाधड़ी मामले में तीन साल की सजा सुनाई है। उनके साथ सह आरोपी रघुबीर शरण प्रजापति को भी अदालत ने दोषी ठहराते हुए सजा दी है। विशेष न्यायाधीश दिग विनय सिंह ने दोनों को धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेजों के उपयोग और आपराधिक साजिश के आरोपों में दोषी पाया। अदालत ने भारती पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जबकि प्रजापति पर कुल ढाई लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
धोखाधड़ी का पूरा मामला और आरोप
यह मामला जिला सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक से जुड़ा हुआ है जिसमें सावित्री श्याम और उनके बेटे Rajendra Bharti पर अनियमित तरीके से ब्याज निकालने का आरोप था। आरोपों के अनुसार 1998 में 10 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट की गई थी लेकिन तय शर्तों के विपरीत 1999 से 2011 तक हर साल ब्याज निकाला जाता रहा। अभियोजन पक्ष का कहना है कि इस प्रक्रिया में लगभग 18.5 लाख रुपये अवैध रूप से निकाले गए। अदालत ने पाया कि यह पूरी प्रक्रिया नियमों के खिलाफ थी और इसमें साजिश के तहत फर्जीवाड़ा किया गया। तीसरी आरोपी सावित्री श्याम का मुकदमे के दौरान ही निधन हो गया था।
सजा के बाद गई विधायकी और उपचुनाव की आहट
तीन साल की सजा मिलने के बाद Rajendra Bharti की विधानसभा सदस्यता स्वतः समाप्त हो गई है। मध्यप्रदेश विधानसभा सचिवालय ने इस संबंध में अधिसूचना जारी करते हुए दतिया सीट को रिक्त घोषित कर दिया है। यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 191 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत की गई है जिसमें दो साल या उससे अधिक की सजा मिलने पर सदस्यता खत्म हो जाती है। अब इस सीट पर उपचुनाव की तैयारी शुरू हो गई है और राजनीतिक दल अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
कांग्रेस की कानूनी रणनीति और सियासी असर
इस पूरे घटनाक्रम के बाद Indian National Congress ने कानूनी मोर्चे पर सक्रियता बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार वरिष्ठ नेता Kapil Sibal और Vivek Tankha इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दे सकते हैं। पार्टी की कोशिश होगी कि सजा पर स्थगन प्राप्त कर सदस्यता बहाल कराई जाए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दतिया जैसी महत्वपूर्ण सीट का खाली होना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है और इससे राज्य की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। आने वाले समय में यह मामला न केवल कानूनी बल्कि सियासी रूप से भी काफी अहम साबित हो सकता है।


