MP News: IAS अधिकारी सन्तोष वर्मा पर जाली कोर्ट ऑर्डर के आधार पर नियुक्ति विवाद फिर गरमा गया

MP News: मध्यप्रदेश विधानसभा में सन्तोष वर्मा, IAS अधिकारी और अनुसूचित जाति एवं जनजाति अधिकारी-कर्मचारी संघ (AJAKS) के अध्यक्ष, की IAS में नियुक्ति का मामला जोरदार चर्चा का विषय बना। विपक्ष के उपनेता हेमंत कटारे ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से इस पूरे मामले की विस्तृत जानकारी मांगी। मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि सन्तोष वर्मा को 6 अक्टूबर 2020 को अदालत द्वारा जारी बरी आदेश के आधार पर उनकी ईमानदारी प्रमाणित की गई थी। यह आदेश जिला लोक अभियोजक, इंदौर ने वैध घोषित किया था। चूंकि उच्च न्यायालय में इस आदेश के खिलाफ अपील का कोई आधार नहीं था, इसलिए उन्हें IAS में नियुक्ति दी गई।

शिकायत के बाद जांच प्रक्रिया शुरू

सरकार की प्रतिक्रिया के अनुसार, हर्षिता अग्रवाल ने 28 अप्रैल 2021 को मुख्य सचिव को शिकायत दी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि सन्तोष वर्मा ने जाली कोर्ट ऑर्डर प्रस्तुत किया, लंबित मामलों के बारे में झूठी जानकारी दी और इसी आधार पर IAS में नियुक्ति प्राप्त की। शिकायत के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने मामले को इंदौर पुलिस को सौंपा। पुलिस जांच में यह सामने आया कि 6 अक्टूबर 2020 का कथित कोर्ट ऑर्डर वास्तविक नहीं था। इसके बाद सन्तोष वर्मा के खिलाफ अपराध संख्या 155/2021 दर्ज की गई।

MP News: IAS अधिकारी सन्तोष वर्मा पर जाली कोर्ट ऑर्डर के आधार पर नियुक्ति विवाद फिर गरमा गया

गिरफ्तारी, जमानत और लंबित मुकदमा

पुलिस ने सन्तोष वर्मा को 10 जुलाई 2021 को गिरफ्तार किया। उनके जमानत आवेदन को निचली अदालत और उच्च न्यायालय दोनों में खारिज कर दिया गया। इसके बाद 27 जनवरी 2022 को उन्हें सर्वोच्च न्यायालय से जमानत मिली। उनके खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले संख्या 851/2016 में अभी तक कोई अंतिम आदेश नहीं आया है। जांच के दौरान उस जज, विजेंद्र सिंह रावत, की भूमिका भी सामने आई जिन्होंने कथित जाली आदेश पारित किया था। उन्हें निलंबित कर दिया गया है और उनके खिलाफ भी जांच जारी है।

विभागीय और केंद्रीय स्तर की कार्रवाई

सन्तोष वर्मा द्वारा AJAKS सम्मेलन में ब्राह्मण पुत्रियों के प्रति की गई अपमानजनक टिप्पणियों के लिए उन्हें नोटिस भी जारी किया गया। उनकी संतोषजनक प्रतिक्रिया न मिलने पर सामान्य प्रशासन विभाग ने विभागीय जांच शुरू की। राज्य सरकार ने पूरे मामले की जानकारी केंद्रीय कार्मिक और प्रशिक्षण मंत्रालय को भी भेजी है। पत्र में स्पष्ट किया गया कि 6 अक्टूबर 2020 का बरी आदेश अब अस्तित्व में नहीं है। इसलिए IAS पद में उनकी पदोन्नति पर निर्णय हेतु केंद्र सरकार से राय मांगी गई है। फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम निर्णय का इंतजार है।

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