MP News: राजगढ़ जिले के सदलपुर गांव से एक दिल को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां एक 65 वर्षीय बुजुर्ग गोपीलाल दांगी का अंतिम संस्कार प्लास्टिक की तिरपाल के नीचे किया गया। लगातार बारिश के कारण परिवार को शव की चिता जलाने के लिए तिरपाल का सहारा लेना पड़ा। बारिश की वजह से चिता जलाना मुश्किल हो गया और जब आग लगी तो तिरपाल भी जलने लगी जिससे स्थिति और बिगड़ गई।
श्मशान बना उपेक्षा का प्रतीक
सदलपुर के श्मशान घाट की हालत किसी जर्जर इमारत से कम नहीं है। यहां छांव के लिए एक छत तक नहीं है। न बारिश से बचाव का कोई उपाय है और न धूप से राहत की व्यवस्था। ऐसी स्थिति में लोगों को मजबूरी में खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार करना पड़ता है जो ग्रामीण जीवन की सच्ची और कड़वी हकीकत को उजागर करता है।

सुविधाओं का है घोर अभाव
श्मशान घाट में न तो पानी की व्यवस्था है न बिजली की और न ही बैठने की कोई सुविधा उपलब्ध है। पक्की सड़क तक श्मशान तक नहीं जाती जिससे शव को ले जाने में भी लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। किसी भी मौसम में यह घाट लोगों की परेशानी का कारण बन जाता है। ये सुविधाएं जो मूलभूत होनी चाहिए थीं वे आज भी सिर्फ कागज़ों में मौजूद हैं।
करोड़ों खर्च के बावजूद जमीनी हालात बेहाल
सरकार और पंचायतें श्मशान घाटों के विकास के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च कर चुकी हैं लेकिन ज़मीनी स्तर पर स्थिति जस की तस है। सदलपुर का मामला केवल एक उदाहरण नहीं बल्कि पूरे राज्य में फैली एक बड़ी लापरवाही की झलक है। ग्राम पंचायतों द्वारा इन कार्यों में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार की आशंका को भी नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता।
पंचायत की चुप्पी और जनता की पीड़ा
श्मशान की हालत सुधारने के लिए ग्राम पंचायत द्वारा कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया है। न कोई शिकायत निवारण और न ही स्थायी समाधान की कोशिश। गांववालों ने कई बार शिकायत की लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहा। पंचायत की निष्क्रियता और सरकारी योजनाओं की अनदेखी ग्रामीणों को ऐसे दर्दनाक हालात में छोड़ देती है जहां उन्हें अपनों की अंतिम विदाई भी अपमानजनक ढंग से करनी पड़ती है।


